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सीतामढ़ी DM दफ्तर गोलीकांड: पूर्व सांसद अनवारुलहक समेत 18 दोषी करार

17 साल पहले हुए बिहार के सीतामढ़ी डीएम दफ्तर गोलीकांड पर मंगलवार को कोर्ट का फैसला आया है. इस मामले में 18 लोगों को दोषी करार दिया गया है.

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17 साल पहले हुए बिहार के सीतामढ़ी डीएम दफ्तर गोलीकांड पर मंगलवार को कोर्ट का फैसला आया है. इस मामले में 18 लोगों को दोषी करार दिया गया है. सीतामढ़ी डीएम दफ्तर गोलीकांड पर पूर्व सांसद अनवारुलहक को दोषी करार दिया गया है. फैसला आने के बाद अनवारुलहक सहित 18 लोगों को जेल भेज दिया गया.

फास्ट ट्रैक अदालत ने 1998 में सीतामढ़ी कलेक्टरेट पर हुए हमले और उसके बाद पुलिस गोलीबारी से संबंधित एक मामले में एक बीजेपी विधायक और लोकसभा के दो पूर्व सांसदों सहित 15 लोगों को दोषी ठहराया. पुलिस गोलीबारी में पांच लोग मारे गए थे.

दोषी ठहराए गए लोगों में बीजेपी विधायक राम नरेश यादव, सीतामढ़ी से पूर्व जद यू सांसद नवल किशोर राय, शिवहर के पूर्व सांसद एवं राजद नेता अनवारुल हक, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) के जिला अध्यक्ष राम लशन सिंह कुशवाहा और महासचिव मोहन कुमार शामिल हैं. उन सभी को जेल भेज दिया गया है.

फैसला सुनाते हुए फास्ट ट्रैक अदालत के न्यायाधीश मोहम्मद इरशाद आलम ने उन्हें आईपीसी की धाराओं- 307 (हत्या की कोशिश), 322 (जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना), 324 (घातक हथियारों से जानबूझकर चोट पहुंचाने), 353 (सरकारी सेवक को ड्यूटी से रोकने के लिए हमला करना या आपराधिक बल प्रयोग), 147 (दंगे के लिए दंड), 148 (दंगा करने, घातक हथियारों से लैस होने) के तहत दोषी ठहराया. सजा 4 जून को सुनाई जाएगी.

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मामला 11 अगस्त 1998 को हुई घटना से संबंधित है, जब दोषी राजनीतिक नेताओं ने जिले में भीषण बाढ़ के बाद सीतामढ़ी कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करने के लिए एक बड़ी भीड़ का नेतृत्व किया. प्रदर्शन हिंसक हो गया और इसमें शामिल लोगों ने परिसरों में तोड़फोड़ की, वहां काम कर रहे सरकारी अधिकारियों पर पथराव तथा हमला किया. स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और गोली चलाई.

पुलिस की कार्रवाई में पांच लोग मारे गए थे. सीतामढ़ी के तत्कालीन मजिस्ट्रेट रामनंदन प्रसाद और पुलिस अधीक्षक परेश सक्सेना ने डुमरा थाने में 60 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी. हालांकि अदालत ने उनमें से 45 लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया.

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