पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और TMC प्रमुख ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी बंगाल में अकेले ही चुनाव लड़ेगी. कांग्रेस से किसी भी तरह के गठबंधन की संभावना को खारिज करते हुए ममता ने कहा कि TMC की रणनीति साफ है, जबकि बाकी पार्टियां TMC के खिलाफ लड़ने की रणनीति बनाती हैं.
ममता बनर्जी ने घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमाओं की सुरक्षा केंद्र की जिम्मेदारी है. उन्होंने सवाल उठाया कि अब तक कितने घुसपैठियों की पहचान की गई है. ममता ने कहा कि घुसपैठ को लेकर जो बातें की जा रही हैं, वह सिर्फ एक नैरेटिव है.
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ममता बनर्जी ने दावा किया कि बांग्लादेश में हालिया उथल-पुथल के दौरान केंद्र सरकार कुछ लोगों को भारत लाई, लेकिन राज्य सरकार को इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई. ममता ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस बारे में जानकारी दी, क्योंकि राज्य की सुरक्षा भी उनकी जिम्मेदारी है. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10 सालों में केंद्र ने बंगाल को कोई ठोस जानकारी नहीं दी.
58 लाख मतदाताओं के नाम हटाने का दावा
चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया पर ममता ने गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि पहले चरण में ही 58 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए. ममता का दावा है कि 30 लाख लोगों को सुनवाई के लिए बुलाया गया, लेकिन उनका क्या हुआ, किसी को नहीं पता. उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव से ठीक पहले और सिर्फ चुनावी राज्यों में ही SIR क्यों लागू किया जा रहा है, जबकि असम जैसे राज्यों में नहीं.
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ममता ने आरोप लगाया कि माइक्रो ऑब्जर्वर और कुछ रिटायर्ड बीजेपी आईटी अधिकारी अवैध तरीके से मतदाता सूची से नाम हटा रहे हैं. उन्होंने कहा कि बिना ERO के हस्ताक्षर के एकतरफा डिलीशन किया गया, जो कानूनन गलत है. ममता ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग BJP की तरह काम कर रहा है और 100 प्रतिशत TMC समर्थक वोटरों को निशाना बनाया जा रहा है.
दिल्ली आकर SIR के पीड़ितों को सामने रखा!
ममता बनर्जी ने दावा किया कि BLO के परिवारों पर दबाव डाला गया, जिससे कई लोग बीमार तक हो गए. ममता ने कहा कि उन्होंने दिल्ली आकर SIR के पीड़ितों को सामने रखा है, ताकि देश खुद देख सके कि बंगाल में क्या हो रहा है. उनका आरोप है कि बंगाल को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि BJP उन्हें चुनावी तौर पर हरा नहीं पा रही है.