बारिश का मौसम शुरू होने को है और जलभराव की समस्या पर बात शुरू हो गई है. कई जगह कूड़ा-कचरा फेंके जाने की वजह से नाले जाम हो जाते हैं, जो जलभराव के प्रमुख कारणों में से एक है. इसे लेकर अब दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपना लिया है. दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली नगर निगम से कहा है कि कचरा फैलाने या नाले में कूड़ा डंप करने पर लगने वाला 500 रुपये का जुर्माना नाकाफी है.
जलभराव की गंभीर समस्या को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने एमसीडी को इसे बढ़ाकर 5000 रुपये तक करने के लिए प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया है. दिल्ली हाईकोर्ट ने तैमूर नगर नाले में कचरा फेंकने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी. हाईकोर्ट ने जुर्माना बढ़ाने की बात कहते हुए स्थानीय पुलिस को भी यह निर्देश दिया है कि निगरानी बढ़ाई जाए.
दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि तैमूर नगर नाले सहित अन्य सार्वजनिक जगहों पर कचरा डालने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने में कतई नहीं हिचकिचाएंगे. दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि नाले जाम होने और जलभराव जैसी बड़ी और लगातार विकराल होती समस्याओं के आगे 500 रुपये का जुर्माना तो बहुत ही कम है.
दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने दिल्ली नगर निगम को निर्देश दिया है कि वह जुर्माना राशि बढ़ाने पर विचार करे. इस बाबत एक नया प्रस्ताव पेश और पास करें. दिल्ली हाईकोर्ट ने एमसीडी को निर्देश दिया कि इलाकों में (विशेषकर नालों के पास) पर्चे बांटे जाएं, ताकि लोगों को कचरा न फेंकने की चेतावनी दी जा सके.
दिल्ली हाईकोर्ट ने साथ ही सिर पर आ चुके मॉनसून को देखते हुए दिल्ली जल बोर्ड और एमसीडी को सीवेज डिस्चार्ज नालों में गिरने से रोकने के लिए तालमेल बैठाने को भी कहा है.