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'श्रीकृष्ण' बनने में डर रहे थे श्रुहद गोस्वामी, 'लालो' करने के बाद बढ़ गई आस्था, बोले- ठेस पहुंचाना...

100 करोड़ की गुजराती फिल्म ‘लालो–कृष्ण सदा सहायते’ से चर्चा में आए श्रुहद गोस्वामी. भगवान कृष्ण का किरदार निभाने पर बोले- यह मेरी नहीं, ईश्वर की कृपा है.

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श्रुहद गोस्वामी ने निभाया श्रीकृष्ण किरदार (Photo: Screengrab)
श्रुहद गोस्वामी ने निभाया श्रीकृष्ण किरदार (Photo: Screengrab)

गुजराती सिनेमा की 100 करोड़ी फिल्म ‘लालो- कृष्ण सदा सहायते' में श्रुहद गोस्वामी ने भगवान कृष्ण की अहम भूमिका निभाई. श्रुहद को फिल्म में खूब पसंद किया जा रहा है. उन्हें बीआर चोपड़ा की आइकॉनिक महाभारत में श्रीकृष्ण का किरदार निभाने वाले नीतिश भारद्वाज से भी कम्पेयर किया जा रहा है. श्रुहद की एक्टिंग एक्टिंग फिल्म में इतनी नैचुरल रही है कि हर कोई उनसे इम्प्रेस है. इस बारे में एक्टर ने खुद बात की.  

फिल्म की सफलता को देखते हुए अब मेकर्स ने इसे 9 जनवरी को हिंदी में भी रिलीज कर दिया. बॉलीवुड हंगामा से बातचीत में श्रुहद ने फिल्म, अपने किरदार और इस रोल ने उन्हें कैसे बदला- इस पर खुलकर बात की.

भगवान का किरदार निभाना बड़ी जिम्मेदारी

श्रुहद ने कहा कि भारत में भगवान कृष्ण का किरदार निभाना बिल्कुल आसान नहीं है. उन्होंने कहा- भगवान का रोल निभाना बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है. मुझे यह ध्यान रखना था कि किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचे. उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्हें डर भी लग रहा था. “थोड़ा डर था, लेकिन जैसे-जैसे हम काम करते गए, सब आसान होता गया.” टीम को जब भावनाएं समझ में आने लगीं, तो चीजें अपने आप सही बैठने लगीं.

श्रुहद ने साफ कहा कि वह इस किरदार के लिए खुद को श्रेय नहीं देना चाहते. उन्होंने कहा, “जब मैंने पहली बार फिल्म देखी, तो मुझे खुद यकीन नहीं हुआ कि मैंने यह कैसे कर लिया.'' उनका मानना है कि इस किरदार के पीछे कोई दिव्य शक्ति काम कर रही थी. “मुझे लगता है कि भगवान की कृपा से ही मैं यह कर पाया. वरना कोई इंसान भगवान का किरदार कैसे निभा सकता है?” 

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अलग तरह के कृष्ण और और मजबूत आस्था

नीतिश भारद्वाज से तुलना पर श्रुहद ने कहा कि हर एक्टर अलग होता है. वो बोले- नीतिश भारद्वाज अलग हैं और मैं अलग हूं. उन्होंने बताया कि निर्देशक अंकित साखिया एक ऐसे कृष्ण को दिखाना चाहते थे, जो लोगों के और करीब लगे. “अंकित चाहते थे कि भगवान को इस तरह दिखाया जाए कि वे रोते भी हैं, हमसे बात करते हैं और हमें समझाते भी हैं.”

फिल्म के बाद श्रुहद की आस्था और मजबूत हो गई है. उन्होंने कहा, “हमने कुछ मांगा भी नहीं था, फिर भी भगवान ने हमें इतना कुछ दे दिया.” अब उन्हें कई ऑफर्स मिल रहे हैं, लेकिन श्रुहद का कहना है कि वह शांति से सोच-समझकर ही आगे के प्रोजेक्ट्स चुनेंगे.

‘लालो- कृष्ण सदा सहायते’ सबके लिए एक बड़ा सरप्राइज साबित हुई. अपनी मातृभाषा में शुरुआत में फिल्म ने धीमी कमाई की, लेकिन धीरे-धीरे लोग इसके बारे में बात करने लगे. परिवार बड़ी संख्या में थिएटर में फिल्म देखने पहुंचे. लोगों की जुबानी तारीफ  से फिल्म को काफी फायदा मिला. आखिरकार इस फिल्म ने करीब 100 करोड़ रुपये की कमाई की.

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