तृणमूल कांग्रेस के संकटमोचक कहे जाने वाले प्रवक्ता कुणाल घोष को पार्टी ने उत्तर कोलकाता की बेलेघाटा विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा है, जहां से वह अपना चुनावी डेब्यू करने जा रहे हैं. टीएमसी ने उन्हें बेलेघाटा सीट से मौजूदा विधायक परेश पाल की जगह टिकट दिया है, क्योंकि पाल लंबे वक्त से बीमार चल रहे हैं.
वहीं, बेलेघाटा से टिकट मिलने के बाद कुणाल घोष ने पार्टी नेतृत्व का आभार जताते हुए खुशी व्यक्त की. उन्होंने इंडिया टुडे-आजतक से खास बातचीत में बीजेपी को बंगाल की अस्मिता का विरोधी बताया है. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी वैध नागरिकों को गिरफ्तार कर रही है और मतदाता सूची से नाम हटा रही है.
'कभी नहीं छोड़ा पार्टी का साथ'
चुनाव प्रचार के दौरान कुणाल घोष ने जेल के दिनों और पार्टी से मतभेदों पर भी खुलकर बात की. उन्होंने 'आजतक' से बातचीत में कहा कि उन्होंने कभी-भी अपनी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा.
घोष के अनुसार, जिस वक्त उनके नेतृत्व के साथ मतभेद थे, तब भी उन्होंने ईमानदारी और निष्ठा से पार्टी के लिए काम किया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वफादारी का ये पाठ उन्हें बीजेपी से सीखने की जरूरत नहीं है.
शुभेंद्र और हिमंता पर साधा निशाना
इसके अलावा घोष ने विपक्षी नेता शुभेंदु अधिकारी और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर निशाना साधते हुए उन्हें भ्रष्ट करार दिया.
उन्होंने कहा कि बीजेपी ने असम से लेकर महाराष्ट्र तक उन्हीं लोगों को अपने घेमे में कर लिया है, जिन पर उसने खुद कभी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे.
बंगाल में होगी बीजेपी की हार
बेलेघाटा के चुनावी रण में कुणाल घोष खुद को ममता बनर्जी के प्रतिनिधि के रूप में पेश कर रहे हैं. उनका मानना है कि जनता विकास के आधार पर वोट देगी. उन्होंने लोगों से अपील की कि वो वर्तमान बंगाल की तुलना वाममोर्चा के शासन और देश के अन्य राज्यों से करें. घोष को पूरा भरोसा है कि बीजेपी की बंगाल में करारी हार का सामना करना पड़ेगा और ममता दीदी का शासन जारी रहेगा.
आपको बता दें कि कुणाल घोष एक जाने-माने पत्रकार, लेखक और पूर्व राज्यसभा सांसद रह चुके हैं. हाल ही में उन्होंने अभिनेता के रूप में फिल्म डेब्यू भी किया है और कई फिल्में उनकी पाइपलाइन में हैं. उनका राजनीतिक करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा है. शारदा घोटाले से जुड़े आरोपों के बाद उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था. सीबीआई ने इस मामले की जांच की थी.
जेल में आत्महत्या का प्रयास
2014 में जेल में उन्होंने आत्महत्या का प्रयास किया था और उस वक्त उन्होंने कहा था कि ममता बनर्जी शारदा घोटाले की सबसे बड़ी लाभार्थी हैं. अक्टूबर 2016 में करीब तीन साल जेल में रहने के बाद वे जमानत पर रिहा हुए थे और और अब पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं.