क्या आपको सोते समय रोज तेज खर्राटे आते हैं? क्या नींद के दौरान अचानक उठ भी जाते हैं और सुबह उठने पर थकान महसूस होती है, तो यह केवल खर्राटों की समस्या नहीं, बल्कि स्लीप एपनिया की बीमारी हो सकती है.इसमें सोते समय बार-बार कुछ सेकेंड के लिए सांस रुक जाती है और फिर शुरू हो जाती है. इसका सबसे सामान्य प्रकार ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया है. डॉक्टर बताते हैं कि स्लीप एपनिया की बीमारी वाले मरीज सोते समय जोर- जोर से खर्राटे लेते हैं. यह समस्या अगर लगातार बनी हुई है तो यह सामान्य नहीं है. इससे भविष्य में दिल की बीमारियों से लेकर हार्ट अटैक का भी खतरा हो सकता है.
स्लीप एपनिया से हार्ट पर क्या असर होता है?
इस बारे में मेदांता मेडिसिटी मूलचंद अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग में प्रोफेसर डॉ. तरुण कुमार ने आजतक. इन को बताया है. डॉ तरुण कहते हैं कि जिन लोगों को ज्यादा खर्राटे आने की समस्या होती है उनको नींद में कई बार कुछ सेकेंड के लिए सांस रुकने की भी परेशानी होती है. कुछ को इसका पता चल जाता है और नींद खुल जाती है, जबकि कुछ लोगों को पता नहीं चल पाता है. लेकिन सोते समय बार-बार कुछ सेकेंड के लिए सांस रुकने से शरीर में ऑक्सीजन का लेवल घटता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है. इससे हार्ट पर ज्यादा प्रेशर पड़ता है. शरीर में स्ट्रेस वाले हार्मोन बढ़ जाते हैं. शरीर में सूजन आ जाती है और हार्ट की नसों को नुकसान होता है. इससे दिल की कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
हार्ट की किन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है
डॉ तरुण बताते हैं कि लंबे समय से खर्राटे आने से स्लीप एपनिया की बीमारी हो जाती है. इस बीमारी के कारण हार्ट पर प्रेशर पड़ता है, जिससे हाई बीपी, हार्ट अटैक और हार्ट बीट का अचानक कम या ज्यादा होना जैसी समस्या होने लगती है. कुछ मामलों में इससे लोगों को हार्ट अटैक आने का भी रिस्क होता है. कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है.
PUBmed में छपी एक रिसर्च बताती हैं कि स्लीप एपनिया का अगर इलाज न हो तो यह कोरोनरी हार्ट डिजीज, हार्ट फेल और यहां तक की स्ट्रोक का कारण भी बन सकती है, जिन लोगों को सोते समय ज्यादा खर्राटे आते हैं और कई सालों से यह समस्या बनी हुई है तो उनको खास ध्यान रखने की जरूरत होती है.
किन लोगों को अधिक खतरा है?
मोटापा या बढ़ा हुआ वजन
तेज खर्राटे
सोते समय सांस रुकना
दिनभर ज्यादा नींद आना
जिन लोगों की डायबिटीज कंट्रोल नहीं रहती है
स्लीप एपनिया की बीमारी की जांच कैसे होती है?
इसके लिए स्लीप स्टडी टेस्ट किया जाता है. कुछ मामलों में होम स्लीप एपनिया टेस्ट भी किया जा सकता है. हालांकि कोशिश करें कि इसको कुछ तरीकों से कट्रोल में करे
स्लीप एपनिया की बीमारी को किस तरह कंट्रोल में करें
मोटापा कम करें
रोज एक्सरसाइज करें
धूम्रपान न करें
शराब के सेवन से बचें
करवट लेकर सोने की आदत डालें
कब डॉक्टर से मिलें?
अगर आपको तेज़ खर्राटे आते हैं, नींद में सांस रुकती है, सुबह सिरदर्द रहता है, दिनभर नींद आती है या आपको हाई बीपी या दिल की कोई बीमारी है तो स्लीप एपनिया की जांच जरूर कराएं. डॉ तरुण कहते हैं कि स्लीप एपनिया की समय पर पहचान और उपचार न केवल आपकी नींद सुधारता है, बल्कि हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हार्ट फेल्योर जैसी बीमारियों के खतरे को कम भी करता है.