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Vastu Tips For Debt: मोटी कमाई के बावजूद बढ़ रहा कर्ज, घर की उत्तर दिशा से तुरंत हटाएं ये चीजें

यदि आपके घर में पैसा नहीं टिक रहा और मोटी कमाई के बावजूद सिर पर कर्जों का भार बढ़ता ही जा रही है तो घर का वास्तु दोष इसकी वजह हो सकता है. नौकरीपेशा और व्यापारी दोनों ही इससे परेशान हो सकते हैं.

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घर, दुकान या कार्यालय की कुछ दिशाओं में हुई गलतियां हमारी आर्थिक स्थिति पर बुरा असर डालती हैं. (Photo: ITG)
घर, दुकान या कार्यालय की कुछ दिशाओं में हुई गलतियां हमारी आर्थिक स्थिति पर बुरा असर डालती हैं. (Photo: ITG)

अच्छी कमाई के बावजूद अगर घर में पैसा नहीं टिक रहा और कर्ज लगातार बढ़ रहा है तो घर का वास्तु दोष इसके पीछे की वजह हो सकता है. नौकरीपेशा और व्यापारी दोनों ही इससे परेशान हो सकते हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार घर, दुकान या कार्यालय की कुछ दिशाओं में हुई गलतियां हमारी आर्थिक स्थिति पर बुरा असर डालती हैं. ऐसे में समय रहते इन दोषों की पहचान कर उन्हें दूर करना जरूरी है.

घर की उत्तर दिशा
वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा माना गया है. इस दिशा का संबंध धन और समृद्धि से जोड़ा जाता है. यदि उत्तर दिशा में भारी फर्नीचर, कबाड़, गंदगी या अनावश्यक सामान रखा हो, तो इसे शुभ नहीं माना जाता. इस दिशा को यथासंभव खुला, साफ और हल्का रखने की सलाह दी जाती है.

यदि उत्तर दिशा में टॉयलेट, स्टोर रूम या कोई बड़ा अवरोध बना हो तो इससे वास्तु दोष पैदा होता है. इसके अलावा, इस दिशा की दीवारों पर बहुत भारी वस्तुएं टांगने या लाल रंग का अधिक प्रयोग करने से भी बचना चाहिए. दीवारों का प्लास्टर ठीक होना और साफ-सुथरा वातावरण बनाए रखना बेहतर माना जाता है.

उत्तर दिशा का ऊंचा होना
वास्तु के अनुसार, यदि घर की उत्तर दिशा अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक ऊंची हो या निर्माण के दौरान इस दिशा को पूरी तरह बंद कर दिया जाए तो भी धन के प्रवाह में रुकावट आ सकती है. कई लोग अतिरिक्त जगह बनाने के लिए उत्तर दिशा को कवर कर देते हैं, जिसे वास्तु की दृष्टि से उचित नहीं माना जाता.

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दक्षिण-पश्चिम दिशा में पानी रखना
दक्षिण-पश्चिम दिशा को स्थिरता की दिशा माना जाता है. यदि इस हिस्से में अंडरग्राउंड पानी का टैंक, बेसमेंट या जमीन अधिक नीची हो तो आर्थिक अस्थिरता और धन की कमी बनी रह सकती है. इस दिशा को मजबूत और ऊंचा रखना बेहतर माना जाता है.

दक्षिण-पूर्व में पानी का टैंक
दक्षिण-पूर्व दिशा अग्नि तत्व की दिशा मानी जाती है. यदि यहां पानी का टैंक या जल स्रोत बना हो तो इसे वास्तु दोष माना जाता है. ऐसी स्थिति में कार्यों में बाधाएं, कानूनी परेशानियां और व्यापारिक नुकसान की आशंका बढ़ सकती है. इस दिशा में अग्नि और जल तत्व का संतुलन बनाए रखना आवश्यक माना जाता है.

उत्तर-पूर्व दिशा में भारी मशीनें न रखें
उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण को बेहद संवेदनशील माना जाता है. इस दिशा में भारी मशीनें, बड़े उपकरण या अन्य भारी सामान रखने से व्यापार में रुकावट और साझेदारी में तनाव बढ़ सकता है. इस हिस्से को जितना संभव हो हल्का और व्यवस्थित रखना बेहतर माना जाता है.

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