बॉलीवुड सिंगर नेहा भसीन एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज की वजह से सुर्खियों में हैं. इस बार उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पुलिस की कार्रवाई और हालिया विरोध-प्रदर्शनों को लेकर कई सवाल उठाए हैं. नेहा के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. जहां कुछ लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में यूजर्स उन्हें जमकर ट्रोल भी कर रहे हैं.
नेहा भसीन ने पीएम मोदी के लिए क्या लिखा?
नेहा भसीन ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में कई स्लाइड्स शेयर कीं. पहले पेज में उन्होंने लिखा- अगर हमारे प्रधानमंत्री पुलिस द्वारा प्रदर्शन के दौरान महिलाओं को अनुचित तरीके से छूने की घटनाओं पर भी खुलकर बोलते, तो मैं उनका और ज्यादा सम्मान करती. लेकिन उन्हें गालियों के इस्तेमाल पर ज्यादा आपत्ति है.
दूसरे पेज में उन्होंने लिखा- उन्होंने खुद कहा कि ये बच्चे हैं. लेकिन पुलिस की जिम्मेदारी लोगों की सुरक्षा करना और कानून का पालन करना है. फिर वहां जवाबदेही क्यों नहीं है?
भूमि पर भी साधा निशाना
इसके बाद तीसरी पोस्ट में नेहा ने एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर का नाम लेते हुए लिखा- भूमि पेडनेकर, 'लॉक अप' पर भी सब कुछ स्क्रिप्टेड था और विरोध-प्रदर्शनों को लेकर भी. अगर हिम्मत नहीं है, तो चुप रहना ही बेहतर है, बहन.
नेहा ने पोस्ट के कैप्शन में भी सरकार और व्यवस्था पर सवाल उठाए. उन्होंने लिखा- किशोरों और महिलाओं को डराकर पितृसत्ता और मजबूत होती है. हमेशा की तरह असली मुद्दों की बजाय धर्म या अब 'संस्कार' पर ध्यान दिया जा रहा है, जबकि देश गहरे भ्रष्टाचार और आर्थिक संकट से जूझ रहा है.
आगे उन्होंने कहा- प्रदर्शन के दौरान महिलाओं को कथित तौर पर अनुचित तरीके से छूने और उनके निजी अंगों पर मारने के आरोपों पर पुलिस की जवाबदेही कहां है? क्या यही हमारा संस्कार है? वाह रे वाह... जय हिंद.
सोशल मीडिया पर मची बहस
नेहा भसीन के इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई. कई यूजर्स ने उनके पोस्ट का समर्थन करते हुए पुलिस की जवाबदेही पर सवाल उठाए. वहीं दूसरी ओर, कई लोगों ने नेहा की आलोचना की और कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधकर मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की है.
कुछ यूजर्स ने उन्हें ट्रोल करते हुए कहा कि बिना पूरे तथ्य सामने आए ऐसे बयान देना ठीक नहीं है, जबकि समर्थकों का कहना है कि सार्वजनिक हस्तियों को संवेदनशील मुद्दों पर अपनी राय रखने का अधिकार है.