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सर्वाइकल कैंसर से 95% तक बचाव संभव, बस इस उम्र में लगवा लें यह वैक्सीन; AIIMS एक्सपर्ट ने बताया कब कराएं जांच

महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए एचपीवी वैक्सीन और नियमित स्क्रीनिंग बेहद जरूरी है, AIIMS की डॉ. नीलांचली सिंह के अनुसार, 30 वर्ष के बाद स्क्रीनिंग से कैंसर की शुरुआती पहचान संभव है, जिससे इलाज सफल हो सकता है.

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सर्वाइकल कैंसर से कितना खतरा
सर्वाइकल कैंसर से कितना खतरा

भारत में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के बाद सबसे ज्यादा केस सर्वाइकल कैंसर के आ रहे हैं. लेकिन इसको आसानी से रोका भी जा सकता है. AIIMS, नई दिल्ली के ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.नीलांचली सिंह बताती हैं कि अगर सही उम्र में वैक्सीन लग जाए तो सर्वाइकल कैंसर का खतरा 95% तक कम किया जा सकता है, लेकिन केवल वैक्सीन ही नहीं, 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित स्क्रीनिंग भी उतनी ही जरूरी है.

सर्वाइकल कैंसर एक ऐसा कैंसर है जो केवल महिलाओं में होता है. यह कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से यानी सर्विक्स में विकसित होता है. इसके अधिकांश मामलों का कारण ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) का लगातार बना रहने वाला संक्रमण होता है. यह वायरस यौन संबंध के जरिए पुरुषों से महिलाओं में जाता है.अधिकतर मामलों में महिलाओं के शरीर की इम्यूनिटी इस वायरस को कुछ महीनों या सालों में खुद खत्म कर देती है, लेकिन कुछ महिलाओं में संक्रमण लंबे समय तक बना रहता है. यह संक्रमण धीरे-धीरे सर्वाइकल कैंसर बन सकता है. यह कैंसर अगर शुरुआती स्टेज में पकड़ में आ जाए तो ठीक, लेकिन अगर एडवांस स्टेज में सामने आता है तो मौत का कारण बन सकता है. 

डॉ. नीलांचली बताती हैं कि पहले की तुलना में सर्वाइकल कैंसर के मामले अधिक दिखाई दे रहे हैं. अब डायग्नोसिस बेहतर हो गया है.  दूसरा कारण यह है कि अब महिलाओं में HPV संक्रमण ज्यादा हो रहा है. हालांकि हर महिला में HPV संक्रमण सर्वाइकल कैंसर नहीं बनता है. अधिकतर महिलाओं में शरीर का इम्यून सिस्टम इसको खत्म कर देता है. लेकिन जिन महिलाओं की इम्यूनिटी कमजोर होती है या जो लंबे समय तक हाई-रिस्क HPV संक्रमण से प्रभावित रहती हैं, उनमें कैंसर बनने का खतरा बढ़ जाता है.

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सर्वाइकल कैंसर से बचने के लिए कौन सी वैक्सीन लगवाएं, क्या है सही उम्र

डॉ. सिंह बताती हैं कि सर्वाइकल कैंसर HPV वायरस से होता है. इस वायरस के असर को HPV वैक्सीन लगवाने से खत्म किया जा सकता है. वायरस खत्म तो कैंसर का खतरा भी कम होता है.  वैसे तो 45 साल से कम उम्र की सभी महिलाओं को इसको लगवाना चाहिए. लेकिन 9 से 14 वर्ष के बीच की उम्र सबसे बेस्ट है. हालांकि 16 से 26 साल में भी वैक्सीन लगवाई जा सकती है और अच्छा लाभ मिलता है.

26 से 45 वर्ष की महिलाएं डॉक्टर की सलाह पर वैक्सीन लग सकती है. इस उम्र में भी सुरक्षा मिलती है, हालांकि प्रभाव कम हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि इस उम्र में लगवाने का कोई फायदा नहीं है. डॉक्टर की सलाह के अनुसार इस उम्र तक भी टीका लगवाया जा सकता है.

डॉ. नीलांचली कहती हैं कि सर्वाइकल कैंसर उन चुनिंदा कैंसरों में है जिन्हें काफी हद तक रोका जा सकता है. अगर महिलाएं इसकी वैक्सीन लगवाए और 30 वर्ष के बाद नियमित स्क्रीनिंग कराई जाए, तो अधिकतर मामलों को कैंसर बनने से पहले ही रोका जा सकता है. कई देशों में एचपीवी वैक्सीन लगने से सर्वाइकल कैंसर के मामलों को काफी हद तक कम भी किया जा चुका है. 

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वैक्सीन जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरी है स्क्रीनिंग भी

डॉ. नीलांचली सिंह सलाह देती हैं कि 30 वर्ष की उम्र के बाद सभी महिलाओं को नियमित रूप से सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग करानी चाहिए. इसके लिए दो प्रकार के टेस्ट होते हैं. पहला है Pap Smear Test और दूसरा है HPV टेस्ट. इनसे समय रहते कैंसर की पहचान हो सकती है. सही समय पर पहचान से कैंसर को शुरुआती स्टेज में पकड़कर उसका इलाज किया जा सकता है. 

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इन लक्षणों पर जरूर नजर रखें 

पीरियड्स के बीच असामान्य ब्लीडिंग

पेल्विक दर्द हमेशा दर्द बने रहना

कमर या पैरों में लगातार दर्द

प्राइवेट पार्ट से डिस्चार्ज होना

इन लक्षणों का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता, लेकिन जांच जरूर करानी चाहिए।
 

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