पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन सियासत अभी से गर्म हो गई है. सवाल यह है कि BJP और SAD (शिरोमणी अकाली दल) मिलकर चुनाव लड़ेंगे या नहीं. इस पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने साफ कह दिया कि BJP किसी की 'छोटी पार्टी' नहीं बनेगी. यानी अगर गठबंधन होगा भी तो BJP 'बड़े भाई' की भूमिका में रहेगी, छोटे भाई की नहीं.
BJP और SAD पंजाब में लंबे समय तक साथ मिलकर चुनाव लड़ते थे. SAD को सिख वोटों का समर्थन मिलता था और BJP को हिंदू वोटों का. दोनों मिलकर अच्छी ताकत बनाते थे. लेकिन 2020 में रिश्ता टूट गया.
रिश्ता क्यों टूटा?
2020 में केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानून लाए. किसानों ने इन कानूनों का जोरदार विरोध किया. खासकर पंजाब के किसानों ने. SAD पंजाब की पार्टी है, तो उसे किसानों की नाराजगी का डर था. इसलिए SAD ने BJP का साथ छोड़ दिया और NDA से बाहर निकल गया. बाद में वो कृषि कानून वापस भी हुए, लेकिन तब तक दोनों पार्टियों के रास्ते अलग हो चुके थे.
2022 में क्या हुआ?
अलग-अलग लड़ने का नतीजा बुरा रहा. BJP सिर्फ 2 सीटें जीत पाई. SAD का तो और बुरा हाल हुआ. सिर्फ 3 सीटें मिलीं, जो उसका अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन था. दोनों को समझ आ गया कि अकेले लड़ना महंगा पड़ता है.
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तो अब गठबंधन की बात क्यों चल रही है?
2027 के चुनाव नजदीक आ रहे हैं. दोनों पार्टियों को 2022 की हार याद है. इसलिए यह अटकलें लग रही हैं कि शायद दोनों फिर साथ आ जाएं. SAD के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल से जब इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने साफ कहा कि वो अभी सिर्फ अपनी पार्टी को मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं. यानी उन्होंने न हां कहा, न ना.
BJP का क्या रुख है?
BJP के कई बड़े नेता. जैसे गृह मंत्री अमित शाह पहले ही कह चुके हैं कि BJP पंजाब की सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी.
शनिवार को लुधियाना में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने और सख्त शब्दों में कहा, "BJP दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है. अगर कोई सोचता है कि गठबंधन करके हमें छोटा भाई बना देंगे, तो ऐसा नहीं होगा." यानी BJP अगर गठबंधन करती है, तो बड़े भाई की हैसियत से न कि किसी दूसरी पार्टी के नीचे.
अमृतसर में दूसरे मंत्री का क्या कहना था?
अमृतसर में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल से SAD के साथ गठबंधन के बारे में पूछा गया. उन्होंने कहा, "यह नीति का मामला है. पार्टी की केंद्रीय नेतृत्व बैठेगा और तय करेगा. और रणनीति ऐसी चीज है जो तय होने से पहले बताई नहीं जाती."
उन्होंने यह भी कहा कि BJP अकेले भी जीत सकती है. हरियाणा 2014 का उदाहरण दिया, जहां BJP ने अकेले बहुमत पाया था. पश्चिम बंगाल का जिक्र भी किया जहां BJP ने 207 सीटें जीती थीं. लेकिन साथ यह भी जोड़ा कि अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा देश और राज्य के हित को देखते हुए.