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MS Dhoni Birthday: टिकट कलेक्टर से 'कैप्टन कूल' बनने तक, 45 साल के हुए महेंद्र सिंह धोनी

7 जुलाई (मंगलवार) को पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी 45 साल के हो गए. रांची के एक साधारण लड़के से भारत के सफल कप्तान बनने तक का एमएस धोनी का सफर मेहनत, संघर्ष और ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरी प्रेरणादायक कहानी है.

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45 साल के हुए पूर्व कप्तान एम एस धोनी (Photo: PTI)
45 साल के हुए पूर्व कप्तान एम एस धोनी (Photo: PTI)

जब भी भारतीय क्रिकेट के महान कप्तानों का जिक्र होगा, महेंद्र सिंह धोनी का नाम सबसे ऊपर लिया जाएगा. 7 जुलाई 1981 को झारखंड के रांची में जन्मे धोनी आज अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं. 

एक साधारण परिवार से निकलकर दुनिया के सबसे सफल क्रिकेट कप्तानों में शामिल होने तक का उनका सफर करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा है. स्कूल के दिनों में वह फुटबॉल टीम के गोलकीपर थे, लेकिन उनके कोच ने उन्हें क्रिकेट में विकेटकीपिंग करने की सलाह दी.

यही फैसला उनकी जिंदगी बदल गया. घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्होंने भारतीय रेलवे में ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर (TTE) की नौकरी भी की. 

महेंद्र सिंह धोनी नौकरी और क्रिकेट दोनों को साथ लेकर चलते रहे. साल 2004 में धोनी ने बांग्लादेश के खिलाफ भारत के लिए वनडे डेब्यू किया.

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शुरुआत भले ही यादगार नहीं रही, लेकिन 2005 में पाकिस्तान के खिलाफ 148 रन और उसी साल श्रीलंका के खिलाफ नाबाद 183 रन की विस्फोटक पारी ने उन्हें इंटरनेशनल क्रिकेट का नया सितारा बना दिया. धोनी की आक्रामक बल्लेबाजी और लंबे-लंबे छक्कों ने उन्हें फैन्स का पसंदीदा खिलाड़ी बना दिया.

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2007 भारतीय क्रिकेट के इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ. सीनियर खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में युवा धोनी को टी20 विश्व कप के लिए कप्तानी सौंपी गई.

किसी को उम्मीद नहीं थी कि अनुभवहीन टीम इतिहास रच देगी, लेकिन धोनी ने अपनी शांत सोच और बेहतरीन रणनीति से भारत को पहला आईसीसी टी20 विश्व कप जिताकर दुनिया को चौंका दिया. यहीं से उन्हें 'कैप्टन कूल' कहा जाने लगा.

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इसके बाद धोनी ने भारतीय क्रिकेट को सफलता की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया. 2011 वनडे विश्व कप फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ नाबाद 91 रन की कप्तानी पारी और विजयी छक्का आज भी हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी की यादों में ताजा है. 

इसी जीत के साथ भारत ने 28 साल बाद वनडे विश्व कप का खिताब जीता. 2013 में उनकी कप्तानी में भारत ने आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी भी अपने नाम की. धोनी आज भी दुनिया के इकलौते कप्तान हैं जिन्होंने आईसीसी टी20 विश्व कप, वनडे विश्व कप और चैम्पियंस ट्रॉफी, तीनों बड़े आईसीसी खिताब जीते हैं. 

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विकेटकीपर के रूप में उनकी बिजली जैसी फुर्ती, मैच को आखिरी ओवर तक ले जाकर खत्म करने की कला, दबाव में शांत रहने की क्षमता ने उन्हें क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ियों में शामिल कर दिया.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में धोनी ने 90 टेस्ट, 350 वनडे और 98 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले. उनके नाम 17,000 से अधिक इंटरनेशनल रन और विकेटकीपर के रूप में 800 से ज्यादा शिकार दर्ज हैं. उन्होंने भारत को पहली बार आईसीसी की टेस्ट रैंकिंग में नंबर-1 भी बनाया.

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आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स की कप्तानी करते हुए उन्होंने टीम को 5 बार आईपीएल चैम्पियन बनाया और फ्रेंचाइजी क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में अपनी जगह बनाई. 

चेन्नई के फैन्स उन्हें प्यार से 'थाला' कहते हैं और आज भी मैदान पर उनकी एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते हैं. धोनी को उनके शानदार योगदान के लिए पद्म श्री, पद्म भूषण और भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न (पूर्व में राजीव गांधी खेल रत्न) से सम्मानित किया जा चुका है. 

15 अगस्त 2020 को उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लिया, लेकिन उनकी लोकप्रियता में आज भी कोई कमी नहीं आई है. क्रिकेट की दुनिया में उनके रिकॉर्ड टूट सकते हैं, लेकिन करोड़ों भारतीयों के दिलों में उनकी जगह हमेशा कायम रहेगी.

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