फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज को लेकर चर्चा में हैं. इस बार उन्होंने 'डॉन 3' फिल्म से जुड़े विवाद में फंसे बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह का खुलकर समर्थन किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी-चौड़ी पोस्ट शेयर करके न सिर्फ इस बैन की आलोचना की, बल्कि FWICE को 'कंगारू कोर्ट' (मनमानी अदालत) और 'पुराने जमाने की संस्था' तक कह डाला. RGV ने साफ शब्दों में कहा कि फिल्म इंडस्ट्री स्टार्स के दम पर चलती है, न कि किसी यूनियन के दम पर.
दरअसल, रणवीर सिंह और फिल्म के डायरेक्टर-प्रोड्यूसर फरहान अख्तर के बीच 'डॉन 3' को छोड़ने को लेकर विवाद चल रहा है. इस मामले में जब फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने दखल देते हुए रणवीर सिंह के खिलाफ 'असहयोग' (एक तरह का बैन) का निर्देश जारी किया, तो राम गोपाल वर्मा भड़क गए.
FWICE पर ही बैन लगाने की मांग
राम गोपाल वर्मा ने इस पूरे विवाद में कूदते हुए सोशल मीडिया पर सीधे तौर पर FWICE को आड़े हाथों लिया. उन्होंने अपनी पोस्ट की शुरुआत ही बेहद आक्रामक अंदाज में की. RGV ने लिखा कि असल में रणवीर सिंह पर नहीं, बल्कि खुद FWICE पर बैन लगाया जाना चाहिए. उनका मानना है कि यह संस्था गांधीवादी तरीके से 'असहयोग' का नाटक कर रही है, जो आखिरकार खुद इसके लिए एक बड़ा मज़ाक बनकर रह जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम फिल्म इंडस्ट्री या वहां काम करने वाले मजदूरों की भलाई के लिए नहीं उठाया गया है, बल्कि एक पुरानी हो चुकी यूनियन द्वारा अपनी धौंस जमाने और अपनी गिरती पकड़ को बचाने की एक नाकाम कोशिश है.
संस्था को बताया 'कंगारू कोर्ट'
फेडरेशन पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए राम गोपाल वर्मा ने इसे 'कंगारू कोर्ट' करार दिया. उन्होंने कहा कि FWICE कोई कानूनी अदालत या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्था नहीं है जो न्याय का फैसला करे. यह सिर्फ न्याय करने का ढोंग रचती है, जबकि असलियत में यह निष्पक्षता और स्थापित कानूनी नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर देती है.RGV ने यह भी दावा किया कि संस्था के फैसले पहले से ही कुछ खास एजेंडा चलाने वाले लोगों द्वारा तय कर लिए जाते हैं. इस समूह में ऐसे लोग और एक्टर भी शामिल हैं, जो रणवीर सिंह की बड़ी कामयाबी और उनके स्टारडम से अंदर ही अंदर डरे हुए हैं.
दो पक्षों के विवाद में यूनियन का क्या काम?
राम गोपाल वर्मा ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि दो व्यवसायियों के बीच के आपसी कॉन्ट्रैक्ट के मामले में कोई यूनियन कैसे दखल दे सकती है? उन्होंने कहा कि 'डॉन 3' के प्रोड्यूसर प्री-प्रोडक्शन में हुए भारी आर्थिक नुकसान का दावा कर रहे हैं, जो कि पूरी तरह से दो पार्टियों के बीच का सिविल मामला है. पूरे देश में बिजनेस के दौरान ऐसे लाखों विवाद होते हैं और उनके लिए देश की अदालतें बनी हैं. आरजीवी ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर फिल्म से जुड़े मुख्य टेक्नीशियन्स का समय और मेहनत बर्बाद हुई है, तो वे खुद सामने आकर सबूत पेश करें और सार्वजनिक रूप से कहें कि वे रणवीर के साथ काम नहीं करेंगे, न कि किसी यूनियन के पीछे छिपकर राजनीति करें.
अपनी बात को खत्म करते हुए राम गोपाल वर्मा ने फिल्म इंडस्ट्री के उस कड़वे सच को सामने रखा जिससे सब वाकिफ हैं. उन्होंने लिखा कि अगर आज रणवीर सिंह किसी फिल्म के लिए सिर्फ हां कह दें, तो कल सुबह उनके घर के बाहर प्रोड्यूसर्स चेक लेकर लाइनों में खड़े नजर आएंगे. उन्होंने साफ कहा कि थिएटर में टिकटें रणवीर सिंह जैसे स्टार्स की वजह से बिकती हैं, न कि FWICE के कारण. यह स्टार्स ही हैं जो इंडस्ट्री को जिंदा रखते हैं और लाखों वर्कर्स को रोजगार देते हैं, न कि कोई फेडरेशन.
क्या है पूरा 'डॉन 3' विवाद?
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब साल 2023 में शाहरुख खान की जगह रणवीर सिंह को 'डॉन 3' में मुख्य भूमिका के लिए चुना गया. लेकिन दिसंबर 2025 में खबरें आईं कि रणवीर ने अचानक इस फिल्म से अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं. पिछले महीने डायरेक्टर-प्रोड्यूसर फरहान अख्तर ने FWICE से शिकायत की कि रणवीर के अचानक फिल्म छोड़ने की वजह से उन्हें ₹45 करोड़ का भारी नुकसान हुआ है. इसके बाद FWICE ने रणवीर के खिलाफ असहयोग का नोटिस जारी कर दिया.