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बिहार सरकार से बाहर होने के बाद ये 5 कदम उठा सकते हैं लालू यादव

अब वह नीतीश पर धोखा देने और जनादेश का अपमान करने का आरोप लगा रहे हैं. अब आक्रामक राजनीति के जरिए लालू बिहार में लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक जमीन तैयार करेंगे.

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लालू प्रसाद यादव
लालू प्रसाद यादव

लालू प्रसाद यादव पहले से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं. इसके लिए उन्होंने 27 अगस्त को पहले से ही एक बड़ी रैली का ऐलान किया हुआ है, लेकिन ताजा घटनाक्रम के बाद लालू यादव के समीकरण बदल गए हैं. अब वह नीतीश पर धोखा देने और जनादेश का अपमान करने का आरोप लगा रहे हैं. अब आक्रामक राजनीति के जरिए लालू बिहार में लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक जमीन तैयार करेंगे.

बहुमत साबित करने से रोकेंगे

बृहस्पतिवार सुबह ने भले ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण कर ली हो, लेकिन उन्हें शुक्रवार तक बहुमत साबित करना होगा. 243 विधानसभा की सीट में उन्हें बहुमत के लिए 122 विधायकों की जरूरत पड़ेगी. के पास 71 और बीजेपी के पास 58 विधायक हैं यानी कुल जेडीयू और बीजेपी के विधायकों की संख्या 129 हैं. ऐसे में लालू जेडीयू के कुछ विधायकों को तोड़कर नीतीश को बहुमत साबित करने से रोक सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक जदयू के यादव और मुस्लिम विधायकों से बात भी हो रही है. आरजेडी के पास 81 विधायक हैं और कांग्रेस के 27 विधायक मिलकर उनकी संख्या 107 हो जाती है. ऐसे में लालू नीतीश को बहुमत साबित करने से रोकने की पूरी कोशिश करेंगे.

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सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे

और तेजस्वी यादव का आरोप है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने के लिए नहीं बुलाया. उन्होंने राज्यपाल पर पक्षपात करने का भी आरोप लगाया. लालू ने रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए संकेत दिए कि इस मसले पर वह सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और न्याय के लिए हर स्तर पर प्रयास करेंगे.

 

मोदी के खिलाफ दूसरे दलों को एकजुट करने की मुहिम

लालू प्रसाद यादव पहले से ही नरेंद्र मोदी और बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं. अब नीतीश भी एनडीए में शामिल हो गए हैं. ऐसे में लालू यूपी में सपा और बसपा के साथ-साथ टीएमसी और दूसरे दलों को साथ लाने की कोशिश तेज करेंगे. वह मायावती और अखिलेश को साथ लाने की बात कई बार कर चुके हैं. वह कुछ और दलों को जोड़कर नरेंद्र मोदी के खिलाफ मुहिम चला सकते हैं.

 

बिहार की अस्मिता और एम व वाई कार्ड

राष्ट्रपति चुनाव में मीरा कुमार को नीतीश कुमार ने समर्थन नहीं दिया था. उस समय लालू ने इसे बिहार की अस्मिता से जोड़ा था. अब गठबंधन टूटने के बाद लालू इसे और हवा दे सकते हैं. साथ ही मुस्लिम और यादव कार्ड पर एक बार फिर नए सिरे से प्रयास कर सकते हैं.

 

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