कोच्चि में काम खत्म हुआ था. हमारे कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई के साथ 'इलेक्शन्स ऑन माय प्लेट' की शूटिंग हुई थी. पैरागन रेस्टोरेंट की मशहूर फिश मैंगो करी खाई थी. वो स्वाद अभी भी जुबान पर था. तभी कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी का चुनावी कैंपेन शेड्यूल सामने आया.
उनके तीन कार्यक्रम थे. तिरुवनंतपुरम और कोल्लम में. कोच्चि से देखा तो कोल्लम नजदीक लगा. मन में आया कि चलो कोल्लम चलते हैं, शायद उनसे इंटरव्यू मिल जाए.
सुबह 8 बजे, कोच्चि से निकले
होटल से चेकआउट करते वक्त ही लगा कि देर हो रही है. मन में एक डर था, "कहीं रास्ते में जाम लग गया तो?" इंटरव्यू का मौका निकल जाएगा. नाश्ता छोड़ने का फैसला किया. लेकिन रेस्टोरेंट से एक डोनट उठाया, जो रास्ते में खाने के लिए.
गाड़ी में बैठते ही अपना फोन म्यूजिक सिस्टम से जोड़ा. प्लेलिस्ट चली, 80 और 90 के दशक के मलयालम के पुराने गाने. मेरा म्यूजिक सेंस अच्छा है, इसलिए मेरे वीडियो जर्नलिस्ट और कैब ड्राइवर को कोई शिकायत नहीं थी. सब खुश थे.
रास्ते में एक सवाल मन को खाता रहा
कोल्लम की तरफ बढ़ते हुए एक बात बार-बार दिमाग में आती रही. इतना घूमी, इतने लोगों से मिली, फिर भी समझ नहीं आ रहा कि जीतेगा कौन?
जिन वोटरों से मिली, उनमें से बहुत सारे अभी तक तय नहीं कर पाए थे कि वोट किसे देंगे. यह आखिरी हफ्ता बहुत अहम है. इसी हफ्ते में वो लोग फैसला करेंगे जो अभी तक किसी के साथ नहीं हैं. क्या कोई ऐसी लहर है जो दिख नहीं रही? ज्यादातर सर्वे कह रहे हैं कि मुकाबला बराबरी का है. यही सोचते-सोचते कोल्लम आ गया.
दोनों पार्टियों के घोषणापत्र
रास्ते में एक और बात हुई. LDF और UDF, दोनों ने एक ही वक्त पर, दो अलग-अलग जगहों पर अपना घोषणापत्र जारी किया. मैंने दोनों पढ़े.
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LDF का घोषणापत्र पिछले 10 सालों की सरकार की नीतियों को आगे बढ़ाने वाला था, अगले 5 साल का रोडमैप. वहीं UDF का घोषणापत्र समाज के हर तबके के लिए कुछ न कुछ लेकर आया था। UDF ने एक खास वादा किया, "टॉलरेंस मिनिस्ट्री" यानी धार्मिक सौहार्द को मजबूत करने के लिए एक अलग मंत्रालय. इससे वो खुद को केरल की धर्मनिरपेक्ष राजनीति का चेहरा बताना चाहते हैं.
कोल्लम: मेरा अपना शहर
हम समय पर पहुंच गए. प्रियंका गांधी अभी तिरुवनंतपुरम के पहले कार्यक्रम में भी नहीं पहुंची थीं, तो वक्त था. कोल्लम मेरा अपना शहर है. थ्रिसूर में पैदा हुई, लेकिन पली-बढ़ी यहीं. चार-साढ़े चार घंटे के सफर के बाद घर गई. फ्रेश हुई. फ्रिज खोला और कटे हुए फल मिले. मां को बाय बोला. और सीधे रैली की जगह पहुंच गई. चुनावों की वजह से घर आना कम हो गया था. इस बार थोड़ी देर के लिए सही, घर की याद पूरी हुई.
कांग्रेस समर्थकों से बातचीत
प्रियंका का वायनाड से लगाव है, इसलिए उनके ज्यादातर दौरे उत्तर केरल में होते हैं. लेकिन तिरुवनंतपुरम में रोड शो तो हर चुनाव में होता ही है. चूंकि वक्त था, मैं रैली मैदान में घूमते हुए कांग्रेस समर्थकों से बात करने लगी.
मेरा पसंदीदा सवाल पूछा, "चेट्टा, कौन जीतेगा?" एक बुजुर्ग कांग्रेस कार्यकर्ता बोले, "पूछना क्या है? हमारी पार्टी जीतेगी."
मैंने थोड़ा टोका, "लेकिन कोल्लम तो लेफ्ट का गढ़ माना जाता है. मजदूरों की जमीन." वो बोले, "वो सब पुरानी बात है. अब बदलाव हो रहा है. लोकल बॉडी इलेक्शन देखो तो हमने पहली बार कॉर्पोरेशन जीता, लेफ्ट को हराकर. पहली बार इतिहास में."
कोल्लम की राजनीति
कोल्लम को "काजू की राजधानी" कहते हैं. दुनिया भर में मशहूर है यहां का काजू. राजनीति में यह शहर लेफ्ट का गढ़ रहा है. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि लोकसभा चुनावों में यह सीट अक्सर UDF के पास जाती है.
इस बार लेफ्ट को शहरी कोल्लम में ज्यादा उम्मीद नहीं थी. उनकी नजर ग्रामीण कोल्लम की सीटों पर थी.
एक और कांग्रेस कार्यकर्ता ने जोश में कहा, "इस बार जीत की शुरुआत कोल्लम से होगी. देखते रहो. कोल्लम दक्षिण केरल में गेम चेंजर बनेगा और लेफ्ट की कमर टूटेगी."
केरल में कांग्रेस समर्थकों में यह जो जोश और वफादारी दिखती है. यह नजारा शायद आज के दौर में सिर्फ केरल में ही देखने को मिलता है.
धूप में रोटी और केला
मैंने एक और ग्रुप देखा. कुछ लोग ब्रेड और रोबस्टा केला खा रहे थे. चिलचिलाती धूप में खुद को टिकाए रखने की कोशिश. जब मैं माइक लेकर उनके पास गई तो उन्होंने मुझे भी खाना ऑफर किया.
एक बोला, "हमें पूरा भरोसा है. वीडी सतीसन अगले सीएम की शपथ लेंगे." दूसरे ने फौरन सुधारा, "रमेश चेन्निथला को भी मौका मिल सकता है."
प्रियंका गांधी की स्पीच
तभी प्रियंका गांधी मंच पर आईं. उन्होंने केरल की तारीफ से शुरुआत की. यहां की खासियत बताई, बताया कि उन्हें इस राज्य से क्यों प्यार है.
फिर आई वो बात जो इस चुनाव का सबसे बड़ा नैरेटिव बन चुकी है. प्रियंका ने भी कहा, "पिनाराई विजयन और लेफ्ट, BJP की B-टीम है." यह आरोप दोनों तरफ से लगते आ रहे हैं. यही इस चुनाव की कहानी बन गई है.
प्रियंका ने समर्थकों से अपील की कि कोल्लम में जिन पांच उम्मीदवारों के लिए वो प्रचार करने आई हैं, उन सबको जिताएं.
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इंटरव्यू का मौका - बस थोड़ा सा चूक गई
स्पीच खत्म होते ही मैं एग्जिट की तरफ दौड़ी. प्रियंका गांधी राहुल गांधी के मुकाबले अक्सर रुककर छोटी बाइट दे देती हैं. सोचा किस्मत आजमाते हैं.
लेकिन इस बार एक नहीं, दो बैरिकेड लगे थे. बैरिकेड कूदने का अनुभव तो है - एक कूदा भी. लेकिन दूसरा नहीं कूद पाई. और काफिला मेन एग्जिट से निकल गया. इतने करीब आकर भी इंटरव्यू नहीं हो पाया.
यही है फील्ड रिपोर्टिंग
यही होता है मैदान पर. दस बार कोशिश करो, उम्मीद रहती है कि ग्यारहवीं बार मिलेगा. इस बार नहीं मिला. लेकिन कोशिश जारी रहेगी. कांग्रेस समर्थकों की तरह हम भी निकल पड़े. अपने अगले पड़ाव की तरफ, तिरुवनंतपुरम.