WHO का डाटा बताता हैं कि दुनियाभर में सबसे ज्यादा मौतें हार्ट की बीमारियों से होती हैं. हार्ट की बीमारियों का एक बड़ा कारण बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल होता है. जब कोई व्यक्ति अपने कोलेस्ट्रॉल की जांच कराता है तो उसे सबसे बड़ा कंफ्यूजन यही होता है कि क्या दवाओं की जरूरत है या फिर एक्सरसाइज या डाइट से ही कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल हो जाएगा. कुछ मामलों में लोग जल्द ही दवा शुरू कर देते हैं, लेकिन यह पता होना चाहिए की इसकी जरूरत है भी या नहीं.
फॉर्च्यून इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर 4 में से 1 व्यक्ति का कोलेस्ट्रॉल लेवल नॉर्मल नहीं है. बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल हार्ट अटैक का कारण बन सकता है. देश में बीते कुछ सालों में हार्ट अटैक के मामले बढ़े भी हैं. ऐसे में कोलेस्ट्रॉल की समय पर जांच जरूरी है. कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया की गाइडलाइन के मुताबिक, 17 साल की उम्र में ब्लड टेस्ट करा लेने चाहिए जिसमें कोलेस्ट्रॉल की जांच भी शामिल है. जब इसकी जांच कराएं तो यह पता होना चाहिए की कितना लेवल नॉर्मल है और कितना नहीं. इस बारे में जानने के लिए आजतक. इन ने एक्सपर्ट्स से बातचीत की है.
कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर कब डाइट और एक्सरसाइज काफी है?
दिल्ली के मेदांता मेडिसिटी हॉस्पिटल में कार्डियोलॉजी विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. तरुण कुमार ने इस बारे में बताया है. वह कहते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को हार्ट की कोई बीमारी नहीं है. डायबिटीज नहीं है. बैड कोलेस्ट्रॉल ( LDL) 100–159 mg/dL के बीच है. वह हमेशा अच्छा लाइफस्टाइल अपनाता है और खानपान भी अच्छा रखता है तो ऐसे मामलों में 8 से 12 सप्ताह तक अच्छे खानपान, रोज एक्सरसाइज, पूरी नींद लेने और तंबाकू का सेवन न करने से बिना दवाओं के भी कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखा जा सकता है, लेकिन यह तभी मुमकिन है जब व्यक्ति नियम से इन सब चीजों को फॉलो करे.
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कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर दवा कब जरूरी हो सकती है?
डॉ तरुण बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति का बैड कोलेस्ट्रॉल 190 mg/dL से ज्यादा है तो ऐसे हर व्यस्क के मामले में उसकोस्टैटिन दवा शुरू करने की सलाह दी जाती है. अगर किसी को डायबिटीज है उसकी उम्र 40 से 75 के बीच है और बैड कोलेस्ट्रॉल 70 mg/dL है, तो अधिकांश मरीजों में स्टैटिन की आवश्यकता होती है. यह भी देखा जाता है कि व्यक्ति को पहले से हार्ट अटैक, एंजियोप्लास्टी, बाईपास, स्ट्रोक की समस्या तो नहीं है. ऐसे मरीजों में बैड कोलेस्ट्रॉल के 55–70 mg/dL होने पर भी दवा की जरूरत पड़ सकती है. दिल की बीमारियों के हाई रिस्क वाले मरीजों में हमेशा LDL को 55 mg/dL से नीचे रखना होता है.
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अपनी कोलेस्ट्रॉल की रिपोर्ट में क्या देखें
रिपोर्ट में आपका Total Cholesterol अगर 200 mg/dLसे कम है तो यह नॉर्मल है. 200–239 mg/dL है तो यह सीमा रेखा पर बढ़ा हुआ है. 240 mg/dL से ज्यादा है तो यह ज्यादा माना जाता है. बैड कोलेस्ट्रॉल LDL अगर 100 mg/dL से कम है तो बहुत अच्छा है. 100–129 mg/dL है तो भी ठीक है. 130–159 mg/dL है तो सीमा रेखा पर बढ़ा हुआ है. 160–189 mg/dL है तो यह अधिक माना जाता है. 190 mg/dL से अधिक है तो बहुत ज्यादा माना जाता है. ऐसे मामलों में तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. डॉ तरुण कहते हैं कि केवल Total Cholesterol देखकर दवा शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए. बैड कोलेस्ट्रॉल को भी देखना चाहिए. अगर ये भी बढ़ा हुआ है तो इस मामले में हमेशा डॉक्टरों की सलाह लेना चाहिए.