पिछले एक महीने से रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ ने थिएटर्स में वो गदर काट रखा है कि इसके सामने आना किसी भी फिल्म के लिए घातक साबित हुआ है. मगर इस तूफान में भी एक नए एक्टर की पहली फिल्म अपने पैर जमाने में कामयाब हो गई है. अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा की डेब्यू फिल्म ‘इक्कीस’ बीते शुक्रवार रिलीज हुई.
शहीद अरुण खेत्रपाल की इस बायोपिक में अगस्त्य पहली बार बड़े पर्दे पर आए हैं. वहीं नवंबर में दुनिया से विदा ले चुके बॉलीवुड लेजेंड धर्मेंद्र ‘इक्कीस’ में आखिरी बार बड़े पर्दे पर नजर आ रहे हैं. कई नई फिल्मों को रगड़ देने वाली ‘धुरंधर’ के सामने रिलीज हुई ‘इक्कीस’ ने पहले वीकेंड में बॉक्स ऑफिस पर सॉलिड पकड़ बना ली है.
पहले वीकेंड में दमदार रही ‘इक्कीस’
2026 के पहले ही दिन रिलीज हुई ‘इक्कीस’ सीधे ‘धुरंधर’ के सामने रिलीज हुई. ट्रेड को ‘धुरंधर’ की आंधी में एक और छोटी फिल्म के उड़ जाने का डर था. पर ‘इक्कीस’ ने पहले ही दिन सॉलिड सरप्राइज दिया. डेब्यू कर रहे अगस्त्य की फिल्म ने 7.28 करोड़ की ओपनिंग की. शुक्रवार को साल का पहला वर्किंग डे होने से कमाई थोड़ी गिरी, लेकिन 3.5 करोड़ के सॉलिड लेवल पर रही. शनिवार को जंप के साथ कलेक्शन 4.5 करोड़ तक पहुंच गया.
अब संडे की ट्रेड रिपोर्ट्स बताती हैं कि ‘इक्कीस’ ने चौथे दिन लगभग 5 करोड़ का कलेक्शन किया है. यानी पहले वीकेंड में ‘इक्कीस’ का नेट कलेक्शन कुल 20 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है. करीब महीने भर पुरानी, धमाकेदार ‘धुरंधर’ के मुकाबले कहीं कम स्क्रीन्स पर रिलीज हुई ‘इक्कीस’ का ये कलेक्शन उम्मीदों के मुकाबले काफी दमदार है. खासकर इस वजह से कि ये फिल्म ‘धुरंधर’ से बिल्कुल उलट है.
कैसे ‘धुरंधर’ से उलट है ‘इक्कीस’?
‘धुरंधर’ रियल घटनाओं से प्रेरित फिल्म है, जबकि ‘इक्कीस’ रियल घटना पर ही आधारित है. दोनों ही फिल्मों की कहानी भारत-पाकिस्तान के तनावपूर्ण रिश्तों के बैकग्राउंड पर है लेकिन दोनों का टाइम पीरियड बहुत अलग है. ‘इक्कीस’ 1971 के युद्ध पर बेस्ड है, जब पाकिस्तान भारत के सामने खड़ा होकर लड़ रहा था, पीठ पीछे आतंकी साजिशों के जरिए भारत के साथ प्रॉक्सी वॉर नहीं कर रहा था. जयदीप अहलावत एक पाकिस्तानी ब्रिगेडियर के रोल में हैं, जो युद्ध में अरुण खेत्रपाल के सामने था.
फिल्म की कहानी इस ब्रिगेडियर से अरुण के पिता (धर्मेंद्र) की मुलाकात को एक इमोशनल ड्रामा में बदलती है और युद्धों से बचने का मैसेज देती है. ये युद्ध में कुर्बानी देने वाले जांबाजों और उनके परिवारों की जिंदगी को इमोशनल तरीके से दिखाती है. जबकि ‘धुरंधर’ की कहानी का ट्रिगर सन 2000 के बाद भारत में हुए आतंकी हमले हैं, जिनमें पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद का कनेक्शन था. ये सामने से नजर न आने वाले दुश्मन से निपटने के लिए, परछाइयों में घुल जाने वाले इंडियन स्पाई की कहानी है.
दोनों फिल्मों का तेवर बहुत अलग है— एक का लहजा आग उगलने वाला है, एक का सोचने पर मजबूर करने वाला. नैरेटिव के अलावा कंपोजिशन में भी दोनों फिल्में अलग हैं. ‘धुरंधर’ बड़े नामों और बड़े बजट वाली ग्रैंड फिल्म है, जबकि ‘इक्कीस’ डेब्यू कर रहे एक्टर की, एवरेज बजट में बनी लिमिटेड रिलीज है. इसके बावजूद ‘धुरंधर’ जैसी धमाकेदार फिल्म के सामने ‘इक्कीस’ का टिके रहना बताता है कि जनता ने इसे भी मौका दिया है. एक ही टॉपिक से निकली, दो विपरीत ध्रुवों पर बैठी फिल्मों को दर्शक मिलना इंडियन सिनेमा की जीत है.