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किशोर कुमार ने जब इनकम टैक्स की टीम पर छोड़ दिए थे कुत्ते...

दीवाना, हंसमुख, जिंदादिल और एक बेहतरीन गायक जी हां... हम जब भी लिजेंड किशोर कुमार को याद करते हैं और उनके बारे में सोचते हैं. तब मन में उनके लिए जिंदादिली से भरे ख्याल आते हैं.

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किशोर कुमार
किशोर कुमार

दीवाना, हंसमुख, जिंदादिल और एक बेहतरीन गायक जी हां... हम जब भी लिजेंड किशोर कुमार को याद करते हैं और उनके बारे में सोचते हैं. तब मन में उनके लिए जिंदादिली से भरे ख्याल आते हैं. किशोर बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे. एक्टर, म्यूजिक कंपोजर, गीतकार, स्क्रीनराइटर, फिल्म प्रोड्यूसर , डायरेक्टर के तौर उर उन्होंने खूब नाम कामाया. पर उनका मूल योगदान गायन और अभिनय के क्षेत्र में ही है. देश आज उनका 88वां जयंती मना रहा है.

किशोर कुमार का जन्म चार अगस्त, 1929 को मध्य प्रदेश के खंडवा में हुआ था. उन्होंने इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज से ग्रेजुएशन की. उनके पिता कुंजलाल गांगुली मशहूर वकील थे और मां गौरी देवी धनाढ्य परिवार से ताल्लुक रखती थीं. किशोर चार भाइयों बहनों में सबसे छोटे थे. सबसे बड़े अशोक, उसके बाद सती देवी और फिर अनूप. उन्होंने करियर की शुरुआत बॉम्बे टॉकीज के लिए कोरस में उन्होंने गाना शुरू की. उन्होंने नाम भी बदल लिया. यहां अशोक कुमार काम करते थे. 1948 में फिल्म आई फिल्म जिद्दी में उन्होंने खेमचंद प्रकाश के संगीत निर्देशन में 'मरने की दुआएं क्यों मांगू' गीत से अपने गायन की शुरुआत की थी. मुकेश और मोहम्मद रफी के जामने वे देव आनंद की मुख्य आवाज बनकर सामने आए.

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किशोर कुमार ने एक अलग तरह के गायन की शुरुआत की. उन्होंने गायन की कभी विधि‍वत शिक्षा नहीं ली. फिर भी वे एक गायक बतौर अत्याधिक सफल रहे. उनके गीतों में इमोशन, रोमांस, माधुर्य, उल्लास, विरह की पीड़ा बड़ी शिद्दत से मिलती है. उनके गीत जब भी सुने दिल की गहराइयों में उतर जाते हैं. उनके गीतों में जो उल्लास मिलता है. वह उन्हें दूसरे गायकों से अलग करता है. उनके दर्द भरे गीत आज भी लोगों की जुबान पर हैं. दुखी मन मेरे गीत को उनका सबसे दर्दभर गीत माना जाता है. एक कॉमिक एक्टर के तौर पर उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई कई अभिनेत्रियों के साथ उनकी जोड़ी जमी, मधुबाला, नूतन, मीरा कुमारी और कुमकुम शामिल हैं.

फिल्मी में दुनिया में उनके ज्यादा दोस्त नहीं थे. वो खाली समय में अपने घर ही रहना पसंद करते थे. लेकिन वो साथ कई विवादों में भी रहे. ऐसा कहा जाता है. एक बार इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के कुछ लोग उनके घर आए, उन पर उन्होंने अपने कुत्ते छोड़ दिए. उन्होनें अपने घर के बाहर लिखवा रखा था कि किशोर कुमार से बचकर. इतना ही नहीं उन्होंने 1975 और 1976 इमरजेंली के दौरान संजय गांधी को इंदिरा गांदी के 20-प्वाइंट प्रोग्राम पर आधारित कांग्रेल रैली में गाने के लिए माना कर दिया है. जिसके बाद ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर उनके गानों पर बैन लगा दिया. किशोर कुमार का निधन 1987 में हुआ था. लेकिन आज भी उनके चहेतों की कोई कमी नहीं है.

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