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छतीसगढ़: बिलासपुर में 45 गायों की मौत से मचा हंगामा, बीजेपी ने कांग्रेस सरकार पर उठाए सवाल

गायों की मौत पर विपक्षी दल बीजेपी ने छतीसगढ़ सरकार को घेरा है. पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह ने कहा है कि गौ हत्यारी सरकार को गोबर की चिंता है लेकिन गोठानों की बदहाल व्यवस्थाओं से भूख व दम घुटने से मर रहीं गायों के प्रति संवेदनाशून्य है.

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गायों की मौत पर शुरू हुई सियासत (फोटो: Aajtak)
गायों की मौत पर शुरू हुई सियासत (फोटो: Aajtak)

  • बिलासपुर के एक गांव में मरी पायी गयी हैं 45 गायें
  • गायों की मौत पर बीजेपी ने कांग्रेस सरकार को घेरा

छतीसगढ़ के बिलासपुर में एक साथ 40 से ज्यादा संख्या में गाय के मारे जाने के बाद हड़कंप मच गया है. बताया जा रहा है कि ये सभी गाय गांव के पंचायत भवन में रखी गयी थीं. घटना बिलासपुर के हिर्री थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम मेड़पारा की है. गांव के पंचायत भवन में रखे गए 70 से अधिक गायों में से करीब 45 गायों की मौत हो गयी है.

इस घटना के बारे में बिलासपुर के कलेक्टर डॉ सारांश मित्तर ने बताया कि 'ग्राम पंचायत के एक पुराने जर्जर भवन में गांववालों ने मवेशियों को अंदर डाल दिया था. प्रारंभिक जांच में डॉक्टरों ने बताया है कि घुटन के कारण लगभग 45 गायों की मौत हो गयी. पशु चिकित्सकों की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर जीवित मवेशियों को उपचार के बाद बचा लिया है और जिन मवेशियों की मौत हुई उनको दफना दिया गया है.'

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कलेक्टर ने बताया कि इस मामले में पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 13 तथा आईपीसी की धारा 429 के तहत अपराध दर्ज किया गया है और डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में जांच के लिये एक कमेटी का गठन कर दिया गया है. इसमें जो लोग भी दोषी पाये जायेंगे उनके खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जायेगी.

गायों की मौत पर विपक्षी दल बीजेपी ने छतीसगढ़ सरकार को घेरा है. पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह ने कहा है, 'गौ हत्यारी सरकार को गोबर की चिंता है लेकिन गोठानों की बदहाल व्यवस्थाओं से भूख व दम घुटने से मर रहीं गायों के प्रति संवेदनाशून्य है. युवा आत्महत्या कर रहे हैं, क्वारनटीन सेंटर में लोग मर रहे हैं, गायें मर रही हैं, हाथी मर रहे हैं और सरकार कुंभकर्णी नींद सो रही है.'

गायों की मौत का मामला ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में छतीसगढ़ सरकार ने मवेशी पालकों से 2 रुपये प्रति किलो की दर से गोबर खरीदने की अपने तरह की पहली 'गोधन न्याय योजना' की शुरुआत की है. इस योजना का मकसद मवेशियों की देखभाल के साथ ही मवेशी पालकों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना है.

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