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फैक्ट चेक: श्रद्धालुओं पर मांस फेंकने पर पुजारियों ने मुस्लिमों को जमकर पीटा? नहीं, ये है हकीकत

कोल्हापुर के मंदिर में मारपीट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक दावे के साथ वायरल हो रहा है. दावा किया जा रहा है कि मुस्लिमों ने मंदिर के बाहर मांस फेंका, जिसके बाद पुजारियों ने उनकी पिटाई कर दी. लेकिन जांच में यह दावा झूठा निकला.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
ये महाराष्ट्र के कोल्हापुर का वीडियो है जहां कुछ मुस्लिमों ने महालक्ष्मी मंदिर में मांस फेंका. इसके बाद वहां बवाल मच गया और पुजारियों ने उन्हें जमकर पीटा.
सोशल मीडिया यूजर्स
सच्चाई
ये वीडियो मार्च का है और कोल्हापुर का ही है. लेकिन इसमें कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है. झगड़ा मंदिर के पुजारियों और हिंदू श्रद्धालुओं के बीच हुआ था

किसी मंदिर के बाहर हुई हाथापाई का बताकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है. इसमें कुछ लोग आपस में जमकर मारपीट करते हुए देखे जा सकते हैं. देखने में ये लोग किसी मंदिर के पुजारी लग रहे हैं.

इस घटना को महाराष्ट्र के कोल्हापुर का बताकर कुछ लोग लिख रहे हैं कि यहां महालक्ष्मी मंदिर में कुछ मुस्लिमों ने हिंदू श्रद्धालुओं पर मांस फेंके और धार्मिक नारे लगाए, जिससे माहौल बिगड़ गया. और इसके बाद मंदिर के पुजारियों ने उन लोगों की जमकर पिटाई कर दी.

वीडियो को एक्स पर  शेयर करते हुए एक व्यक्ति ने लिखा, “कोल्हापुर महालक्ष्मी मंदिर में मुस्लिमों ने श्रद्धालुओं पर मांस फेंककर “अल्लाहु अकबर” के नारे लगाए. लगभग 20 पुजारियों ने मुस्लिमों पर नारियल फेंकते हुए जोरदार कुटाई करके मुंहतोड़ जवाब दिया.” इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.

इसी तरह के सांप्रदायिक दावों के साथ फेसबुक पर भी ये वीडियो शेयर किया जा रहा है.

maharashtra

आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये मामला कोल्हापुर, महाराष्ट्र के ज्योतिबा मंदिर का है और इसमें कोई भी सांप्रदायिक एंगल नहीं है. झगड़ा, मंदिर के पुजारियों और कुछ हिंदू श्रद्धालुओं के बीच हुआ था.

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कैसे पता की सच्चाई?

वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने पर हमें ये मार्च की कई न्यूज रिपोर्ट्स में मिला. इन रिपोर्ट्स के मुताबिक ये मामला कोल्हापुर के ज्योतिबा मंदिर का है. किसी भी रिपोर्ट में मुस्लिम एंगल वाली बात नहीं बताई गई है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की 24 मार्च की रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना कोल्हापुर के पन्हाला तहसील में स्थित ज्योतिबा मंदिर में 22 मार्च को हुई थी. और इस मामले में पुलिस ने 17 पुजारियों और 17 श्रद्धालुओं के खिलाफ केस दर्ज किया.

कोडोली पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि मंदिर आए कुछ श्रद्धालुओं ने एक टूटे हुए नारियल में गुलाल मिलाकर उसे एक पुजारी पर फेंक दिया था. इस बात पर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई जो बाद में मारपीट में बदल गई. हालांकि इस मामले में पुजारी और श्रद्धालु, दोनों के अपने-अपने दावे हैं.

ज्यादा जानकारी के लिए हमने कोडोली पुलिस स्टेशन के असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर चेतन मसुतागे से बात की. उन्होंने साफ कहा कि इस घटना में कोई भी मुस्लिम शामिल नहीं था और ये, सिर्फ मंदिर में दर्शन करने आए भक्तों और पुजारियों के बीच हुआ एक झगड़ा था.

हमने ज्योतिबा मंदिर के पुजारी नितिन लाडे से भी बात की. उन्होंने भी साफ कहा कि इसमें कोई हिंदू-मुस्लिम एंगल नहीं है. मंदिर में मांस लाने और इस्लामिक नारे लगाने की बात पूरी तरह से झूठ है. पुजारी नितिन ने आरोप लगाया कि कुछ लोग शराब पीकर मंदिर में घुस आए थे और पुजारियों के साथ गाली-गलौज करने लगे, जिससे ये झगड़ा शुरू हुआ.

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नितिन के मुताबिक, शराब पिए हुए एक शख्स ने एक पुजारी पर हाथ उठा दिया, जिसके बाद बाकी पुजारी भी मदद के लिए आ गए और दोनों पक्षों में हाथापाई हो गई. बाद में मंदिर प्रशासन ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया. लेकिन कुछ देर बाद, उस ग्रुप ने कथित तौर पर पुजारियों पर फिर से गुलाल फेंका, जिससे दोबारा झड़प हो गई. इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की.

साफ है, कि इस वीडियो के साथ किए जा रहे सांप्रदायिक दावे पूरी तरह से गलत हैं.

(रिपोर्ट: रश्मि गुप्ता)
 

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