21 मार्च को दोपहर 12:30 बजे मुख्यमंत्री का इंटरव्यू फाइनल है', जैसे ही सीएम ऑफिस (CMO) से व्हाट्सएप पर यह मैसेज आया, मेरी पिछले दो महीने की मेहनत रंग लाती दिखी. मैंने तुरंत अपने मैनेजर को बताया और कन्नूर पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी फ्लाइट पकड़ी. हमारी शाम 6:10 बजे की फ्लाइट थी, जो कोच्चि में थोड़ी देर रुककर कन्नूर जाने वाली थी.
जब मैं और मेरे वीडियो जर्नलिस्ट टिंकू एयरपोर्ट पर बस का इंतजार कर रहे थे, तभी हमारी मुलाकात विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन से हुई. वे भी उसी फ्लाइट से जा रहे थे. उनसे थोड़ी गपशप हुई, वे कांग्रेस की नई कैंडिडेट लिस्ट को लेकर काफी रिलैक्स लग रहे थे. उन्होंने बड़े आत्मविश्वास से कहा, 'हमने इस बार बहुत जल्दी लिस्ट तैयार कर ली है, जीत हमारी ही होगी.' मैंने उन्हें बताया कि मैं सीएम का इंटरव्यू करने कन्नूर जा रही हूं.
रात 8:10 बजे जब हम कन्नूर उतरे, तो वहां अजीब सा सन्नाटा था. दुकानें बंद थीं और सड़कें सूनी थीं. तब याद आया कि ईद की छुट्टी है. खाना खाने के लिए भी हमें काफी भटकना पड़ा, जो कन्नूर जैसे मेहमाननवाज शहर के लिए थोड़ा अजीब था. एक रेस्टोरेंट मिला भी तो वहां सिर्फ दो ही ऑप्शन थे. इसकी वजह सिर्फ छुट्टी नहीं, बल्कि एलपीजी गैस की किल्लत थी. रास्ते में ढाबे भी बंद दिखे. हमारे कैब ड्राइवर ने कहा, 'हम जैसे ड्राइवर इन ढाबों पर ही निर्भर हैं, अब बड़ी मुश्किल हो रही है.' मुझे लगा कि इस गैस संकट का असर चुनाव प्रचार पर भी पड़ेगा, क्योंकि वर्कर इन्हीं ढाबों पर खाना खाते हैं.
मैंने होटल पहुंचकर अपने सवाल तैयार किए. मुझे सिर्फ 20 मिनट मिलने वाले थे. सीएम अक्सर लंबे जवाब देते हैं, इसलिए मुझे कम समय में सारे जरूरी मुद्दों को समेटना था.
इंटरव्यू कन्नूर के पिनराई कन्वेंशन सेंटर में होना था. हमारे होटल से वहां पहुंचने में करीब 23 मिनट लगने थे. मैंने 10:45 बजे निकलने का प्लान बनाया क्योंकि पिनराई विजयन समय के बहुत पक्के माने जाते हैं. चुनाव के लिहाज से यह उस सीजन का सबसे बड़ा इंटरव्यू था.
जैसे-जैसे हम आगे बढ़े, कन्नूर के असली रंग दिखने लगे. यह कम्युनिस्ट पार्टी का गढ़ है. शहर से दूर जाते ही आपको हर तरफ लाल झंडे, चे ग्वेरा की पेंटिंग्स और पार्टी के निशान दिखने लगते हैं. हम पिनराई जा रहे थे, जो न केवल सीएम का घर है, बल्कि केरल में कम्युनिस्ट पार्टी की जन्मस्थली भी है. कन्नूर की 11 सीटों में से 9 पर फिलहाल एलडीएफ (LDF) का कब्जा है. लोकसभा में भले ही कांग्रेस जीतती रही हो, लेकिन विधानसभा में पलड़ा सीपीएम का ही भारी रहता है.
जब हम पहुंचे, तो मुख्यमंत्री एक अन्य चैनल को इंटरव्यू दे रहे थे. लंच ब्रेक के बाद जब उनकी वापसी हुई, तो हमें बताया गया कि एक क्षेत्रीय चैनल के बाद हमारा नंबर आएगा. हम अपना कैमरा और माइक सेट करके इंतजार कर रहे थे. मैंने हेडफोन लगाए ही थे कि स्टाफ ने आकर कहा कि 'चलिए शुरू कीजिए, सीएम आ रहे हैं.' मैंने हैरान होकर पूछा, 'अभी?' उन्होंने कहा, 'हां, पहले आपका खत्म करेंगे.' अभी मैं माइक लगा ही रही थी कि सीएम अंदर आ गए. बातचीत शुरू हुई और जो 15 मिनट मिलने वाले थे, वह इंटरव्यू 24 मिनट तक चला.
सीएम ने अपनी सरकार के कामकाज और अगले पांच साल के विजन पर खुलकर बात की. उन्होंने राहुल गांधी को 'बीजेपी की बी-टीम' बताया, 'केरल स्टोरी' को प्रोपेगेंडा कहा और साफ किया कि सबरीमाला विवाद का चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
पिनराई विजयन न तो जीत पर बहुत उछलते हैं और न ही हार से परेशान होते हैं. 1970 में 25 साल की उम्र में वे पहली बार विधायक बने थे और आज 80 की उम्र में भी वे केरल की राजनीति के बड़े खिलाड़ी हैं. वे काफी कॉन्फिडेंट दिखे कि पिछले 10 साल के विकास कार्य उन्हें फिर से जीत दिलाएंगे.
हालांकि, विरोधियों का कहना है कि वे अब पार्टी से बड़े हो गए हैं और अपनी शर्तों पर काम करते हैं. कांग्रेस तो मजे लेते हुए कहती है कि उन्हें खुशी है कि लेफ्ट विजयन के चेहरे पर चुनाव लड़ रहा है, क्योंकि उनके चेहरे पर अब कोई वोट नहीं देगा. लेकिन लेफ्ट फ्रंट का मानना है कि इस लड़ाई में पिनराई विजयन से बेहतर कोई चेहरा नहीं है. वहां बैठे एक बुजुर्ग कार्यकर्ता ने गर्व से कहा, 'वे गरीबों और मजदूरों के नेता हैं, उन्होंने हमारी पेंशन बढ़ाई है.'