थलपति विजय की 'जन नायगन' विवादों में फंसी हुई है. राजनीति में पूरी तरह उतरने से पहले ये उनकी आखिरी फिल्म होगी. उम्मीद थी कि फिल्म संक्रांति के मौके पर बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाएगी. लगभग 500 करोड़ रुपये के भारी बजट में बनी इस फिल्म को सीजन की सबसे बड़ी रिलीज़ के तौर पर पेश किया जा रहा था.
लेकिन एडवांस बुकिंग और हाउसफुल शो का जश्न मनाने के बजाय, फिल्म के मेकर्स अब सेंसर बोर्ड के साथ कानूनी लड़ाई में फंस गए हैं. फिल्म की रिलीज डेट पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है. मेकर्स कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं.
इस पूरे विवाद के बीच अभिनेता और सांसद रवि किशन आगे आए हैं और उन्होंने इस मामले को सुलझाने में मदद करने की पेशकश की है. SCREEN से रवि किशन ने कहा कि विजय की मुश्किलें सिर्फ एक फोन कॉल की दूरी पर हैं. मालूम हो कि रवि किशन खुद हिंदी के अलावा, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और भोजपुरी फिल्मों में भी काफी काम कर चुके हैं.
विजय की मुश्किल हल करेंगे रवि
रवि किशन ने कहा- मुझे इस बारे में आपसे ही पता चला है. वरना मुझे कोई शिकायत नहीं मिली थी. लेकिन एक सांसद होने के नाते फिल्म इंडस्ट्री के लोग मुझसे सीधे संपर्क कर सकते हैं. वो मुझे लिख सकते हैं या कॉल कर सकते हैं. अगर कोई फिल्म अटकी है, तो मैं सेंसर बोर्ड से जरूर बात कर सकता हूं.
उन्होंने आगे बताया- देरी की वजह ये हो सकती है कि सेंसर बोर्ड को फिल्म में कई चीजें जांचनी होती हैं. भाषा ठीक है या नहीं, किसी धर्म की भावनाएं आहत तो नहीं हो रहीं, और किसी असल घटना को गलत तरीके से तो नहीं दिखाया गया. इन सब बातों पर ध्यान देना पड़ता है. ये एक लंबी प्रक्रिया है. असली सवाल ये है कि पैनल के सदस्य एक दिन में कितनी स्क्रीनिंग कर सकते हैं.
फिल्म इंडस्ट्री के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए रवि किशन ने कहा- आपके जरिए मैं अपने परिवार यानी फिल्म इंडस्ट्री से कहना चाहता हूं कि वो मुझसे सीधे संपर्क करें. जब हमारी सरकार सत्ता में है, तो ये मेरी जिम्मेदारी है कि मैं अपनी इंडस्ट्री का ख्याल रखूं. उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है.
संसद में उठाएंगे जन नायगन का मुद्दा
रवि किशन ने ये भी बताया कि वो इस मुद्दे को संसद में उठाने की योजना बना रहे हैं. उन्होंने कहा- मैं खुद सूचना मंत्रालय से बात करूंगा. संसद का सत्र जल्द शुरू होने वाला है और मैं वहां ये मुद्दा उठाऊंगा कि सेंसर बोर्ड को कैसे और बड़ा, बेहतर और तेज बनाया जा सकता है, ताकि प्रोड्यूसर समय पर अपनी फिल्में रिलीज़ कर सकें.
पिछले एक साल में सेंसर बोर्ड लगातार सवालों के घेरे में रहा है और जन नायगन इस विवाद का ताजा उदाहरण है. इससे पहले भी कई फिल्मों को इसी तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा है. शिवकार्तिकेयन की फिल्म पराशक्ति को रिलीज से सिर्फ एक दिन पहले सर्टिफिकेट मिला था, जिसके बाद मेकर्स को करीब 25 बदलाव सिर्फ 10 घंटे में करने पड़े. इसका असर फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन पर पड़ा.
पिछले साल कई बार ऐसा भी हुआ जब जिन फिल्मों को ‘A’ सर्टिफिकेट मिलना चाहिए था, उन्हें ‘U/A’ दे दिया गया. इससे सर्टिफिकेशन प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर सवाल उठे. फिल्ममेकर्स और इंडस्ट्री से लगातार आलोचना के बावजूद, सेंसर बोर्ड के सदस्यों ने इन आरोपों पर ज्यादातर चुप्पी ही साधे रखी है.