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संभल में 'बर्क बनाम नवाब' में छिड़ी जंग, अखिलेश के लिए बनी टेंशन, सपा कैसे बनाएगी बैलेंस

उत्तर प्रदेश की मुस्लिम बहुल मानी जाने वाली संभल विधानसभा सीट पर सपा के दो दिग्गज नेता टिकट की दावेदारी कर रहे हैं. एक तरफ मौजूदा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के पिता हैं तो दूसरी तरफ मौजूदा विधायक नवाब इकबाल महमूद. ऐसे में बर्क बनाम नवाब की लड़ाई सपा प्रमुख अखिलेश के लिए सियासी टेंशन बन गई है.

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संभल में अखिलेश यादव कैसे बनाएंगे बर्क और नवाब में बैलेंस (Photo-ITG)
संभल में अखिलेश यादव कैसे बनाएंगे बर्क और नवाब में बैलेंस (Photo-ITG)

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव भले ही एक साल के बाद है, लेकिन सियासी दांव पेच अभी से ही चले जाने लगे हैं. हिंसा से संभल अभी उभर भी नहीं पाया था कि 'बर्क बनाम नवाब' की सियासी अदावत फिर से छिड़ गई है. संभाल के सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के पिता ममलूकुर्रहमान बर्क ने 2027 के विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर सियासी हलचल मचा दिया है. साथ ही मौजूदा संभल के विधायक नवाब इकबाल महमूद के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है. 

संभल विधानसभा सीट पर लगातार सात बार से नवाब इकबाल महमूद विधायक हैं. नवाब इस बार अपने बेटे सुहेल इकबाल को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रखी है, लेकिन जियाउर्रहमान के पिता मौलाना ममलूकुर्रहमान की दावेदारी अखिलेश यादव के लिए सियासी टेंशन बन सकती है. यही नहीं संभल के दोनों ही नेता बड़े ताकतवर माने जाते हैं और सपा के दोनों ही अहम हैं. ऐसे में देखना है कि अखिलेश यादव कैसे संभल में सियासी बैलेंस बनाते हैं? 

संभल सीट पर बर्क ने ठोकी दावेदारी
सपा सांसद जियाउर्रहमान के पिता मौलाना ममलूकुर्रहमान बर्क ने संभाल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. साथ ही उन्होंने मौजूदा विधायक नवाब इकबाल महमूद के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है. साथ ही कहा कि वे समाजवादी पार्टी में हैं और उन्हें पूरा भरोसा है कि सपा से विधानसभा टिकट उन्हें ही मिलेगा, क्योंकि संभल की आवाम उनके साथ है. 

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मौलाना ममलूकुर्रहमान के पिता शकीफुर्रहमान कई बार सांसद रहे चुके हैं और मौजूदा समय में उनके बेटे विधायक हैं. ऐसे में संभल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान कर सपा की सियासी टेंशन बढ़ा दी है, क्योंकि इस सीट से मौजूदा विधायक नवाब इकबाल महमूद भी प्रमुख रूप से दावेदार हैं. 

नवाब के खिलाफ बर्क ने फूंका बिगुल
विधायक नवाब इकबाल  महमूद के बेटे सुहेल इकबाल द्वारा टिकट की दावेदारी पर उन्होंने कहा कि दावा कोई भी कर सकता है, लेकिन असली फैसला वक्त करता है. किसी ऐसे वैसे को पार्टी टिकट दे देगी तो क्या हम जिता देंगे. उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में टिकट और नुमाइंदगी उसी को मिलनी चाहिए, जो जनता की आवाज सही तरीके से उठा सके और उनके हक की लड़ाई लड़े.

 नवाब इकबाल का नाम लिए बगैर बर्क ने कहा कि जिनको वर्षों से विधायक बनाया गया, वो संभल में क्या कुछ खास काम किए हैं.  संभल की जनता उनसे नाराज है और विधायकी की सारी जानकारी सपा प्रमुख अखिलेश यादव के संज्ञान में है. राजनीति में यह नहीं देखा जाता कि किससे रिश्ते अच्छे हैं या कौन किसका बेटा या रिश्तेदार है. उन्होंने कहा कि अब ऐसा नहीं हो होगा कि किसी भी ऐरा-गैरा नत्थू-गैरा को विधायक बना दिया जाए. 

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वहीं, सांसद जियाउर्रहमान बर्क के पिता मौलाना ममलूकुर्रहमान बर्क द्वारा चुनाव लड़ने के एलान को लेकर संभल विधानसभा के मौजूदा सपा के विधायक इकबाल महमूद ने कहा कि पहले तो इस संबंध उनसे पूछा जाएं कि वो, सपा में हैं? अगर, पार्टी ने उनके अलावा किसी को टिकट दिया तो क्या वह चुनाव लड़ाएंगे, बाकी पार्टी जो निर्णय करेगी, वो, मान्य होगा?

नवाब बनाम बर्क की सियासी अदावत
संभल में नवाब इकबाल महमूद और बर्क परिवार में सियासी अदावत लंबे समय से चली आ रही है. दोनों के राजनीतिक रिश्ते जगजाहिर हैं. ऐसे में शफीकुर्रहमान बर्क के जिंदा रहते हुए देखा जा चुका है. नवाब इकबाल महमूद के खिलाफ ममलूकुर्रहमान बर्क और जियाउर्रहमान बर्क तक विधानसभा चुनाव लड़कर देख चुके हैं, लेकिन सियासी मात नहीं दे सके. यह अदावत नब्बे के दशक से चली आ रही है, संभल की सियासत पूरी तरह से बर्क और नवाब के बीच बंटी हुई है. 

मुलायम सिंह के दौर से लेकर अखिलेश यादव तक संभल विधानसभा चुनाव का टिकट नवाब इकबाल महमूद को ही मिलता रहा है तो लोकसभा चुनाव बर्क परिवार को मिलता रहा. पहले शफीकुर्रहमान बर्क और उनके निधन के बाद जियाउर्रहमान बर्क को सपा ने संभल से चुनाव में उतारा और दादा-पोते दोनों ही जीतने में कामयाब रहे, लेकिन विधानसभा में नवाब इकबाल सियासी बाजी मारते रहे हैं. एक-दूसरे को सियासी मात देने के लिए हर दांव दोनों ही परिवार आजमाने से पीछे भी नहीं हटते और फिर एक बार आमने-सामने खड़े नजर आ रहे हैं. 

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संभल बना अखिलेश के लिए सियासी टेंशन
संभल में योगी आदित्यनाथ के सियासी प्रयोग पहले ही अखिलेश यादव के लिए चिंता का सबब बना हुआ है और अब नवाब इकबाल महमूद और ममलूकुर्रहमान बर्क के बीच सियासी तलवार खिंच गई है. मुस्लिम बहुल संभल सीट पर नवाब इकबाल और बर्क परिवार दोनों का अपना-अपना सियासी दबदबा है. संभल हिंसा के बाद से जियाउर्रहमान बर्क सपा की मुस्लिम सियासत के युवा चेहरा बनकर उभरे हैं और अखिलेश यादव के करीबी नेताओं को उन्हें गिना जाने लगा है.

वहीं, नवाब इकबाल महमूद सा के पूराने नेता हैं और मुलायम सिंह से लेकर अखिलेश यादव की कैबिनेट का हिस्सा रहे हैं. सात बार से संभल के विधायक हैं और उनकी अपनी संभल में राजनीतिक पकड़ है. ऐसे में नवाब इकबाल महमूद और बर्क परिवार के सियासी अदावत सपा प्रमुख अखिलेश यादव के लिए सियासी टेंशन बन गई है, क्योंकि इनकी लड़ाई का असर दूसरी सीटों पर भी पड़ेगा. 

सपा कैसे बनाएगी राजनीतिक बैलेंस
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के लिए 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नवाब इकबाल महमूद और बर्क परिवार के बीच सियासी बैलेंस बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है. नवाब इकबाल महमूद सियासी वारिस के तौर पर अपने बेटे को लांच करने की तैयार में है तो जियाउर्रहमान के सांसद बनने के बाद उनके पिता की नजर विधायक बनने पर है. 

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संभल में नवाब इकबाल और बर्क परिवार दोनों का अपना सियासी आधार है. ऐसे में टिकट इन्हीं दोनों में से किसी एक को मिलना है. संभल सीट सपा की परंपरागत सीट मानी जाती है और मुस्लिम बहुल वोटर होने के चलते सुरक्षित भी मानी जाती है. नवाब और बर्क के बीच जिस तरह बयान बाजी हो रही है, उससे उनके बीच सियासी संतुलन बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है. ऐसे में देखना है कि अखिलेश क्या रास्ता निकालते हैं?

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