अहमदाबाद के रामोल इलाके में स्थित अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण ब्लास्ट की जांच तेज हो गई है. इस मामले में रामोल पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया है. इनमें से दो आरोपियों को अदालत में पेश कर सात दिन यानी 27 जुलाई तक की पुलिस रिमांड हासिल की गई है. रिमांड मिलने के बाद पुलिस दोनों आरोपियों को घटनास्थल पर लेकर पहुंची और पूरे घटनाक्रम का क्राइम सीन रीक्रिएशन कराया.
इस हादसे में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चार घायलों का इलाज अभी भी अहमदाबाद सिविल अस्पताल में चल रहा है. पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की गहन जांच में जुटे हैं. रामोल पुलिस ने आरोपी मेहुल डोडिया और सादिक सैयद को रिमांड पर लेकर ब्लास्ट स्थल पर पूरे घटनाक्रम का पुनर्निर्माण कराया. तीसरी आरोपी रमीलाबेन डोडिया अस्पताल में भर्ती होने के कारण उन्हें अदालत में पेश नहीं किया जा सका.
अब तक हो चुकी है 10 लोगों की मौत
रामोल पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर एमआर चौधरी के अनुसार, पटाखा फैक्ट्री को संचालन की मंजूरी नहीं मिली थी. इसके बावजूद मेहुल डोडिया और सादिक सैयद मिलकर वहां अवैध रूप से फैक्ट्री चला रहे थे. दोनों मिलकर इस जगह का 15 हजार रुपये मासिक किराया देते थे. पुलिस के अनुसार, फैक्ट्री में 12 से 15 मजदूर काम कर रहे थे. शुरुआत में फैक्ट्री की मंजूरी मेहुल की मां रमीलाबेन डोडिया के नाम पर लेने का प्रयास किया गया था. बाद में मेहुल के नाम से भी अनुमति मांगी गई, लेकिन डीसा में हुए पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट के बाद बने नए नियमों के कारण अनुमति नहीं दी गई. इसके बावजूद आरोपियों ने कथित तौर पर अवैध तरीके से फैक्ट्री शुरू कर दी.
पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने रथयात्रा के दौरान पुलिस की व्यस्तता का फायदा उठाया और करीब 10 से 15 दिन पहले ही बिना किसी मंजूरी के फैक्ट्री शुरू कर दी थी. इस बीच हादसे में घायल एक और मरीज की अहमदाबाद सिविल अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. इसके साथ ही मृतकों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है. डॉक्टरों के अनुसार, मृतक का शरीर ब्लास्ट में 95 प्रतिशत तक झुलस गया था. उसका आईसीयू में इलाज चल रहा था, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका.
अस्पताल में अभी चार घायलों का इलाज जारी है. इनमें एक महिला और तीन पुरुष शामिल हैं. महिला की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज आईसीयू में चल रहा है. वहीं तीन अन्य मरीजों का उपचार बर्न्स वार्ड में किया जा रहा है. हादसे के बाद अहमदाबाद शहर कांग्रेस ने अहमदाबाद नगर निगम कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. कांग्रेस नेताओं ने नगर निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर मृतकों के परिजनों को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की.
कांग्रेस ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की भी मांग की है. पार्टी का कहना है कि यदि फैक्ट्री संचालन में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए. साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अवैध फैक्ट्रियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाए.
अहमदाबाद शहर कांग्रेस के अध्यक्ष सोनल पटेल ने कहा कि मृतकों के परिजनों को चार लाख रुपये का मुआवजा पर्याप्त नहीं है. उन्होंने कहा कि इससे पहले अहमदाबाद के यूएन मेहता अस्पताल में भी दो मजदूरों की मौत हुई थी, लेकिन प्रशासन ने उससे कोई सबक नहीं लिया. अब रामोल ब्लास्ट में 10 लोगों की जान चली गई है. उन्होंने सरकार से मृतकों के परिजनों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की.
सोनल पटेल ने यह भी सवाल उठाया कि जब शहर में बिना अनुमति के एक रेहड़ी तक नहीं लग सकती, तब इतनी बड़ी अवैध पटाखा फैक्ट्री कैसे संचालित होती रही. उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.
पुलिस मामले की जांच में जुटी
इस पूरे मामले की जांच के लिए अहमदाबाद शहर पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत ने संयुक्त पुलिस आयुक्त जयपाल सिंह राठौड़ की निगरानी में एक विशेष जांच दल का गठन किया है. एसआईटी में जोन-8 के डीसीपी मयूर पाटिल, एसीपी वाई.ए. गोहिल और रामोल पुलिस इंस्पेक्टर वी.डी. मोरी को शामिल किया गया है. पुलिस के अनुसार, एसआईटी 10 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपेगी. फिलहाल पुलिस, फॉरेंसिक साक्ष्यों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे मामले की जांच आगे बढ़ा रही है.