
दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' के एक सीन पर सोशल मीडिया पर आलोचना हो रही है. कुछ यूज़र्स ने पंजाब के मुख्यमंत्री की कार के पास एक सुसाइड बॉम्बर के पहुंचने और बैकग्राउंड में संगीत के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं. क्लिप पर रिएक्शन देने वाले कुछ लोगों का कहना है कि यह सीन पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह (जिनका किरदार फिल्म में एसएम जहीर ने निभाया है) की हत्या के एक काल्पनिक वर्शन को महिमामंडित करता हुआ लगता है.
यह बहस ऐसे समय में हो रही है जब 'सतलुज' पहले से ही चर्चा में है, क्योंकि भारत में जी5 (Zee5) से इसे अगले आदेश तक हटा दिया गया है. मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन से प्रेरित यह फिल्म, एक नए टाइटल के साथ बिना किसी कट के रिलीज होने से पहले लंबे सर्टिफिकेशन विवाद से गुजरी थी.
X पर सीन शेयर करते हुए एक यूजर ने लिखा, 'फिल्म 'सतलुज' में मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या को महिमामंडित किया गया है. सीएम बेअंत सिंह की हत्या खालिस्तानियों ने की थी, लेकिन फिल्म में खालिस्तानियों का कोई जिक्र नहीं है.'
एक अन्य यूजर ने कहा कि बैकग्राउंड में बज रहा गाना 'हीरोज से अपनी आध्यात्मिक लड़ाई और वीरता को युद्ध के मैदान में ले जाकर दुश्मनों का सामना करने का आह्वान' था. उन्होंने तर्क दिया कि सीन में बेअंत सिंह की हत्या को बिना किसी खालिस्तानी लिंक के दिखाया गया है, जिससे यह आम आदमी का आक्रोश जैसा लगता है. यूजर ने आगे कहा कि इसीलिए #सतलुज में 127 कट की जरूरत थी और मौजूदा समय में खालिस्तानी प्रभाव बढ़ने के कारण इस पर प्रतिबंध बहुत जरूरी था.
एक तीसरे यूजर ने सीन को 'बेहद आपत्तिजनक' बताया और लिखा, 'इसमें सीएम की हत्या को सुसाइड बॉम्बिंग के जरिए दिखाया गया है, जबकि बैकग्राउंड में एक उत्साहजनक, पॉजिटिव गाना इस्तेमाल किया गया है, जिससे सीन महिमामंडित लगता है. इस चित्रण के पीछे आपका क्या मकसद था? कृपया बताएं दिलजीत. जहां तक मैंने पढ़ा है, पूर्व सीएम की हत्या में शामिल प्रो-खालिस्तान आतंकवादी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी.'
अन्य यूजर्स ने फिल्म का बचाव किया और कहा कि क्लिप को कहानी के व्यापक संदर्भ के बिना देखा जा रहा है. ऐसी ही एक पोस्ट का जवाब देते हुए, एक X यूजर ने कहा कि फिल्म 1995 की पृष्ठभूमि पर आधारित है और दिखाती है कि कैसे पुलिस विभाग सिर्फ प्रमोशन पाने के लिए निर्दोष लोगों को मार रहा था, और इसमें मुख्यमंत्री भी शामिल थे. यूज़र ने आगे कहा कि हमला करने वाले व्यक्ति के परिवार को भी इसी तरह मार दिया गया था और उन्हें आतंकवादी घोषित कर दिया गया था.
उसी पोस्ट में 'सतलुज' को जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी बताया गया है, जिनका किरदार दोसांझ ने निभाया है. पोस्ट में कहा गया है कि 1990 के दशक में उन्होंने पंजाब में हजारों सिख युवाओं के गायब होने की जांच की थी. पोस्ट के अनुसार, खालरा ने नगर पालिका और श्मशान घाट के रिकॉर्ड का इस्तेमाल करके सरकार द्वारा समर्थित गैर-न्यायिक हत्याओं और सामूहिक अंतिम संस्कार के सबूत जुटाए. उन्होंने अनुमान लगाया कि 25,000 से ज्यादा लोगों को गैर-कानूनी तरीके से मारा गया था. पोस्ट में यह भी कहा गया कि बाद में 1995 में पुलिस ने उनका अपहरण कर लिया था और इसमें शामिल अधिकारियों को बाद में दोषी ठहराया गया था.

एक और यूजर ने भी आलोचना का जवाब देते हुए लिखा, 'क्या आपने फिल्म देखी है? ऐसा लगता है कि आपने सिर्फ इंटरनेट पर मौजूद एक क्लिप के आधार पर टिप्पणी कर दी. यह गाना उस व्यक्ति के नजरिए से था जिसके साथ अन्याय हुआ था. उसके पूरे परिवार की हत्या कर दी गई थी. इसमें किसी मुख्यमंत्री की मौत का महिमामंडन नहीं किया गया था.'
Zee5 से हटाए जाने के बाद इस फिल्म ने खालड़ा की जिंदगी की ओर फिर से लोगों का ध्यान खींचा है. दोसांझ ने पंजाबी में एक इंस्टाग्राम पोस्ट के ज़रिए इसे हटाए जाने पर बात की. उन्होंने लिखा- 'मैं अंधेरे को चुनौती देता हूं. शहीद जसवंत सिंह खालड़ा जी. पंजाब 95. खालड़ा साहब के साथ जो हुआ, वही 'सतलुज' है.'
बाद में Zee5 ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी करके फिल्म को हटाने की पुष्टि की. उन्होंने कहा कि 'सतलुज' को बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला है और उन दर्शकों का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने इसे सब्सक्राइब किया, देखा और सपोर्ट किया. प्लेटफॉर्म ने कहा कि वह फिल्म, उसके डायरेक्टर और उसके क्रिएटिव विजन का समर्थन करता रहेगा. साथ ही, वह भारत में दर्शकों के लिए 'सतलुज' को जल्द से जल्द वापस लाने के लिए कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रहा है.