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कांग्रेस से सीटों के बंटवारे और राहुल गांधी की पीएम उम्मीदवारी पर TDP ने नहीं खोले पत्ते

Andhra Pradesh CM N. Chandrababu Naidu  के बेटे और राज्य के आईटी मंत्री नारा लोकेश का सीटों के बंटवारे के सवाल पर कहना है- मैं समझता हूं कि अभी दोनों पार्टियां इस पर विचार कर रही हैं, आप जानते हैं वक्त ही बताएगा.  युवा टीडीपी नेता के मुताबिक दोनों पार्टियों का एक समान उद्देश्य है और वो है आम चुनाव से पहले बीजेपी की अगुआई वाले एनडीए के खिलाफ राष्ट्रीय विकल्प बनाना.

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आंध्र प्रदेश के CM एन चंद्रबाबू नायडू और राहुल गांधी (फाइल, ANI)
आंध्र प्रदेश के CM एन चंद्रबाबू नायडू और राहुल गांधी (फाइल, ANI)

कांग्रेस की क्षेत्रीय दलों को मिलाकर महागठबंधन बनाने की कोशिशें परवान चढ़ना बहुत कुछ दक्षिण में इसकी संभावित सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के रुख पर निर्भर करता है. लेकिन टीडीपी के खुल कर अपने पत्ते नहीं दिखाने से कांग्रेस की कोशिशों का नतीजा अभी अधर में नजर आता है. लोकसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे को लेकर टीडीपी अभी खुल कर कुछ बताने से परहेज कर रही है.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के बेटे और राज्य के आईटी मंत्री नारा लोकेश का सीटों के बंटवारे के सवाल पर कहना है- 'मैं समझता हूं कि अभी दोनों पार्टियां इस पर विचार कर रही हैं, आप जानते हैं (सिर्फ) वक्त ही बताएगा.'  

लोकेश ने ये टिप्पणी दावोस (स्विट्जरलैंड) में एक इंटरव्यू के दौरान की. लोकेश वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में हिस्सा लेने के लिए दावोस आए हुए हैं. टीडीपी नेता लोकेश से पूछा गया था कि क्या यूपी में बीएसपी-एसपी की तर्ज पर कांग्रेस और टीडीपी भी 2019 लोकसभा चुनाव मिल कर लड़ेंगे? या राज्य स्तर पर अलग-अलग लड़ेंगे.

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लोकेश से जब पूछा गया कि क्या वे आंध्र प्रदेश में कांग्रेस के साथ सीटों के समझौते को लेकर आश्वस्त हैं? इस पर लोकेश ने कहा- 'ये सब खुला है.' हालांकि लोकेश ने साथ ही जोर देकर कहा कि चुनाव कार्यक्रम के एलान के बाद ही सीटों के बंटवारे पर गहराई से विचार होगा.

लोकेश ने कहा, 'मैं समझता हूं कि अब भी ये बहुत जल्दी है. हम उम्मीद कर रहे हैं कि चुनाव आचार संहिता मार्च के पहले हफ्ते में लागू होगी. उसी के बाद हम वास्तव में सीटों और गठबंधनों पर बात करेंगे. अभी हम ऐसे विचार-विमर्श से 45 दिन दूर हैं.'

युवा टीडीपी नेता के मुताबिक दोनों पार्टियों का एक समान उद्देश्य है और वो है आम चुनाव से पहले बीजेपी की अगुआई वाले एनडीए के खिलाफ राष्ट्रीय विकल्प बनाना. लोकेश ने कहा, 'राष्ट्रीय तौर पर हम बहुत स्पष्ट हैं. मैं समझता हूं कि हम साथ काम कर रहे हैं और अब पूरा विकल्प मजबूत आकार लेता जा रहा है.' लोकेश ने इस संदर्भ में कोलकाता में 19 जनवरी को हुई रैली में विपक्ष के शक्ति प्रदर्शन का हवाला दिया. लोकेश ने कहा, 'पश्चिम बंगाल का हालिया कार्यक्रम इस बात पर काफी साफ था कि भारत की राजनीति में क्या बदलाव होने जा रहा है.'  

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लोकेश ने चंद्रबाबू नायडू के इस रुख को दोहराया कि लोकतांत्रिक संस्थानों को लेकर चिंताओं ने विपक्षी दलों को साथ आने के लिए प्रेरित किया. युवा टीडीपी नेता ने कहा, 'सभी लोकतांत्रिक संस्थानों को नष्ट कर दिया गया है. सीबीआई हो या आरबीआई, अब वो गलत दिशा में बढ़ रहे हैं. एक राज्य के नाते हम मानते हैं कि बदलाव की आवश्यकता है. लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए सकारात्मक संवाद चाहिए जो संघीय (केंद्रीय) स्तर पर आज मौजूद नहीं है. इसे बनाने की आवश्यकता है.'

पीएम के लिए राहुल गांधी पर सीधा जवाब नहीं

क्या उनकी पार्टी टीडीपी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को विपक्ष के पीएम उम्मीदवार के तौर पर किसी क्षेत्रीय नेता पर तरजीह देगी? इस सवाल पर आंध्र प्रदेश के युवा मंत्री ने सीधा जवाब देने की जगह कहा, 'मैं समझता हूं कि ये सब अभी बहुत जल्दी है. मेरा पक्का मानना है कि मजबूत राज्यों का मतलब मजबूत राष्ट्र होता है. हमने अतीत में ये देखा है.'  

लोकेश ने साथ ही वाजपेयी सरकार के दौरान मजबूत गठबंधन का हवाला दिया. उन्होंने कहा, 'अगर आप तत्कालीन वाजपेयी सरकार की विकास दरों को देखें, तो ये मौजूदा सरकार से (विकास दरों से) कहीं ज़्यादा थीं.'

'कांग्रेस-विरोधी नहीं टीडीपी'  

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लोकेश ने ऐसी धारणाओं से असहमति जताई कि टीडीपी को हमेशा कांग्रेसवाद के विरोध का दूसरा नाम कहा जाता रहा है. लोकेश ने कहा, 'टीडीपी का समूचा विचार कांग्रेस-विरोधी नहीं है. ये राज्य में संघीय सरकार की भूमिका के खिलाफ है.'लोकेश ने आरोप लगाया कि पहले के राज्यपालों का इस्तेमाल मुख्यमंत्रियों को हटाने के लिए किया जाता रहा. वही सब अब बीजेपी के साथ भी देखा जा रहा है.

'पीएम की दौड़ में नहीं चंद्रबाबू नायडू'

लोकेश ने एनडीए के खिलाफ प्रस्तावित महागठंबधन की ओर से पीएम उम्मीदवार के तौर पर अपने पिता (चंद्रबाबू नायडू) के दावेदार होने की संभावना से इनकार किया.

लोकेश ने कहा, 'चंद्रबाबू नायडू हमेशा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहेंगे. नया राज्य (बंटवारे के बाद) होने की वजह से हमारे सामने कई चुनौतियां हैं. हम लंबा रास्ता तय कर चुके हैं. हमने राज्य में बहुत अहम काम किया है. ये तो अभी शुरूआत है.'

युवा टीडीपी नेता से जब फिर उनके पिता की प्रधानमंत्री पद के लिए आकांक्षाओं के बारे में पूछा गया तो उन्होंने ज़ोर देकर कहा- 'ऐसा बिल्कुल नहीं.'

आंध्र में विपक्ष से TDP को कोई चुनौती नहीं

लोकेश ने इस बात से इनकार किया कि आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ टीडीपी को सत्ता विरोधी रुझान (एंटी इंकम्बेंसी) का सामना है. लोकेश के मुताबिक राज्य के लोग नायडू सरकार से संतुष्ट है. लोकेश ने कहा, 'हमने अपना सर्वे कराया है और हम समझते हैं कि हम बहुत मजबूत हैं. हमें किसी चुनौती का सामना नहीं है.'

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लोकेश ने टीआरएस और वाईएसआर कांग्रेस के बीच आंध्र प्रदेश में 42 लोकसभा सीटों के लिए गठबंधन की संभावना को हल्के में लेते हुए कहा, 'टीआरएस का गठन आंध्र प्रदेश राज्य के खिलाफ हुआ था. वो भारत सरकार के सामने आंध्र प्रदेश राज्य के विरोध में पहुंचे थे. अब वो ये आकर दावा नहीं कर सकते कि वो मिलकर बदलाव लाएंगे और 42 सीटों का बड़ा ब्लॉक बनाएंगे.'

लोकेश ने वाईएसआर कांग्रेस नेता जगन मोहन रेड्डी पर बीजेपी से पर्दे के पीछे से साठगांठ का आरोप लगाया. लोकेश के मुताबिक रेड्डी ने राज्य में अपनी हालिया यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बार भी आलोचना नहीं की.

युवा टीडीपी नेता ने कहा, 'आंध्र प्रदेश राज्य को बंटवारे के प्लान के तहत विशेष दर्जा प्रदान करने की गारंटी दी गई थी, जो कि अर्से से लंबित है.'

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