
इजरायल चुनाव में किसी को बहुमत नहीं मिला है. सरकार बनाने को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. 120 सीटों वाली इजरायली संसद यानी नेसेट में सरकार बनाने के जरूरी आंकड़े से दूर रहने के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने यशार पार्टी के लीडर गादी आइजनकोट के साथ गठबंधन का विकल्प खुला रखा है.
पब्लिकली यूनिटी सरकार के विचार को खारिज करने के बावजूद, लिकुड से जुड़े सूत्रों का कहना है कि नेतन्याहू आइजनकोट के साथ हर मुमकिन ऑप्शन पर विचार कर रहे हैं. सूत्रों ने बताया, नेतन्याहू को डर है कि आइजनकोट उन्हें सत्ता से हटाने के लिए अरब पार्टियों और अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पार्टियों के साथ हाथ मिला सकते हैं.
बता दें, 120 सदस्यों वाली इजरायली संसद यानी नेसेट में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है. इसमें नेतन्याहू का गठबंधन 53 सीटों पर सिमट गया, जबकि गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे को 48 सीटें मिलीं. 27 अक्टूबर 2026 को इजरायल के संसदीय चुनाव में अरब नेतृत्व वाली दो पार्टियों ने मिलकर 19 सीटें जीतीं.

इस बीच, नेतन्याहू की पार्टी लिकुड अभी भी सबसे बड़ी पार्टी है. उसे 27 सीटें मिली हैं. वहीं, ये 2022 की 32 सीटों से पांच कम है. सबसे अधिक फायदा अरब पार्टियों को हुआ है.
जॉइंट लिस्ट को 11 और रआम को आठ सीटें मिली हैं. ये एक ऐतिहासिक आंकड़ा है.इनके पास 2022 में केवल 10 सीटें थीं.
बता दें, यहूदी-अरब गठबंधन. आइजनकोट का गुट और दोनों अरब पार्टियां मिलकर 67 सीटें बनाती हैं. वहीं, नेतन्याहू अरब पार्टियों के साथ काम करने से इनकार कर चुके हैं.
आइजनकोट ने इनकार नहीं किया है, पर उनकी पार्टी ने शर्तें रखी हैं. एक शर्त यह है कि अरब पार्टियां हमास को आतंकी संगठन कहें और उसके हथियार छीनने का समर्थन करें. अरब सांसद उनकी सरकार को बाहर से समर्थन भी दे सकते हैं. इसके लिए कम से कम छह अरब सांसदों को सरकार के पक्ष में वोट देना होगा.