scorecardresearch
 

रूबरू रोशनी Review : वो जघन्यतम अपराध जिन्हें माफ़ करना सबके बस की बात नहीं

Aamir Khan film Rubaru Roshni Review आमिर खान की शॉर्ट फिल्म रूबरू रोशनी गणतंत्र दिवस के दिन रिलीज की गई. इसे हिंदी समेत 7 भाषाओं में देखा जा सकता है. फिल्म का निर्माण किरण राव और आमिर खान के प्रोडक्शन ने किया है. निर्देशन स्वाति चक्रवर्ती का है.

Advertisement
X
आमिर खान (फोटो: इंस्टाग्राम)
आमिर खान (फोटो: इंस्टाग्राम)

सत्यमेव जयते के बाद आमिर खान एक बार फिर समाज के लिए "रूबरू रोशनी" के रूप में बेहद जरूरी कहानी लेकर आए हैं. ये एक शॉर्ट फिल्म कही जा रही है, जिसका निर्माण किरण राव और आमिर खान के प्रोडक्शन ने किया है. निर्देशन स्वाति चक्रवर्ती का है. रूबरू रोशनी का प्रीमियर गणतंत्र दिवस के दिन स्टार प्लस और हॉटस्टार पर किया गया. इसे हिंदी समेत सात भाषाओं में रिलीज किया गया है.

रूबरू रोशनी की कहानी को किसी भी तरह की समीक्षा से अलग रखना चाहिए. ये एक ऐसी फिल्म है जिसे डॉक्यूमेंट्री मानने में भी हर्ज नहीं करना चाहिए. इसमें 1984 से 2009 तक के समय को तीन बड़ी घटनाओं के जरिए दिखाया गया है. पिछले तीन दशक की उन तमाम कहानियों का जिक्र है, जिनका असर आज भी नजर आता है. इन कहानियों की तरह देश में अनगिनत अपराध हुए हैं, असंख्य लोगों को इसके खामियाजे भुगतने पड़े हैं. और यह बताने की जरूरत नहीं कि कई परिवार इनसे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.

Advertisement

सड़कों पर भीड़ की हिंसा वाले दौर में रूबरू रोशनी, आगाह करती है. मानवीय संवेदना के नुकसान को लेकर सचेत करती है. कई अपराध हम रौ में बहकर कर तो जाते हैं, लेकिन उसकी वजह से जिंदगी भर तमाम लोगों को जूझना पड़ता है. कई बार अपराध करने वाला भी उससे बच नहीं पाता. वह भी एक बोझ और पीड़ा से जिंदगी भर गुजरता है. रूबरू रोशनी, जघन्यतम अपराध और उसके बरक्स "क्षमा" को लेकर बुना गया है. आमतौर पर हकीकत में इस तरह की "क्षमापूर्ण" कहानियों को देखना बहुत ही दुर्लभ है.

रूबरू रोशनी की पहली कहानी इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहने के दौरान पवित्र स्वर्ण मंदिर पर सेना की कार्रवाई और उसके बाद की हिंसा से निकलती है. घटना का असर पढ़े लिखे नौजवान रणजीत सिंह "कुकी" और उसके दोस्तों पर इस तरह पड़ता है कि वो दिल्ली में पूर्व राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा के दामाद और कांग्रेस सांसद ललित माकन की हत्या कर देता है. ललित के साथ उनकी पत्नी भी मारी जाती हैं. कुकी के इस अपराध का खामियाजा अवंतिका को कई साल तक भुगतना पड़ता है जो घटना के वक्त महज छह साल की थीं.

दूसरी कहानी 1995 में मध्यप्रदेश में धार्मिक घृणा में अपनी जान गंवाने वाली नन रानी मारिया की है. समंदर सिंह नाम के एक शख्स ने निर्दोष रानी की चाकुओं से हमला कर जान ले ली थी. रानी पर आरोप था कि वे धर्म परिवर्तन जैसे काम करा रही हैं. तीसरी कहानी मुंबई पर आतंकी हमलों में अपना पति खोने वाली विदेशी महिला कीया की है.

Advertisement

View this post on Instagram

Happy Republic Day! 20 mts to go... then we will be Rubaru... #RubaruRoshni

A post shared by Aamir Khan (@_aamirkhan) on

रूबरू रोशनी में दिखाई गई घटनाओं को लेकर दो तरह के नजरिए सामने आते हैं. फिल्म में संवादों के जरिए दोनों पक्षों का नजरिया, घटना की तमाम डिटेल और उसके पीछे मौजूदा राजनीतिक सोच की भूमिका सामने आती रहती है. घटना से पहले और बाद में दोनों पक्षों की एक दूसरे के प्रति क्या सोच रही होगी यह बताने की जरूरत नहीं. लेकिन जब अपराधी और पीड़ित पक्ष एक दूसरे के सामने होते हैं तो बिल्कुल एक अलग ही नजरिया निकल कर आता है. ये बेशकीमती मानवीय गुण है. "क्षमा." 

View this post on Instagram

#RubaruRoshni, 26th Jan, Saturday at 11am on @starplus

A post shared by Aamir Khan (@_aamirkhan) on

फिल्म में पटकथा नहीं है, नाटकीय दृश्य नहीं हैं. बल्कि इसकी कहानी वास्तविक संवादों (जो इंटरव्यू शैली में है), दृश्यों, सन्दर्भ के तौर पर पुरानी फुटेज के सहारे खुद बी खुद बुनती चली गई है. वैसे कहानी बताने का यह ढंग नया नहीं है, लेकिन संवादों के सहारे जैसे जैसे तीनों कहानियां अपने "निष्कर्ष" की ओर बढ़ती हैं, आप भावुक कर देने वाले कई क्षणों से होकर गुजरते हैं. 

Advertisement

जवाब दर जवाब, कई सवाल निकलते रहते हैं, जो संबंधित घटनाओं से जुड़े हैं. कुछ जगहों पर नैरेटर (आमिर खान) का सहारा लिया गया है. सवाल जवाब में एक कहानी बनती गई है. एक दिलचस्प, बांधकर रखने वाली स्टोरी लाइन की तरह. कई संवाद झकझोर कर रख देते हैं. जवाब दर जवाब संबंधित घटनाओं को लेकर एक दूसरा ही नजरिया निकलता जाता है और आंखें खुलती जाती हैं. रूबरू रोशनी बहुत ही संवेदनशील और प्रभावी कथन है. वास्तव में इसे देखते हुए ही इसके असर को महसूस किया जा सकता है.

इसमें मनोरंजन जैसा कुछ भी नहीं है. लेकिन हर दौर में आने वाले सवाल हैं और उनके जवाब भी.

Advertisement
Advertisement