बॉलीवुड में इस समय धुरंधर एक्टर रणवीर सिंह और फिल्ममेकर-एक्टर फरहान अख्तर के बीच झगड़ा चल रहा है. ये पूरी लड़ाई रणवीर के डॉन-3 छोड़ने के बाद शुरू हुई, तभी से दोनों के रिश्ते बिगड़ गए. अब इस बीच जिंदगी न मिलेगी दोबारा, गली बॉय और दिल धड़कने दो जैसी कई बेहतरीन फिल्में बनाने वालीं डायरेक्टर और फरहान अख्तर की बहन जोया अख्तर ने भारत में इंडी फिल्मों के माहौल और भारत के स्टार सिस्टम के फायदों और नुकसानों के बारे में बात की है.
दरअसल जोया अख्तर काफी समय से इंडिपेंडेंट फिल्मों को बढ़ावा दे रही हैं. इन छिपे हुए हीरों में सबसे नई फिल्म है सिक्किम की 'शेप ऑफ मोमो', जिसे पहली बार फिल्म बना रहीं त्रिबेनी राय ने डायरेक्ट किया है. यह फिल्म इस हफ्ते सिनेमाघरों में रिलीज हुई है.
भारत की मशहूर इंडिपेंडेंट फिल्मों के बारे में हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए जोया कहती हैं, 'ये फिल्में कभी-कभार ही आती थीं, लेकिन अब ऐसा ज्यादातर होने लगा है. चाहे वह 'विलेज रॉकस्टार्स' हो, कान फिल्म फेस्टिवल में 'ऑल वी इमेजिन एज लाइट' हो, 'बोंग' हो, या सनडांस फिल्म फेस्टिवल में 'सबार बोंडा' हो, ऐसा लगातार हो रहा है.'
अब तक, ऐसी फिल्में ज्यादातर जाने-माने फिल्ममेकर्स के सपोर्ट की वजह से ही सिनेमाघरों तक पहुंच पाई हैं. जोया कहती हैं, 'फिल्ममेकर्स हमेशा से एक-दूसरे को सपोर्ट करते आए हैं, और यह सिलसिला कभी रुकेगा नहीं.' लेकिन वह इस बात से भी सहमत हैं कि इंडी फिल्मों के लिए एक संस्थागत सपोर्ट की भी जरूरत है. वह तर्क देती हैं, 'लोग अब इस बात को समझने लगे हैं. इसे अपना सही तालमेल मिल ही जाएगा. एक ऐसा डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम होना चाहिए जो सीधे दर्शकों तक पहुंचे, क्योंकि इन फिल्मों के लिए दर्शक जरूर मौजूद हैं. हमें इन फिल्मों को उन दर्शकों तक पहुंचाना होगा, और फिर ये फिल्में जरूर कामयाब होंगी.'
'हम एक स्टार-ड्रिवेन इंडस्ट्री हैं'- जोया
'गली बॉय' और 'जिंदगी न मिलेगी दोबारा' जैसी कमर्शियल हिट फिल्में बनाने वाली डायरेक्टर जोया मानती हैं कि बॉलीवुड एक ऐसी इंडस्ट्री है जिस पर उसके सितारों का ही दबदबा और राज चलता है. वह कहती हैं, 'हम एक स्टार-ड्रिवेन इंडस्ट्री हैं, और इस स्टार सिस्टम के अपने फायदे और नुकसान हैं. इसका फायदा यह है कि हॉलीवुड के आने के बाद भी हम टिके रहे. हमारे अपने सितारे हैं, और हमें उन्हें देखना पसंद है. इसी स्टार सिस्टम की वजह से हमारी इंडस्ट्री का माहौल इतना शानदार है.'
लेकिन जोया यह भी कहती हैं कि सितारों पर इतना ज्यादा निर्भर रहने का एक नुकसान भी है. उन्होंने कहा, 'जिस चीज में स्टार्स नहीं होते, उसमें हमारी कोई दिलचस्पी नहीं होती. हमें अपना स्टार सिस्टम बनाए रखना है और ज्यादा से ज्यादा स्टार्स बनाने हैं. ऑटर्स (फिल्म बनाने वाले) भी स्टार्स ही होते हैं. साथ ही वह यह भी जोड़ती हैं कि अगर इंडिपेंडेंट फिल्ममेकर्स को स्टार्स में बदला जा सके, तो छोटी फिल्में भी खूब चल सकती हैं.'
बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर दिया रिएक्शन
इंडिपेंडेंट फिल्मों के सामने सबसे बड़ी रुकावटों में से एक है बॉक्स-ऑफिस कलेक्शन को 'सफलता' का पैमाना मानने का बढ़ता चलन. जोया कहती हैं, 'हम सिर्फ पैसे पर ध्यान नहीं दे सकते. यह एक कला का रूप है, इसलिए हमें इसके दूसरे असर पर भी ध्यान देना होगा. किसी को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि 'कागज के फूल' ने कितने पैसे कमाए थे या उस साल की सबसे बड़ी हिट फिल्म कौन सी थी. लेकिन, 'कागज के फूल' को तो 70 साल बाद भी हर कोई याद करता है. सफलता के अलग-अलग मायने होते हैं.'