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शादी के बाद शर्मिला टैगोर ने बच्चों को दी इस्लाम की सीख, बेटी सबा का खुलासा

सैफ अली खान की बहन सबा पटौदी ने कहा कि उनकी मां शर्मिला टैगोर ने उन्हें बचपन से सिर्फ इस्लाम धर्म के बारे में पढ़ाया-सिखाया है. वो कभी मंदिर नहीं गईं. हालांकि उन्होंने कभी किसी पर कोई धर्म चुनने का दबाव नहीं डाला.

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मां की परवरिश पर बोलीं सैफ की बहन (Photo: Instagram @sabapataudi)
मां की परवरिश पर बोलीं सैफ की बहन (Photo: Instagram @sabapataudi)

बॉलीवुड की अदाकारा शर्मिला टैगोर और भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान मंसूर अली खान पटौदी की इंटरफेथ मैरिज हुई थी. उनकी शादी के तब काफी चर्चे हुए थे. शर्मिला ने शादी के बाद इस्लाम धर्म अपना लिया था. हाल ही में उनकी बेटी सबा पटौदी ने अपने धर्म और परिवार में धार्मिक माहौल पर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि उनकी मां ने बचपन में उन्हें इस्लाम धर्म के बारे में कई बातें सिखाईं और वो वही धर्म को मानते हुए ही बड़ी हुईं.

मां शर्मिला ने सिखाया इस्लाम

यूट्यूब चैनल बिग बॉलीवुड संग बातचीत में सबा पटौदी ने कहा- मैं खुद को धार्मिक मानती हूं और इस्लाम से गहरा जुड़ाव महसूस करती हूं. अगर मैं भगवान के बारे में सोचती हूं तो मेरे लिए वो अल्लाह हैं. लेकिन मैं दूसरे सभी धर्मों का भी आदर और सम्मान करती हूं. सबा ने आगे बताया कि जब उनकी मां शर्मिला टैगोर ने मंसूर अली खान पटौदी से शादी की तब उन्होंने इस्लाम धर्म को इस तरह अपनाया कि उन्होंने अपने बच्चों को भी इसी धर्म की परंपराओं और मान्यताओं के बारे में सिखाया.

उनकी मां ने उन्हें रमजान और इस्लाम से जुड़ी कई बातें समझाईं. हालांकि सबा ने ये भी बताया कि उनकी मां ने उनपर किसी धर्म को थोपने की कोशिश नहीं की और उन्हें पूरी आजादी दी की वो अपने आस्था के अनुसार आगे चलकर अपना धर्म अपना सकते हैं. उन्होंने कहा कि उनके घर में हिंदू धर्म की पूजा नहीं होती थी और वो मंदिर भी नहीं जाते थे.

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परिवार में अलग-अलग धार्मिक विचारधारा

सबा ने आगे अपने परिवार की धार्मिक विचारधारा पर भी बात की. उन्होंने बताया कि फैमिली में कभी एक धार्मिक विचारधारा को लेकर दबाव नहीं बनाया गया. इसका असर ये हुआ कि उनके परिवार में अलग-अलग सदस्यों के मन में अपनी अलग धार्मिक विचारधारा बनी. सबा ने अपने भाई सैफ अली खान और बहन सोहा अली खान का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों ने अलग अलग धर्मों में शादी की हैं. उनका मानना है कि धर्म और आस्था हर इंसान की अपनी निजी पसंद होती है. इसे किसी इंसान पर जबरदस्ती थोपा नहीं जाना चाहिए.

सबा ने कहा, 'मेरे घर पर अलग-अलग त्योहार मनाया जाता था. हम दिवाली, होली और क्रिसमस जैसे सभी त्योहार मनाते हुए बड़े हुए हैं. मेरे पेरेंट्स कभी भी हम पर एक धर्म को थोपने की कोशिश नहीं की जो कि बहुत सही बात थी और मेरा मानना है कि सभी पेरेंट्स अपने बच्चे के साथ यही करें.'

हिंदू परिवार से थीं शर्मिला टैगोर
 
शर्मिला टैगोर और मंसूर अली खान पटौदी दोनों अलग-अलग धर्मों से ताल्लुक रखते हैं. शर्मिला हिन्दू बंगाली परिवार से आती हैं और उनका संबंध नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के परिवार से है. जबकि मंसूर अली खान मुसलमान थे और उनका ताल्लुक पटौदी शाही परिवार से रहा. दोनों अलग-अलग धार्मिक परिवार से थे इसलिए दोनों का शादी आसान नहीं थी.

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सैफ की मां शर्मिला ने शादी के बाद इस्लाम धर्म अपनाया और अपना नाम आयशा रखा. उनके लिए ये सब करना आसान नहीं था. ये उनके जीवन का एक गंभीर फैसला था जिसे उन्होंने बड़ी समझदारी के साथ अपनाया. हालांकि इस शादी के लिए उनको विरोध और धमकियों का भी सामना करना पड़ा. लेकिन वो पीछे नहीं हटीं. कई बार ऐसे मौके आए जब दोनों के रिश्ते में दरार की भी खबर आई मगर दोनों ने अपने रिश्ते को कायम रखा.

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