सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक्टर राजपाल यादव को कड़ी फटकार लगाई. उन्होंने अपनी एक फिल्म बनाने के लिए एक प्राइवेट कंपनी के पैसे उधार लिए थे, जिसे चुकाने का वादा राजपाल ने कोर्ट में किया था. लेकिन तय समय बीत जाने के बाद भी उन्होंने पैसे जमा नहीं किए. 15 सितंबर को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने राजपाल यादव को आखिरी मौका देते हुए दो हफ्ते के अंदर पैसे चुकाने का ठोस प्लान देने को कहा था.
कोर्ट ने उन्हें 2 करोड़ रुपये सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करने का भी निर्देश दिया था. सोमवार, 5 अक्टूबर को जब मामले की सुनवाई हुई तो कोर्ट ने पाया कि दो हफ्ते का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक पैसे जमा नहीं किए गए हैं. सुनवाई के दौरान राजपाल के वकील ने कहा कि शिकायत करने वाली कंपनी गरीब नहीं है.
राजपाल पर फूटा कोर्ट का गुस्सा
इसपर जस्टिस जॉयमाल्या बागची नाराज हो गए. उन्होंने राजपाल के वकील से कहा- वो आपसे ज्यादा अमीर हो सकते हैं, लेकिन जितने पैसे आपने उनसे लिए हैं, उतने के मामले में वो गरीब हैं. ये घमंड सही जगह पर लाना जरूरी है. आपको पता होना चाहिए कि कब बोलना है. आपकी जगह जेल में है.
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव के वकील ने 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की कॉपी भी दिखाई. उन्होंने बताया कि ड्राफ्ट बैंक में जमा है और उसकी प्रक्रिया चल रही है. इसपर कोर्ट ने उनसे कहा कि ये असली है या नहीं उन्हें नहीं पता. कंपनी के वकील ने भी राजपाल यादव पर कोर्ट के आदेशों का बार-बार पालन ना करने का आरोप लगाया. वरिष्ठ वकील अजीत सिन्हा ने कहा कि राजपाल एक फिल्म एक्टर हैं और यहां भी एक्टिंग कर रहे हैं. उन्हें कोर्ट जैसी संस्था का कोई सम्मान नहीं है.
अब कोर्ट ने राजपाल यादव को मंगलवार तक भुगतान करने का निर्देश दिया है. साथ ही मामले की अगली सुनवाई बुधवार को रखी गई है और इसे दिन का पहला केस बनाया गया है. कोर्ट ने ये भी कहा कि वो राजपाल की अपील खारिज कर सकता है, लेकिन ऐसा करने से शिकायत करने वाली कंपनी के पैसे वापस मिलने की संभावना पर असर पड़ सकता है. इसलिए कोर्ट फिलहाल ऐसा करने से बच रहा है.
क्या है पूरा मामला?
शिकायत करने वाली कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का आरोप है कि साल 2010 में राजपाल यादव ने एक फिल्म के लिए उनसे 5 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद ली थी. बाद में पैसे लौटाने के लिए 2013 में उन्होंने 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक दिए, लेकिन सभी चेक बाउंस हो गए. कंपनी के मुताबिक, 2012 में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता भी हुआ था. इसमें राजपाल, उनकी पत्नी और उनकी कंपनी ने ब्याज समेत करीब 11 करोड़ रुपये लौटाने पर सहमति जताई थी.
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर को राजपाल यादव को 5 अक्टूबर तक सरेंडर करने से राहत दी थी. इससे पहले कोर्ट ने कहा था कि उनके व्यवहार से भरोसा नहीं बन रहा है, लेकिन उन्हें आखिरी मौका दिया जा रहा है. एक्टर के वकील ने कोर्ट से दो हफ्ते का समय मांगा था. उन्होंने कहा था कि राजपाल अपनी नीयत साबित करने के लिए 2 करोड़ रुपये जमा करेंगे. वकील ने ये भी बताया था कि वो करीब साढ़े चार महीने जेल में रह चुके हैं और फिल्म इंडस्ट्री के उनके दोस्तों ने उन्हें जमानत दिलाई थी.
कंपनी की तरफ से पेश हुए वकील अजीत सिन्हा ने कहा कि उन्हें सिर्फ अपना पैसा वापस चाहिए, क्योंकि राजपाल यादव ने किए गए वादों को पूरा नहीं किया है. इससे पहले 8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव की याचिका पर नोटिस जारी किया था. कोर्ट ने कहा था कि अगर वो 5 करोड़ रुपये जमा करते हैं, तो उन्हें सरेंडर करने से राहत दी जाएगी.
दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाई थी सजा
इसी साल 10 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने चेक बाउंस के कई मामलों में राजपाल यादव की सजा बरकरार रखी थी. हाईकोर्ट ने उन्हें तीन महीने जेल की सजा सुनाई थी. हाईकोर्ट ने सजा के खिलाफ याचिका दाखिल करने में हुई 1,894 दिनों यानी पांच साल से ज्यादा की देरी को माफ करने से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने एक्टर को सातों मामलों में शिकायत करने वाली कंपनी को 1 करोड़ रुपये से ज्यादा देने का आदेश दिया था.
हालांकि, कोर्ट ने ये भी कहा था कि राजपाल पहले ही करीब 2 करोड़ रुपये दे चुके हैं, जिसे बाकी रकम में एडजस्ट किया जाएगा. हाईकोर्ट ने दो महीने के लिए उनकी सजा पर रोक लगाई थी, ताकि वो इस फैसले के खिलाफ आगे अपील कर सकें. राजपाल की पत्नी राधा राजपाल यादव को भी हर मामले में करीब 5.5 लाख रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया था. जुर्माना ना भरने पर उन्हें तीन महीने की साधारण जेल की सजा काटनी पड़ सकती है.
ये मामला राजपाल और उनकी पत्नी की ओर से दायर की गई उन याचिकाओं से जुड़ा है, जिनमें उन्होंने 2019 के सेशन कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी. सेशन कोर्ट ने अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा सुनाई गई उनकी सजा को बरकरार रखा था. मजिस्ट्रेट कोर्ट ने शुरुआत में राजपाल को छह महीने जेल की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में घटाकर तीन महीने कर दिया गया था.