दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' का कई साल अटकने के बाद अचानक जी5 पर आना और 48 घंटे के अंदर हट जाना बड़े विवाद की वजह बन गया है. जी5 ने फिल्म की स्ट्रीमिंग पॉज़ करने की अनाउंसमेंट के साथ ये लिखा कि वो फिल्म को फिर से वापस लाने की कोशिश करेंगे. लेकिन इस सवाल का पक्का जवाब अभी तक किसी के पास नहीं था कि किसके कहने पर ये फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाई गई. अब सामने आया है कि केंद्र सरकार ने जी5 से फिल्म हटाने को कहा था.
सरकार से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि केंद्र सरकार ने 'सुरक्षा कारणों' और आईटी नियम, 2021 के तहत अपने 'दायित्वों' का हवाला देते हुए ज़ी5 को दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' हटाने का निर्देश दिया था. सरकारी सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी.
इस बीच पंजाब की कई राजनीतिक पार्टियों और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने फिल्म को दोबारा रिलीज करने की मांग की है. वहीं दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया पर लोगों से अपील की है कि फिल्म जहां और जैसे भी देख सकें, जरूर देखें.
जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर बेस्ड 'सतलुज' 1990 के दशक में, उग्रवाद से जूझ रहे पंजाब की कहानी दिखाती है. CBFC (सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन) के सामने इस फिल्म की पहली स्क्रीनिंग 2022 में हुई थी. मगर तीन साल से भी ज्यादा वक्त से ये फिल्म लगातार अटकी रही. शुक्रवार को ज़ी5 पर 'सतलुज' बिना किसी कट के अचानक रिलीज हो गई. जनता से इस फिल्म को बहुत पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिलने लगा लेकिन इस बीच रविवार को सामने आया कि ये फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा भी दी गई है.
ओटीटी पर रिलीज होने वाली फिल्मों को CBFC से सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं होती. इन प्लेटफॉर्म्स को आईटी रूल्स, 2021 के, पार्ट 3 के तहत रेगुलेट किया जाता है. नाम न बताने की शर्त पर एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि मेकर्स ने 2022 में फिल्म के ओरिजिनल नाम 'पंजाब 95' के साथ CBFC सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई किया था. हालांकि, आने वाले सालों में उन्होंने बोर्ड की ओर से सुझाए गए 127 कट स्वीकार नहीं किए और फिल्म की रिलीज रोक दी.
अधिकारी ने बताया, 'मेकर्स ने कट्स पर कोई फैसला नहीं लिया और बाद में चुपचाप फिल्म का नाम बदलकर ओटीटी पर रिलीज कर दिया. ओटीटी, CBFC के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता. जब सरकार के संज्ञान में यह मामला आया, तो ज़ी5 को फिल्म हटाने का निर्देश दिया गया.'
उन्होंने आगे कहा, 'ये आदेश सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए दिया गया. ओटीटी प्लेटफॉर्म से कहा गया कि वो गाइडलाइंस के तहत अपने दायित्वों का पालन करे. अगर मेकर्स फिल्म को थिएटर और ओटीटी दोनों पर रिलीज करना चाहते हैं, तो उन्हें तय नियमों का पालन करना होगा.'
डायरेक्टर हनी त्रेहान की फिल्म 'सतलुज' मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है. खालड़ा ने 1984 से 1994 के बीच पंजाब में हजारों अज्ञात शवों के अवैध तरीके से अंतिम संस्कार का खुलासा किया था. साल 1995 में उनका अपहरण कर लिया गया था, जिसके बाद वो कभी वापस नहीं लौटे.
दिलजीत दोसांझ ने सोमवार को कहा कि उन्हें पहले से अंदाजा था कि उनकी फिल्म ओटीटी से भी हटाई जा सकती है. वहीं ज़ी5 ने एक अपील जारी कर लोगों से फिल्म की पाइरेसी का समर्थन न करने की अपील की, क्योंकि फिल्म हटाए जाने से पहले कई लोगों ने इसे डाउनलोड कर लिया था.