पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी चुनावी रणनीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए कई संन्यासियों, महंतों और पुजारियों को उम्मीदवार बनाया है. पार्टी का लक्ष्य अपने उम्मीदवारों के आध्यात्मिक प्रभाव का लाभ उठाकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खिलाफ चुनावी संभावनाओं को मजबूत करना है.
योगी मॉडल की तर्ज पर 'आध्यात्मिक' नेतृत्व
धार्मिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को उतारना भाजपा की कोई नई रणनीति नहीं है. हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसका सबसे बड़ा उदाहरण रहे हैं. अब इसी राह पर चलते हुए भाजपा ने बंगाल के विभिन्न मठों और मंदिरों से जुड़े उन चेहरों को मौका दिया है, जिन्हें उनके आध्यात्मिक समुदायों में 'महाराज' के रूप में जाना जाता है. ये हस्तियां लंबे समय से धार्मिक नेतृत्व के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर भक्तों से जुड़ी रही हैं.
प्रमुख उम्मीदवार और उनके चुनावी क्षेत्र
कालीगंज (उत्पल महाराज): भाजपा ने यहां से 42 वर्षीय सन्यासी उत्पल महाराज को टिकट दिया है. उन्होंने मौजूदा विधायक सौमेन रॉय की जगह ली है. उत्पल महाराज पहले कालीगंज में भारत सेवाश्रम संघ के प्रमुख थे. नामांकन के बाद उन्होंने संघ से इस्तीफा देने की घोषणा की, जिसके अगले ही दिन भारत सेवाश्रम संघ ने उन्हें निलंबित कर दिया. वह टीएमसी के निताई बैश्य के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे.
उलुबेरिया दक्षिण (स्वामी मंगलानंद पुरी): भाजपा नेता और सन्यासी स्वामी मंगलानंद पुरी को इस महत्वपूर्ण सीट की जिम्मेदारी दी गई है. उनका मुकाबला टीएमसी के मौजूदा विधायक पुलक रॉय से है. स्वामी जी को पिछले चुनाव के 27,000 वोटों के अंतर को पाटने की कठिन चुनौती दी गई है.
नवद्वीप (श्रुति शेखर गोस्वामी): भाजपा ने यहां के प्रतिष्ठित श्री श्री राधा सुदर्शन लाल जीयू मंदिर के पुजारी श्रुति शेखर गोस्वामी को उम्मीदवार बनाया है. उनकी उम्मीदवारी से कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है. गोस्वामी का मुकाबला पांच बार के विधायक पुंडरीकाक्ष साहा से है. पार्टी यहां धार्मिक भावनाओं से प्रेरित 9 प्रतिशत वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है.
बेहाला पूर्व (सुनील महाराज): शिव सोंग सेवा संघ के सन्यासी सुनील महाराज को इस सीट से उतारा गया है. उनका मुकाबला टीएमसी के सुभाशीष चक्रवर्ती से है, जिन्होंने रत्ना चटर्जी की जगह ली है. भाजपा यहां 40,000 वोटों के बड़े अंतर को महाराज के सेवा भाव के जरिए कम करना चाहती है.
हासन (निखिल बनर्जी): बीरभूम के ऐतिहासिक तारापीठ मंदिर के पुजारी निखिल बनर्जी को भाजपा ने टिकट दिया है. वह टीएमसी के बाहुबली नेता काजल शेख के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे. इस सीट पर भाजपा टीएमसी से 51,000 वोटों के भारी अंतर से पीछे है.
इन सभी आध्यात्मिक दिग्गजों और राजनीतिक रसूखदारों के भाग्य का फैसला 4 मई को चुनाव परिणामों की घोषणा के साथ होगा. यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा का यह धार्मिक प्रयोग बंगाल की सत्ता की चाबी दिलाने में कितना सफल रहता है.