किडनी की बीमारियों से बचना है तो मुंह की सेहत यानी ओरल हेल्थ पर ध्यान देना भी जरूरी है. ये सुनने में आपको भले ही अजीब लग रहा होगा, लेकिन मेडिकल साइंस कहती है कि मुंह की सेहत खासतौर पर मसूड़ों की सेहत का कनेक्शन किडनी की हेल्थ से भी है. नेशनल किडनी फाउंडेशन के मुताबिक, अगर किसी को मसूड़ों की बीमारी है तो किडनी की अलग- अलग बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. फाउंडेशन की ओर से हुई कई रिसर्च में ये बात साबित हुई है.
नेशनल किडनी फाउंडेशन के मुताबिक, शरीर के इम्यून सिस्टम और सर्कुलेटरी सिस्टम के जरिए ये जुड़े होते हैं. रिसर्च में मसूड़ों की बीमारी (पेरियोडोंटाइटिस) और किडनी की बीमारी के बीच एक संबंध पाया गया है. मसूड़ों की बीमारी पैदा करने वाले बैक्टीरिया से लड़ने के लिए शरीर में सूजन (इन्फ्लेमेशन) होती है. यह एक अच्छी बात है, लेकिन, अगर यह सूजन बनी रहे, तो इसका असर किडनी पर पड़ सकता है. दांतों के इन्फेक्शन की वजह से ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है, और सर्जरी या ट्रांसप्लांट के दौरान का खतरा भी बढ़ सकता है. खास तौर पर उन लोगों के मामले में होता है जिन्हें पहले से ही किडनी की बीमारी है, जो डायलिसिस पर हैं, या जो ट्रांसप्लांट के बाद इम्यून सिस्टम को कमज़ोर करने वाली दवाएं ले रहे हैं.
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि मसूड़ों की बीमारी सीधे तौर पर किडनी की बीमारी का कारण बनती है, या सिर्फ ब्रश और फ़्लॉस करने से इसे रोका जा सकता है. लेकिन, अपने मुंह की देखभाल करना पूरे शरीर की देखभाल करने का एक अहम हिस्सा है.
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मुंह की सेहत का ध्यान कैसे रखें
डॉ घोटेकर बताते हैं कि दातों की अच्छी सेहत के लिए ओरल हेल्थ का ध्यान रखना जरूरी है. इसके लिए रोजाना कम से कम दो बार ब्रश जरूर करें. रात को मीठा खाने से बचें. अगर दातों में दर्द या मुंह में छाले की समस्या है तो डॉक्टर से सलाह लें. पान मसाला, गुटखा और शराब का सेवन करने से बचें.
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अच्छी नींद भी है जरूरी
आपकी किडनी भी आपके शरीर की स्लीप साईकल को फॉलो करती है. इसलिए, पूरी नींद लेने से किडनी की सेहत बेहतर हो सकती है.हर रात 7 से 8 घंटे की नींद लेने की सलाह देता है. नींद ब्लड प्रेशर और ब्लड ग्लूकोज (शुगर) को कंट्रोल करने में मदद करती है, जो किडनी की सेहत के लिए दो बहुत महत्वपूर्ण कारक हैं.अध्ययनों से यह भी पता चला है कि बहुत कम या बहुत ज़्यादा नींद लेने से किडनी की बीमारी या यूरिन में प्रोटीन आने का खतरा बढ़ सकता है. हालांकि, ये अध्ययन केवल एक संबंध दिखाते हैं. ये साबित नहीं करते कि केवल नींद कम होने से ही क्रोनिक किडनी डिज़ीज होती हैं.