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तंग गलियां, बंद निकास और धुएं का गुबार... मालवीय नगर अग्निकांड की आंखों देखी, सामने सनसनीखेज खामियां

दिल्ली में लगी भीषण आग ने सिर्फ कई जिंदगियां नहीं छीनीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था, भवन निर्माण नियमों और आपदा प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए. धुएं से भरे कमरों में फंसे लोगों को बचाने के लिए स्थानीय युवक, पुलिस, फायर ब्रिगेड और मेडिकल टीमों ने जान जोखिम में डाल दी, लेकिन कई चौंकाने वाली खामियां भी उजागर कर दीं.

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स्थानीय युवकों, पुलिस और फायरकर्मियों की बहादुरी की वजह से बची 20 से 22 लोगों की जान. (Photo: ITG)
स्थानीय युवकों, पुलिस और फायरकर्मियों की बहादुरी की वजह से बची 20 से 22 लोगों की जान. (Photo: ITG)

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में लगी भीषण आग ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था, भवन नियमों के पालन और आपदा प्रबंधन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस हादसे में जहां एक ओर लोगों की जान जोखिम में पड़ी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों, पुलिस, फायर ब्रिगेड और आपातकालीन सेवाओं के कर्मियों की बहादुरी ने कई लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 

इस घटना के बाद सामने आ रहे प्रत्यक्षदर्शियों के बयान संकेत दे रहे हैं कि होटल में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी. यही लापरवाही हादसे की भयावहता बढ़ाने का कारण बनी. इस घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और बचाव दल मौके पर पहुंच गए. हालांकि, आग लगने की घटना रात करीब 8:20 बजे हुई थी, जबकि फायर ब्रिगेड की टीम लगभग 8:50 बजे मौके पर पहुंची. 

इस दौरान होटल के भीतर हालात तेजी से बिगड़ते चले गए. जब राहत और बचाव कार्य शुरू हुआ तब होटल के भीतर धुएं का घना गुबार भरा हुआ था. आग पर काबू पाने के साथ-साथ सबसे बड़ी चुनौती अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की थी. बचाव दल के सदस्य अपनी जान जोखिम में डालकर होटल के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचे और वहां फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास करते रहे. 

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मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने भी राहत कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. हौज रानी गांव और आसपास के क्षेत्रों के कई लोग सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे. उन्होंने फर्स्ट रिस्पांडर की भूमिका निभाई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब वे होटल के अंदर पहुंचे तो वहां का दृश्य बेहद भयावह था. कई लोग धुएं के कारण बेहोश पड़े थे और उन्हें यह तक नहीं पता था कि बाहर निकलने का रास्ता कहां है.

वैकल्पिक मार्ग नहीं होना बनी सबसे बड़ी समस्या

स्थानीय लोगों ने बताया कि होटल में सबसे बड़ी समस्या निकास व्यवस्था की थी. उनका कहना है कि होटल में आने-जाने के लिए केवल एक ही रास्ता था. आग लगने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं था. यही कारण रहा कि धुआं फैलने के बाद कई लोग अंदर ही फंस गए. कुछ लोग कमरों में बंद थे तो कुछ घबराहट में टॉयलेट और अन्य स्थानों में छिप गए थे.

घटनास्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार जिस इलाके में यह होटल बना हुआ है, वहां सामने का रास्ता तो अपेक्षाकृत ठीक था, लेकिन उसके अगल-बगल की गलियां बेहद संकरी हैं. जब खिड़कियां तोड़कर लोगों को बाहर निकाला जा रहा था, तब भी बचाव दल को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. मालवीय नगर के हौज रानी खास गांव के ठीक बगल में स्थित इस होटल के सामने एक छोटा पार्क भी है.

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होटल में ठहरे थे मैक्स में भर्ती मरीजों के परिजन 

इसके बावजूद आसपास की तंग गलियों ने राहत एवं बचाव कार्य को और जटिल बना दिया. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने घने और तंग इलाके में इस तरह के होटल को निर्माण और संचालन की अनुमति कैसे मिली. स्थानीय लोगों का कहना है कि आसपास एक-दो अन्य होटल भी हैं, जिनका इस्तेमाल अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन ठहरने के लिए करते हैं.

Malviya Nagar Fire

एक स्थानीय युवक, जो पुलिस के साथ होटल के भीतर गया था, ने बताया कि जब वे दूसरी मंजिल पर पहुंचे तो एक टॉयलेट के भीतर दो लोग अचेत अवस्था में पड़े मिले. धुएं के कारण उनकी हालत बेहद गंभीर थी. पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को बाहर निकाला गया. तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई. यह घटना बताती है कि हादसे में आग से ज्यादा घातक धुआं साबित हुआ.

मालवीय नगर अग्निकांड में चौंकाने वाला खुलासा

धुएं ने लोगों को बेहोश कर दिया और उनकी जान पर बन आई. इस पूरे हादसे में एक और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा था तब होटल के बेसमेंट में भी कई लोग मौजूद थे. बताया गया कि वहां छह से सात लोग फंसे हुए थे. वहां लगा चैनल गेट बंद था. इतना ही नहीं, उस पर ताला भी लगा हुआ था. फायर ब्रिगेड को कटर मंगवाना पड़ा. 

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चैनल गेट को काटने के बाद ही बेसमेंट में फंसे लोगों को बाहर निकाला जा सका. यदि बचाव दल कुछ देर और पहुंचता तो स्थिति और अधिक भयावह हो सकती थी. इस घटना के दौरान मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि होटल के ऊपरी हिस्से में धुआं इतना अधिक था कि वहां कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था. पुलिसकर्मियों और बचाव दल के सदस्यों को भी सांस लेने में भारी कठिनाई हो रही थी. 

कई पुलिसकर्मी लगातार अंदर जाकर लोगों को बाहर निकाल रहे थे. इस दौरान कुछ पुलिसकर्मियों की तबीयत भी बिगड़ गई. धुएं के प्रभाव के कारण उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई और मौके पर मौजूद लोगों को उन्हें सीपीआर तक देना पड़ा. इसके बाद उनकी स्थिति सामान्य हो सकी. इस हादसे में दिल्ली की आपातकालीन चिकित्सा सेवा CATS की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही. 

Malviya Nagar Fire

फायर ब्रिगेड-एंबुलेंस कर्मियों की अहम भूमिका

CATS 102 में कार्यरत मुबारक सिद्दीकी ने बताया कि जैसे ही घटना की सूचना मिली, उनकी टीम तुरंत मौके पर पहुंची. उस समय फायर ब्रिगेड के जवान लगातार लोगों को बाहर निकाल रहे थे. एंबुलेंस कर्मी घायलों को अस्पताल पहुंचा रहे थे. उन्होंने बताया कि गंभीर रूप से झुलसे और धुएं से प्रभावित लोगों को मैक्स अस्पताल, सफदरजंग अस्पताल और अन्य चिकित्सा संस्थानों में भर्ती कराया गया.

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बचाव कार्य के दौरान सबसे बड़ी चुनौती घायलों को तेजी से अस्पताल पहुंचाना था. घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल था. लोग अपने परिजनों को तलाश रहे थे. बचाव दल लगातार अंदर-बाहर आ रहा था. एंबुलेंस कर्मियों के अनुसार कई लोगों की हालत गंभीर थी. उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता थी. बताया जा रहा है कि होटल में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक ठहरे हुए थे.

इनमें से कई लोग अफ्रीकी देशों, विशेषकर कांगो से आए हुए थे. लोगों के अनुसार ये लोग इलाज के लिए दिल्ली आए थे. उनके परिजन इस होटल में ठहरे हुए थे. आग लगने के समय इनमें से कई लोग होटल के कमरों में मौजूद थे. कुछ झुलस गए जबकि कई धुएं के कारण बेहोश हो गए. हौज रानी गांव के आमिर खान उन स्थानीय लोगों में शामिल थे, जिन्होंने बचाव अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई. 

स्थानीय लोगों की वजह से बची 22 लोगों की जान

उन्होंने पुलिस और फायर ब्रिगेड के साथ मिलकर लगभग 20 से 22 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की थी. उन्होंने बताया कि होटल के अंदर हालात बेहद खराब थे. कई लोग घबराए हुए थे, कुछ लोग बुरी तरह झुलस गए थे. ऊपरी मंजिलों पर धुएं का घनत्व इतना अधिक था कि वहां खड़ा रहना भी मुश्किल था. लोगों ने बिना किसी प्रशिक्षण के केवल मानवता के नाते जान बचाने के लिए जोखिम उठाया. 

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गांव के सात से आठ युवकों ने लगातार होटल के भीतर जाकर फंसे लोगों को बाहर निकाला. उनका कहना है कि यदि स्थानीय लोग शुरुआती समय में मदद के लिए आगे नहीं आते तो मृतकों और घायलों की संख्या और अधिक हो सकती थी. इस पूरे हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल होटल की वैधता और सुरक्षा मानकों को लेकर उठ रहा है. इमारत को सीमित संख्या में कमरों के लिए अनुमति दी गई थी.

Malviya Nagar Fire

वहां 25 से 26 कमरे बनाए गए थे. यदि यह तथ्य सही पाया जाता है तो गंभीर नियम उल्लंघन होगा. सवाल ये भी है कि इतनी बड़ी संख्या में कमरे होने के बावजूद संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी. इसके अलावा होटल में आपातकालीन निकास मार्ग की कमी, बेसमेंट में बंद व्यवस्था, लोगों के फंसने की घटनाएं और धुएं के निकास की अपर्याप्त व्यवस्था कई गंभीर खामियों की ओर संकेत करती हैं. 

सुरक्षा की वास्तविकता को उजागर करता हादसा

भवन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान, विशेषकर होटल में अग्निशमन मानकों का पालन अनिवार्य होता है. फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर, इमरजेंसी एग्जिट, फायर सेफ्टी सिस्टम और नियमित सुरक्षा ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं ऐसे हादसों की गंभीरता को काफी हद तक कम कर सकती हैं. फिलहाल संबंधित एजेंसियां आग लगने के कारणों की जांच कर रही हैं. 

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इसके साथ ही होटल के निर्माण, लाइसेंस, अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र और संचालन संबंधी दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है और किन स्तरों पर लापरवाही हुई. मालवीय नगर होटल अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह राजधानी में भवन सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को भी उजागर करता है. 

इस घटना ने दिखा दिया कि संकट की घड़ी में स्थानीय लोग, पुलिस, फायर ब्रिगेड, CATS, एंबुलेंस कर्मी और आपातकालीन सेवाएं किस तरह मिलकर जान बचाने का काम करती हैं. लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाएगा तो ऐसी घटनाएं भविष्य में और भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती हैं. अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं.

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