गुजरात एटीएस की जांच में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े कथित आतंकी मॉड्यूल को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. जांच एजेंसी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों ने पिछले दो वर्षों में आठ बार आईईडी (IED) बनाने और विस्फोट करने का प्रयास किया, जिनमें दो बार विस्फोट करने में सफल भी रहे. एजेंसी का दावा है कि आरोपी भविष्य में बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने के लिए खुद को तैयार कर रहे थे. आजतक की टीम ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर पूरी पड़ताल की.
गुजरात एटीएस ने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के एक बड़े मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए देश के खिलाफ रची जा रही एक बेहद खतरनाक साजिश को नाकाम कर दिया है. एटीएस ने पहले पकड़े गए 8 आतंकियों से मिली लीड के आधार पर पाटन जिले के सिद्धपुर से 5 और आतंकियों को गिरफ्तार किया है, जिसके बाद इस मॉड्यूल में पकड़े गए कुल आतंकियों की संख्या 13 हो गई है.
अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इन आतंकियों से पूछताछ में जो कड़ियां जुड़ी हैं, वे सुरक्षा एजेंसियों के भी होश उड़ाने वाली हैं.
2 साल में 8 बार बम बनाने की कोशिश, 2 धमाकों में रहे सफल
गिरफ्तार आतंकियों से गहन पूछताछ में खुलासा हुआ है कि ये आरोपी पिछले 2 साल (2023 से फरवरी 2026 के बीच) से गुजरात को दहलाने की बड़ी साजिश पर काम कर रहे थे. उन्होंने अलग-अलग समय और जगहों पर विभिन्न 'एक्सप्लोसिव टाइमर मैकेनिज्म' का उपयोग करके कुल 8 बार बम बनाने और उनके विस्फोट का परीक्षण किया. इनमें से 6 प्रयासों में वे असफल रहे, लेकिन 2 बार वे सफल आईईडी (IED) ब्लास्ट करने में कामयाब रहे थे.
आजतक की टीम जब ग्राउंड जीरो यानी सिद्धपुर तालुका के खड़ियासन गांव पहुंची, तो वहां स्थित 'जमिया अबुल हसन मदरसा' को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के बड़े दावे सामने आए. जांच में पता चला है कि आरोपी इसी मदरसे में रहकर साल 2023 से सक्रिय रूप से बम बनाने की विधि और IED डेटोनेट करने की तकनीक सीख रहे थे.
यह मदरसा काफी घने और सुनसान इलाके में स्थित है, जिसके आसपास सूखे खेत और नदी का किनारा है. इसी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर ये आतंकी छुट्टियों के दिनों में नदी किनारे जाकर बम का परीक्षण करते थे. सूना इलाका होने के कारण धमाकों की भनक आसपास के ग्रामीणों को भी नहीं लग पाती थी.
'अकेला मुजाहिद जिहाद कैसे करे' से होता था ब्रेनवाश
पकड़े गए आतंकियों के पास से जैश-ए-मोहम्मद का झंडा, आतंकी मसूद अज़हर की जिहादी किताबों की प्रिंटेड प्रतियां और मसूद अज़हर को लिखे गए पत्र बरामद हुए हैं. आरोपी बिलाल आबिदभाई शेरा ने मुख्य आरोपी मोहम्मद अमीन शेरा को एक पेनड्राइव दी थी, जिसमें जिहादी वीडियो और भाषण थे. ये लोग 'अकेला मुजाहिद जिहाद कैसे करे' जैसी प्रतिबंधित किताबों की फोटोकॉपी करवाकर आपस में बांटते थे और लोन-वूफ अटैक (अकेले हमला करने) की ट्रेनिंग ले रहे थे.
'दावत' के नाम पर युवाओं को जोड़ने का जाल
पूछताछ में यह भी सामने आया कि इन आतंकियों ने मस्जिद और मदरसे के अन्य छात्रों को जिहाद की तरफ धकेलने के लिए 'दावत' का आयोजन किया था. जांच एजेंसियों को अब तक ऐसी 3 'दावतों' के इनपुट मिले हैं, जिनमें युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें IED असेंबल करना सिखाने की कोशिश की जा रही थी. इसके लिए गन पाउडर बनाने का कच्चा माल ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म और स्थानीय बाजारों से गुपचुप तरीके से खरीदा गया था.
गुजरात एटीएस के मुताबिक, सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अभी तक इन्हें सीमा पार बैठे जैश के आकाओं से किसी बड़े हमले या बम बनाने को लेकर कोई सीधा निर्देश नहीं मिला था. ये आतंकी इंटरनेट, पेनड्राइव और किताबों के जरिए खुद को जैश के एक बड़े और आत्मघाती हमले के लिए सेल्फ-प्रिपेयर कर रहे थे, ताकि मौका मिलते ही बड़ी तबाही मचा सकें.
फिलहाल, 15 जुलाई को पकड़े गए पांचों नए आरोपियों बिलाल आबिदभाई शेरा, मोहम्मद अयूब कडीवाल, मोहम्मद अयूबभाई सुणसरा, शफी रईस मुखी और मोहम्मदहसन हनीफभाई करडिया को 8 दिन की पुलिस रिमांड पर लेकर एटीएस और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के अन्य मददगारों की तलाश में जुटी हैं.