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लाइसेंस 6 कमरे का, धंधा 25 का! दिल्ली की B&B पॉलिसी को किसने बनाया रिहायशी इलाकों का 'टाइम बम'?

दिल्ली के हौज रानी अग्निकांड के बाद फ्लोरिश स्टे के संचालन को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं. बी एंड बी पॉलिसी के तहत अधिकतम छह कमरों की अनुमति होने के बावजूद यहां 25 कमरे किराये पर चलाए जाने का दावा है. मामले ने एमसीडी, बीएसईएस, डीजेबी और पुलिस समेत कई एजेंसियों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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दिल्ली की बी एंड बी नीति में खामियों का फायदा उठाकर होटल की तरह चलता रहा फ्लोरिश स्टे (Photo: PTI)
दिल्ली की बी एंड बी नीति में खामियों का फायदा उठाकर होटल की तरह चलता रहा फ्लोरिश स्टे (Photo: PTI)

दिल्ली के हौज रानी इलाके में 'फ्लोरिश स्टे' नाम की एक जगह में आग लगी. जांच में पता चला कि यह जगह जिस लाइसेंस पर चल रही थी उसके हर नियम को तोड़ा गया था. लाइसेंस था 6 कमरों का, चल रहे थे 25 कमरे. मालिक को वहां रहना था, वो था नहीं. बिजली-पानी मिल रहा था घरेलू रेट पर, जबकि यह पूरा होटल जैसा धंधा था. और यह सब एमसीडी, डीजेबी, बीएसईएस और पुलिस सब की नाक के नीचे हो रहा था.

2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले दिल्ली में कमरों की कमी थी. तब केंद्रीय पर्यटन मंत्री अम्बिका सोनी ने 2006 में एक आइडिया दिया क्यों न लोग अपने घर के कुछ कमरे टूरिस्ट्स को दें? इसी से बना बेड एंड ब्रेकफास्ट पॉलिसी 2007. जिसे बी एंड बी पॉलिसी से भी जाता है.

इस कानून के तहत:

  • सिर्फ रहने वाले घर में यह धंधा हो सकता है.
  • मालिक को खुद वहीं रहना जरूरी है, अपने परिवार के साथ.
  • कम से कम एक और ज्यादा से ज्यादा छह कमरे ही दे सकते हैं.
  • जो कमरे किराए पर दिए जाएं, वो घर के कुल कमरों के दो-तिहाई से ज्यादा नहीं हो सकते.
  • 2008 में एक छोटा बदलाव आया मालिक के नाम उस पते का एक सरकारी कागज होना चाहिए, ताकि नकली मालिक न बन सकें.
  • 2021 में AAP सरकार के दौरान आवेदन का समय तीन महीने से घटाकर एक महीना किया गया.
  • मेहमानों की लिस्ट हर 15 दिन में लोकल अथॉरिटी और दिल्ली पुलिस को देनी होती थी.
  • विदेशी मेहमानों के लिए फॉर्म C/III भरना जरूरी था.

यह पॉलिसी दिल्ली के टूरिज्म डिपार्टमेंट के अंतर्गत आती है.

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आग लगने की घटना के एक दिन बाद, पुलिसकर्मी घटनास्थल पर निगरानी रखते हुए (Photo: PTI)


फ्लोरिश स्टे ने क्या-क्या तोड़ा?

मालिक लवकेश बजाज को 6 कमरों का लाइसेंस मिला था. लेकिन फ्लोरिश स्टे में 25 कमरे चल रहे थे. यानी लाइसेंस से चार गुना ज्यादा.

कानून कहता है मालिक को वहां रहना है. लवकेश बजाज वहां नहीं रहते थे. यह एक पूरी तरह से कॉमर्शियल प्रॉपर्टी बन गई थी, जबकि लाइसेंस रेसिडेंशियल बी एंड बी का था.

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इससे उन्हें क्या फायदा हो रहा था? बिजली और पानी के बिल घरेलू दर पर आ रहे थे. कॉमर्शियल से काफी सस्ती. प्रॉपर्टी टैक्स भी रेसिडेंशियल रेट पर. यानी सरकारी सुविधाएं घर की, धंधा होटल का.

कौन-कौन सी एजेंसियां सोती रहीं?

MCD (नगर निगम): यह B&B पॉलिसी के तहत रेजिस्ट्रेशन और इंस्पेक्शन एमसीडी के जरिए होती है. उन्हें चेक करना था कि मालिक वहां रह रहा है या नहीं. 25 कमरे चल रहे थे. क्या कभी जांच हुई?

DJB (दिल्ली जल बोर्ड): 6 कमरों की जगह 25 कमरे चलाओ. पानी की खपत अपने आप बढ़ेगी. DJB को यह अंतर दिखना चाहिए था, पर कोई सवाल नहीं उठाया गया.

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BSES (बिजली कंपनी): घरेलू मीटर पर कॉमर्शियल लेवल की बिजली खपत हो रही थी. BSES को अलर्ट होना चाहिए था. पर कुछ नहीं हुआ. यानी तीनों एजेंसियां जिनके पास डाटा था उन्होंने आंखें मूंद लीं.

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अग्निकांड के पीड़ितों में से एक के परिजन ट्रॉमा सेंटर के बाहर फोन पर बात करते हुए (Photo: PTI)


पुलिस का रोल क्या था और वो कब हटा?

2025 से पहले तक दिल्ली में किसी होटल, गेस्टहाउस या बी एंड बी को चलाने के लिए दिल्ली पुलिस की मंजूरी लेनी होती थी. यह सिर्फ कागजी काम नहीं था. पुलिस प्रॉपर्टी और मालिक की फिजिकल वेरिफिकेशन करती थी. देखती थी कि मालिक पर कोई क्रिमिनल केस तो नहीं है. यह भी जांचती थी कि कोई विदेशी तो आड़ में ऐसी जगह नहीं चला रहा, जो संदिग्ध तत्वों को पनाह दे सके.

इसकी वजह से MCD जैसी दूसरी एजेंसियों के साथ एक समन्वय भी बन जाता था. एक एजेंसी की नजर हो तो बाकी भी एक्टिव रहती थीं.

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जून 2025 में एलजी वीके सक्सेना की सरकार ने गृह मंत्रालय की एक नोटिफिकेशन के जरिए यह पुलिस की अनुमित की शर्त हटा दी. होटल, गेस्टहाउस और 5 अन्य जुड़े श्रेणियां के लिए. पुलिस सूत्रों के मुताबिक इससे इन जगहों पर पुलिस की पकड़ काफी कमजोर हो गई.

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तीन सरकारें, एक ही गलती

यह पॉलिसी 2007 में कांग्रेस ने बनाई. AAP ने 2021 में थोड़ा बदलाव किया, पर मूल खामियां नहीं सुधारीं. BJP की सरकार में 2025 में पुलिस की अनुमित ही हटा दी गई. तीनों सरकारें आईं, गईं. लेकिन फ्लूरिश स्टे जैसी जगहें जो बी एंड बी की आड़ में पूरे होटल बन गई थीं, वो बनती रहीं, फलती-फूलती रहीं.

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