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सिसोदिया 510 दिन, केजरीवाल 177… शराब घोटाला केस में बरी बड़े चेहरों ने जेल में बिताए कितने दिन

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शराब घोटाला केस में न सिर्फ अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया बल्कि सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया. बरी होने वालों में पूर्व सांसद के. कविता भी शामिल हैं. हालांकि फैसले को सीबीआई ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है.

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मनीष सिसोदिया, अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह समेत सभी आरोपी बरी हो गए हैं (File Photo- ITG)
मनीष सिसोदिया, अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह समेत सभी आरोपी बरी हो गए हैं (File Photo- ITG)

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की सियासत के लिए दिल्ली की कोर्ट से मानो संजीवनी बूटी मिल गई. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शराब घोटाला केस में न सिर्फ अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया बल्कि सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया. बरी होने वालों में पूर्व सांसद के. कविता भी शामिल हैं. हालांकि फैसले को सीबीआई ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है. 

549 पेज के अपने फैसले में दिल्ली की अदालत ने साफ कहा कि शराब नीति बनाने में किसी गड़बड़ी के सबूत नहीं हैं. कोर्ट ने सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का निर्देश भी दिया है. इस फैसले को सुनकर अरविंद केजरीवाल रो पड़े और उन्होंने कहा कि केजरीवाल कट्टर ईमानदार है. CBI केस में बरी होने के बाद अब शराब घोटाले के ED केस में भी राहत के लिए अर्जी लगाई जा सकती है. 

अरविंद केजरीवाल के बरी होने पर बीजेपी ने इसे तकनीकी आधार पर बरी होना कहा है. बीजेपी के मुताबिक AAP के पाप अभी धुले नहीं हैं. वहीं कांग्रेस इसमें पंजाब चुनाव के मद्देनजर बीजेपी और केजरीवाल की मिलीभगत देख रही है, जबकि एमके स्टालिन जैसे विपक्ष के अन्य नेताओं ने केजरीवाल को बधाई दी है. 

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जेल में किसने काटे कितने दिन?

शराब घोटाले के आरोपों ने आम आदमी पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को हिलाकर रख दिया था. इस मामले में पार्टी के कई बड़े नेताओं को लंबे समय तक सलाखों के पीछे रहना पड़ा था. आइए जानते हैं किसने कितने दिन जेल में काटे-

विजय नायर: AAP के पूर्व संचार प्रमुख विजय नायर भी इस केस में अहम आरोपी रहे. नायर को 14 नवंबर 2022 को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें 2 सितंबर 2024 को जमानत मिली. यानी वे करीब 23 महीने (658 दिन) जेल में रहे. 

मनीष सिसोदिया: इस मामले में मनीष सिसोदिया ने भी लंबी जेल काटी. फरवरी 2023 में गिरफ्तारी के बाद वे करीब 17 महीने (510 दिन) जेल में रहे. शिक्षा मॉडल के चेहरे माने जाने वाले सिसोदिया के लिए यह समय सबसे कठिन रहा.

अरविंद केजरीवाल: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मार्च 2024 में गिरफ्तार किया था. वे लगभग 6 महीने (177 दिन) तक जेल में रहे, जिसमें चुनाव प्रचार के लिए मिली अंतरिम जमानत की अवधि शामिल नहीं है.

संजय सिंह: राज्यसभा सांसद संजय सिंह लगभग 6 महीने (181 दिन) तक जेल में रहे, जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी.

के. कविता: बीआरएस नेता और पूर्व सांसद के. कविता भी इस मामले में 5 महीने (150 दिन) जेल में रहीं. बाद में उन्हें भी जमानत मिल गई थी.

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ये अन्य आरोपी भी हुए आरोप मुक्त

इसी मामले में अन्य आरोपियों को भी बड़ी राहत मिली है. इनमें कुलदीप सिंह, नरेंद्र सिंह, विजय नायर, अभिषेक बोइनपल्ली, अरुण रामचंद्र पिल्लई, मूथा गौतम, समीर महेंद्रू, अमनदीप सिंह ढल्ल, अर्जुन पांडेय, बुच्चीबाबू गोरंटला, राजेश जोशी, दामोदर प्रसाद शर्मा, प्रिंस कुमार, अरविंद कुमार सिंह, चनप्रीत सिंह रायट, दुर्गेश पाठक, अमित अरोड़ा, विनोद चौहान, आशीष चंद माथुर और शरथ चंद्र रेड्डी भी शामिल हैं.

केजरीवाल की पार्टी को मिली संजीवनी?

बता दें कि साल 2013 में जिस दिल्ली से केजरीवाल ने चौंकाते हुए राजनीति का आगाज किया था, उसी दिल्ली में हार की एक बड़ी वजह शराब घोटाले का आरोप रहा, जिससे अब बरी होने के बाद सब ये जानना चाहते हैं कि क्या केजरीवाल जो दिल्ली की हार के बाद हाशिए पर चले गए, फिर से राजनीति के केंद्र में आ पाएंगे? केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीधा चैलेंज देते हुए कहा कि दिल्ली में आज चुनाव करा दो. अगर बीजेपी की 10 से ज्यादा सीटें आ जाएं तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा.

जिस दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सत्तर में से 67 सीट तक जीत चुके थे, वहां ये शराब घोटाले के आरोप ही थे, जिनकी वजह से 70 फीसदी उम्मीदवारों को पिछले साल ही चुनाव में हारना पड़ा. ये शराब घोटाले के दाग ही रहे, जिसकी वजह से केजरीवाल ना खुद जीत पाए, ना सिसोदिया जीते, ना सौरभ भारद्वाज जीते, ना सोमनाथ भारती और ना सत्येंद्र जैन. लेकिन क्या अब कोर्ट के फैसले से आम आदमी पार्टी को दूसरे चुनावी राज्यों में खड़े होने वाली बूस्टर डोज मिल गई? 

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दरअसल, पंजाब में अगले साल शुरुआत में चुनाव हैं, जहां आम आदमी पार्टी सत्ता में है. उत्तराखंड में पार्टी ताकत लगा रही है. यहां भी अगले साल चुनाव है. गोवा में तो शराब घोटाले से आया पैसा ही चुनाव में खर्च करने का आरोप लगता रहा. उस गोवा में भी चुनाव अगले साल की शुरुआत में ही है. फिर अगले साल अंत में गुजरात का चुनाव होना है. उन सबसे पहले क्या केजरीवाल वाकई लोवर कोर्ट के फैसले से अपना जोश हाई कर पाएंगे? ये अब देखने वाली बात होगी.

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