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पालमः बीजेपी के गढ़ में AAP की दस्तक, कांग्रेस को मिली थी एक बार जीत

Delhi Election 2020 दिल्ली की पालम विधानसभा सीट 2015 से पहले उन सीटों में शामिल थी जहां कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच सीधा मुकाबला होता था. हालांकि मुकाबला भले ही इन दो दलों के बीच रहा हो, लेकिन कांग्रेस को सिर्फ एक बार जीत मिली.

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Delhi Vidhan Sabha Election 2020 Delhi Vidhan Sabha Election 2020

  • पालम सीट पर बीजेपी-कांग्रेस के बीच रही है टक्कर
  • ज्यादातर बार जीत हासिल में बीजेपी ने बाजी मारी बारी

दिल्ली की पालम विधानसभा सीट की गिनती 2015 से पहले उन सीटों में होती रही है, जहां मुकाबला कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच होता था. हालांकि ये बात भी है कि मुकाबला भले ही इन दो दलों के बीच रहा हो, लेकिन ज्यादातर बार जीत हासिल करने के मामले में बीजेपी ने बाजी मारी.

असल में, 1991 में संविधान संशोधन करके दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र घोषित किया गया. नए परिसीमन के बाद विधानसभा का 1993 में गठन हुआ.1991 में 69वें संविधान संशोधन के अनुसार दिल्ली को 70 सदस्यों की एक विधानसभा दी गई. इनमें एक विधानसभा क्षेत्र पालम भी है.

यदि 1993 से चुनावी इतिहास देखें तो पालम विधानसभा सीट पर कांग्रेस को सिर्फ एक बार सफलता मिली है. 1993 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के धरम देव सोलंकी जीते. 1998 का ही एक मात्र चुनाव है जिसमें यहां से कांग्रेस को जीत मिली और महेंद्र यादव विधानसभा के लिए चुने गए. इसके बाद 2003, 2008 और 2013 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के टिकट पर धरम देव सोलंकी लगातार जीत हासिल करते रहे.

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इस सीट पर सियासी तस्वीर 2015 में बदली, जब आम आदमी पार्टी की भावना गौड़ विधायक चुनी गईं. दिल्ली विधानसभा की सभी सीटों की तरह पालम में भी मुकालबा कांग्रेस और बीजेपी के बीच हुआ करता था, लेकिन 2013 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी के मैदान में आने के बाद मुकाबले में एक तीसरे दल ने दस्तक दी.

पालम विधानसभा सीट की तस्वीर

पालम विधानसभा सीट के तहत आने वाली कुल आबादी में अनुसूचित जाति का अनुपात 10.85 फीसदी है. मतदाता सूची 2019 के मुताबिक यहां 2,39,360 मतदाता 232 पोलिंग केंद्रों पर मतदान करेंगे. 2015 के विधानसभा चुनावों में यहां 65.01% वोटिंग हुई. इसमें बीजेपी, कांग्रेस, और आम आदमी पार्टी को क्रमशः 35.07%, 7.13% और 55.96% वोट मिले.

विधानसभा चुनाव 2015

भावना गौड़ (आम आदमी पार्टी)- 82,637(55.96%)

धरम देव सोलंकी (बीजेपी)- 51,788(35.06%)

मदन मोहन (कांग्रेस)- 10,529(7.13%)

विधानसभा चुनाव 2013

धरम देव सोलंकी (बीजेपी)- 42,833(33.30%)

भावना गौड़ (आम आदमी पार्टी)- 34,661(26.79%)

मदन मोहन (बसपा)- 24,862(19.33%)

2013-2015 में क्या थी चुनावी स्थिति

बहरहाल, दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक एवं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के समक्ष अपना सबसे मजबूत किला बचाने की प्रबल चुनौती है.

पिछले विधानसभा चुनाव में दिल्ली विधानसभा की 70 में से 67 सीटें जीतने वाले केजरीवाल का जादू इस बार चलेगा या नहीं इस पर पूरे देश की निगाहें हैं. केजरीवाल अपने पांच वर्ष के कार्यकाल के दौरान विशेषकर स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों को गिनाते हुए इस बार भी पूरे आत्मविश्वास में हैं जबकि राजनीतिक पंडितों का मानना है कि पिछला करिश्मा दोहराना मुश्किल नजर आ रहा है.

वर्ष 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले ही ‘AAP’ का गठन हुआ था और उस चुनाव में दिल्ली में पहली बार त्रिकोणीय संघर्ष हुआ जिसमें 15 वर्ष से सत्ता पर काबिज कांग्रेस 70 में से केवल आठ सीटें जीत पाई जबकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार बनाने से केवल चार कदम दूर अर्थात 32 सीटों पर अटक गई. ‘आप’ को 28 सीटें मिली और शेष दो अन्य के खाते में रहीं.

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बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के प्रयास में कांग्रेस ने ‘AAP’ को समर्थन दिया और केजरीवाल ने सरकार बनाई. लोकपाल को लेकर दोनों पार्टियों के बीच ठन गई और केजरीवाल ने 49 दिन पुरानी सरकार से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगा और फरवरी 2015 में ‘AAP’ने सभी राजनीतिक पंडितों के अनुमानों को झुठलाते हुए 70 में से 67 सीटें जीतीं. बीजेपी तीन पर सिमट गई जबकि कांग्रेस की झोली पूरी तरह खाली रह गई.    

वोटिंग और मतगणना कब?

दिल्ली की पहली विधानसभा का गठन 1993 में हुआ था और इस बार यहां पर सातवां विधानसभा चुनाव कराया जा रहा है. इससे पहले राजधानी दिल्ली में मंत्रीपरिषद हुआ करती थी. दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा में इस बार महज एक चरण में मतदान हो रहा है. 8 फरवरी को वोट डाले जाएंगे जबकि 11 फरवरी को मतगणना होगी. छठी दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल 22 फरवरी 2020 को समाप्त हो जाएगा.

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