एक नई स्टडी से पता चला है कि पाकिस्तान में मरीजों को एक ही प्रिस्क्रिप्शन में डॉक्टर तय मानकों से दोगुनी से ज्यादा दवाइयां लिख रहे हैं. वहीं, हर चार में से सिर्फ एक दवा ही उसके जेनेरिक नाम से लिखी गई है. ये विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO) के नियम से कई गुना ज्यादा है. WHO के मुताबिक,एक प्रिस्क्रिप्शन में मरीज को औसतन 1.6 से 1.8 दवाएं ही लिखी जानी चाहिए. जबकि पाकिस्तान के पेशावर के एक बड़े अस्पताल में, औसतन 10.56 दवाएं लिखी गईं ,यह स्टडी इस्लामाबाद की हेल्थ सर्विसेज़ एकेडमी (HSA) के रिसर्चर्स ने की थी और इसे 'डिस्कवर पब्लिक हेल्थ' जर्नल में पब्लिश किया गया था. ये तो पाकिस्तान की स्थिति है. लेकिन यहां ये जानना भी जरूरी है कि भारत में कितनी दवाएं लिखी जाती हैं?
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ कि रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में मेडिकल प्रिस्क्राइबिंग पैटर्न पर हुई अलग-अलग स्टडीज बताती हैं कि यहां डॉक्टर हर आउटपेशेंट प्रिस्क्रिप्शन पर औसतन 2.2 से 3.9 दवाएं लिखते हैं. ये भी WHO के पैरामीटर से अधिक है.
WHO के पैरामीटर क्या हैं
एक प्रिस्क्रिप्शन में औसतन 1.6 से 1.8 दवाएं
दवाएं ज्यादा से ज्यादा जेनेरिक नाम से लिखी जाएं
एंटीबायोटिक का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार हो
इंजेक्शन सिर्फ जरूरत पड़ने पर दिया जाए
डॉक्टर ज्यादा दवाएं क्यों लिखते हैं?
इस बारे में राजीव गांधी अस्पताल में प्रोफेसर डॉ. अजीत जैन ने बताया है. डॉ. जैन कहते हैं कि कई बार मरीज एक साथ कई लक्षण लेकर आता है. जैसे बुखार के साथ शरीर दर्द, उल्टी, एसिडिटी और कमजोरी हो तो डॉक्टर अलग-अलग समस्याओं के लिए दवा लिख सकते हैं. कुछ मामलों में मरीज खुद कहता है कि उसे जल्द से जल्द आराम चाहिए. कई डॉक्टर बीमारी के साथ संभावित साइड इफेक्ट को रोकने के लिए भी ऐसा करते हैं. हालांकि हर डॉक्टर तय पैरामीटर से अधिक दवाएं नहीं देते हैं. कई मामलों में मरीज की स्थिति के हिसाब से और बीमारी को समय से काबू में करने के लिए 2 से अधिक मेडिसिन दी जाती हैं.
कब ज्यादा दवा लिख सकते हैं डॉक्टर?
WHO के मुताबिक, डॉक्टर 2 से ज्यादा दवाएं लिख सकते हैं, लेकिन डॉक्टर 2 से अधिक या इससे भी ज्यादा दवाएं लिख सकते हैं, जब मरीज की मेडिकल स्थिति इसकी मांग करती है. आमतौर पर जब मरीज को एक साथ कई गंभीर बीमारियां जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज हो. इसके अलावा कुछ बीमारियों जैसे टीबी, कैंसर या एचआईवी) में खतरनाक बैक्टीरिया को खत्म करने और दवा केके लिए एक से अधिक दवाओं का एक साथ देना जरूरी होता है.
ज्यादा दवाएं लेने से क्या नुकसान हो सकता है?
डॉ जैन कहते हैं कि कुछ मरीज खुद से अधिक दवाएं लेने लगते हैं. मान लीजिए कि पेट दर्द की दवा ले रहे हैं तो साथ में खुद ही एसिडिटी या फिर किसी विटामिन की दवा खाने लगते हैं. इससे दवाओं के साइड इफेक्ट और एक दवा का दूसरी दवा से रिएक्शन होने का खतरा बढ़ सकता है. खासकर बुजुर्गों और पहले से कई बीमारियों वाले लोगों में यह ज्यादा चिंता की बात हो सकती है. ज्यादा दवाएं लिवर और किडनी पर भी असर करती हैं. खासतौर पर पेन किलर और एंटीबायोटिक का जरूरत से ज्यादा यूज एक बड़ा खतरा बन रहा है.
मरीज को क्या करना चाहिए?
अगर डॉक्टर ने कई दवाएं लिखी हैं तो खुद से कोई दवा बंद करना सही नहीं है, लेकिन मरीज डॉक्टर से जरूर पूछ सकता है कि यह दवा किसलिए है, कितने दिन लेनी है और क्या सभी दवाएं जरूरी हैं? ये भी ध्यान रखें कि कोई भी एंटीबायोटिक या पेन किलर डॉक्टर की सलाह के बिना कभी न लें.