आइटम सॉन्ग लंबे वक्त से बॉलीवुड का हिस्सा रहे हैं. फिल्म इंडस्ट्री में बीते कई दशकों में ऐसी पिक्चरें आई हैं, जिनमें एक न एक आइटम नंबर होता ही है. इन सभी में सेम दिक्कत है और वो है महिलाओं को किसी मांस के टुकड़े की तरह ट्रीट करना, विजुअल रूप से भी और लीरिक्स में भी. दिलचस्प बात ये है कि 'आइटम' शब्द भी खुद भारतीय मर्दों के महिलाओं के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले स्लैंग- आइटम से निकला है, जिसका मतलब माना जाता है- सेक्सी औरत.
अश्लीलता से भरे आइटम नंबर
आइटम नंबर्स का फॉर्मूला शुरू से ही सेक्सिस्ट और सक्सेसफुल रहा है. मगर बीते कुछ सालों में हम सभी ने कुछ ऐसे लीरिक्स सुने हैं, जिन्होंने सभी हदों को तोड़ दिया है. पहले इसका सबसे बड़ा उदाहरण करीना कपूर खान स्टारर 'दबंग 2' के गाने 'फेविकोल से' को माना जाता था, लेकिन अब फिल्म 'केडी: द डेविल' के मेकर्स ने और भी निचला स्तर हासिल कर इसे पीछे छोड़ दिया है. जी हां, यहां 'नोरा फतेही' के नए आइटम सॉन्ग 'सरके चुनर तेरी सरके' की बात हो रही है, जिसे सुनकर आपके कानों से अभी तक तो खून आ गया होगा.
कुछ दिन पहले ही रैपर बादशाह के गाने 'टटीरी' को लेकर विवाद हुआ था. इस गाने के वीडियो में स्कूल की बच्चियों को नाचते दिखाया गया. उसपर से भद्दे लीरिक्स. महिला आयोग समेत अन्य लोगों का गुस्सा भड़कना लाजिमी था, जो कि हुआ भी और बादशाह के गाने को डिलीट करवा दिया गया. अब 'सरके चुनर तेरी सरके' के साथ यूजर्स का नया टारगेट नोरा फतेही हैं. उनके साथ वीडियो में संजय दत्त नजर आए हैं तो उन्हें भी खरी-खरी सुनने को मिल रही है.
सही बात है कि नोरा और संजय का डांस, उनके एक्सप्रेशन, बॉडी लैंग्वेज और गाने के पीछे की इंटेन्शन सभी कुछ गलत है. दोनों ही अपनी-अपनी जगह बड़े सितारे हैं, जिन्हें ऐसे गानों और सीन्स को करने से पहले सोचना चाहिए. मगर लीरिक्स का क्या? क्या कोई भी गानों को रिकॉर्ड करने से पहले उनके लीरिक्स नहीं पढ़ रहा है? और अगर पढ़ रहा है तो ये सब अप्रूव कैसे हो जा रहा है? उससे भी बड़ा सवाल ये है कि आखिर ऐसे लीरिक्स लिखने वाले के मन में आ कहां से और कैसे रहे हैं.
भद्दे-वलगर लीरिक्स के पीछे कौन?
'सरके चुनर तेरी सरके' के बारे में आप ये जानते हैं कि इसमें नोरा फतेही हैं और उन्होंने अपना पल्लू गिरा-गिराकर डांस किया है. लेकिन गाने में चलने वाले भद्दे, बेहद भद्दे लीरिक्स को किसने लिखा है ये आप जानते हैं? इन्हें लिखा है रकीब आलम ने. रकीब साउथ इंडस्ट्री के जाने माने लिरिसिस्ट यानी गीतकार हैं. इससे पहले फिल्म 'द पैरडाइस' से उनका लिखा गाना 'आया शेर' रिलीज हुआ था. एक और गाना जिसे रकीब आलम ने लिखा है और आप बहुत अच्छे से जानते हैं वो हैं- 'ऊ अंतावा ऊ ऊ अंतावा'.
'ऊ अंतावा ऊ ऊ अंतावा' गाने की तकलीफ ये थी कि भले ही वो 'मेल गेज' के बारे में था, लेकिन उसमें की गई कोरियोग्राफी और उसके लीरिक्स गाने की थीम को खा रहे थे. कहा गया था कि गाने के लीरिक्स के हिसाब से महिलाएं ऐसा सायरन हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और मर्दों को कंट्रोल करना मुश्किल है. उस गाने को लिखने में भले ही रकीब आलम ने कुछ सोचा हो, लेकिन 'सरके चुनर तेरी सरके' लिखते हुए उनके मन में क्या चल रहा था ये हम भी जानना चाहेंगे. क्योंकि इस गाने के लीरिक्स मुंह से निकालने लायक नहीं हैं.
इन दोनों की तरह सलमान खान की पिक्चर 'दबंग 2' का गाना 'फेविकोल से' भी विवादों में रहा था. इस गाने को म्यूजिक कम्पोजर साजिद-वाजिद ने सिंगर और कम्पोजर अशरफ अली संग मिलकर लिखा था. गाने की एक लाइन जो कोई भुलाए नहीं भूल पाता है, वो है- 'मैं तो तंदूरी मुर्गी हूं यार, घटका ले सैयां एल्कोहॉल से.' अगर ये महिलाओं को ऑब्जेक्टिफाई करना नहीं है तो क्या है? इस गाने को लेकर करीना कपूर को ट्रोल किया गया था. मेकर्स को बातें सुनाई गईं थीं. हम आइटम सॉन्ग में डांस से लेकर लीरिक्स और फील तक के लिए एक्ट्रेसेज को ब्लेम करते हैं. लेकिन कभी किसी ने ध्यान दिया कि ये अश्लील और भद्दे लीरिक्स असल में किसी मेल राइटर की कलम से निकले हैं? इनके लिए एक्ट्रेस नहीं बल्कि वो लिरिसिस्ट ज्यादा जिम्मेदार हैं.
जावेद अख्तर और गुलजार जैसे लिरिसिस्ट भी इस इंडस्ट्री का हिस्सा हैं. उन्होंने भी रोमांटिक गाने, आइटम नंबर और बाकी तरह के गाने लिखे हैं. 'नमक इश्क का' याद हो तो लोगों को समझने में काफी वक्त लगा था कि असल में गुलजार उसमें किसी बारे में बात कर रहे हैं. वो गाना अभद्र बिल्कुल नहीं था. जबकि 'फेविकोल से' के बारे में सिंगर श्रेया घोषाल ने हाल ही में खुलकर बात की है और बताया है कि उन्होंने इसे गाने के ऑफर को ठुकरा दिया था. वजह थी इसके लीरिक्स!
श्रेया ने बताया, 'उस गाने में बहुत ज्यादा ऑब्जेक्टिफिकेशन था. ये इशारों में भी नहीं था. उसमें कहा जा रहा था- चिकन बना के कहा ले और ये लिपटा ले. मैं ये शब्द नहीं कह सकती. मुझे इससे शर्मिंदगी होती है. मैं ये नहीं कर सकती. तो ऐसे कुछ पल थे जब मैंने हाथ जोड़े और मैं निकल गई.'
रैपर बादशाह ने भी 'टटीरी' गाने को खुद लिखा था, जिसके बाद उन्हें अपने शब्दों के लिए माफी मांगनी पड़ी. मगर सवाल अभी भी यही है कि क्या हम महिलाओं को ऑब्जेक्टिफाई करने के या होते देखने के इतने आदि हो गए हैं कि हमने सोचना ही छोड़ दिया है कि हम क्या लिख रहे हैं, क्या गा रहे हैं और ये कहां तक पहुंच रहा है? आज के सोशल मीडिया के जमाने में किसी के लिए भी किसी भी तरह के कंटेंट से बचना बेहद मुश्किल है. हाल ही में क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी ने बताया है कि उन्होंने ए रेटेड यानी अडल्ट ओन्ली फिल्म 'धुरंधर' को न सिर्फ देखा है बल्कि ये उनकी फेवरेट भी है. तो ऐसे गानों से हम यंग जनरेशन को भी क्या सीख दे रहे हैं? अंत में यही कहना ठीक रहेगा कि हमें आइटम नंबर पर नाचने वाली एक्ट्रेसेज के साथ-साथ उन्हें लिखने वाले लिरिसिस्ट पर भी सवाल उठाने चाहिए. लेखकों को तो अपने काम के लिए मिलने वाली तारीफ से खुशी होती है न, तो फिर उनके हिस्सा की आलोचना भी उन्हें मिलनी चाहिए.