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केरल की लिस्ट पर कांग्रेस में मिडनाइट ड्रामा! राहुल ने रोका सांसदों के टिकट, खड़गे के घर 4 घंटे मंथन

केरल विधानसभा चुनाव के लिए टिकट वितरण को लेकर राहुल गांधी ने भारी नाराजगी जताई है. बताया जा रहा है कि राहुल ने बुधवार रात को मैराथन बैठक में सांसदों के विधानसभा चुनाव लड़ने पर कड़ी आपत्ति जताई है. इस बैठक में उन्होंने जातिगत समीकरण, चुनावी सर्वे और जिला कमिटियों की फीडबैक पर नई रणनीति बनाई गई है.

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केरल की लिस्ट पर कांग्रेस में ड्रामा. (Photo: ITG)
केरल की लिस्ट पर कांग्रेस में ड्रामा. (Photo: ITG)

केरल विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के अंदर टिकट बंटवारे को लेकर भारी घमासान मचा हुआ है. राहुल गांधी की नाराजगी के बाद बुधवार रात 10:30 बजे से तड़के 2:30 बजे तक मैराथन बैठक चली. इस हाई-वोल्टेज ड्रामे में सांसदों को चुनाव लड़ाने से साफ मना कर दिया गया और जातिगत समीकरणों पर नए सिरे से माथापच्ची शुरू हो गई है.

दिल्ली में कांग्रेस के बीट रिपोर्टर के लिए गर्मियों में रात के 10:30 बजे का वक्त आमतौर पर दिन का काम खत्म करने का होता है, लेकिन इस मामले में बुधवार काफी अलग था. केरल कांग्रेस उम्मीदवारों की पहली सूची दिन में ही जारी हो चुकी थी और मैं फील्ड से घर की ओर गाड़ी चला रहा था. तभी मेरे एक सूत्र ने मुझे बताया कि कई गाड़ियां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास, 10 राजाजी मार्ग में प्रवेश कर रही हैं, जिससे संकेत मिलता है कि पार्टी किसी महत्वपूर्ण काम के लिए दिन-रात काम कर रही है.

उत्सुकतावश, मैंने कुछ फोन किए और पता चला कि केरल विधानसभा चुनाव के लिए महत्वपूर्ण केंद्रीय चुनाव आयोग (सीईसी) की बैठक शुरू होने वाली है. इन सभी सूचना से ऐसा लगता है कि लोकसभा के विपक्ष राहुल गांधी ने केरल में टिकट वितरण प्रक्रिया पर अपनी नाराजगी व्यक्त की थी.

सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने केरल यूनिट द्वारा टिकट वितरण पर असंतोष जताया था. उन्होंने मांग की कि उम्मीदवारों की सूची में जातीय समीकरण, चुनावी ट्रैक रिकॉर्ड, सर्वे रेटिंग और जिला कांग्रेस कमिटियों की फीडबैक जैसी व्यवस्थित प्रस्तुति हो, न कि सिर्फ राज्य यूनिट द्वारा नामित व्यक्तियों को टिकट दिए जाएं.

राहुल की सांसदों को NO

ये सीईसी बैठक रात 10:30 बजे शुरू होकर सुबह 2:30 बजे तक चली. स्पष्ट रूप से, इतनी देर रात की बैठकें पिछले कम-से-कम पांच वर्षों से कांग्रेस में आम बात नहीं थीं, जिस दौरान मैंने केरल चुनावों के महत्व को दिखाने वाले बीट रिपोर्टर के रूप में काम किया. ऐसी घटनाएं बीजेपी में अधिक देखने को मिलती हैं, जहां प्रधानमंत्री-गृह मंत्री आदि की उपस्थिति के कारण देर रात की बैठकें काफी आम हैं.

इस मैराथन बैठक में सबसे बड़ा फैसला ये हुआ कि कोई भी लोकसभा सांसद (MP) विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगा. कम-से-कम 5 MP पूर्व PCC चीफ के. सुधाकरन, अडूर प्रकाश, शफी परंबिल आदि ने विधानसभा टिकट की इच्छा जताई थी, लेकिन राहुल गांधी ने साफ कहा कि ऐसा करने से लोकसभा उपचुनाव होंगे, मतदाताओं में CM चेहरे को लेकर भ्रम पैदा होगा और पार्टी की स्थिति कमजोर होगी.

सूत्रों ने बताया कि अगर पार्टी बहुमत हासिल करती है, तो MLA ही किसी MP का नाम CM पद के लिए आगे कर सकते हैं और उनकी राय मजबूती से विचार की जाएगी.

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टिकट वितरण में वेणुगोपाल का दबदबा

वहीं, केरल कांग्रेस चुनाव तंत्र से जुड़े एक सूत्र ने इंडिया टुडे/आजतक को बताया कि लगभग 60 प्रतिशत उम्मीदवार लोकसभा सांसद और पार्टी के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल के करीबी माने जाते हैं.

सूत्र ने बताया कि केरल से चुनाव लड़ने वाले 55 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट में से लगभग 17 उम्मीदवार केसी वेणुगोपाल के गुट से हैं, 9 रमेश चेन्निथला के गुट से और 5 वीडी सतीशान के गुट से थे. कई सांसदों ने अपने करीबी लोगों के लिए 1 या 2 सीटें भी हासिल कीं.

सूत्रों के अनुसार, स्मैशिंग थरूर ने अपने किसी भी उम्मीदवार के लिए टिकट नहीं मांगा और टिकट वितरण में भी उनका कोई खास दखल नहीं रहा.

युवाओं पर दांव

मुख्य चुनाव आयोग की बैठकों में शामिल एक कांग्रेस नेता ने इंडिया टुडे को बताया कि कई राज्य नेताओं के नाम आए थे, लेकिन जिला कांग्रेस समितियों के सर्वेक्षण रेटिंग और फीडबैक जैसी पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही टिकट दिए गए है. पार्टी अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ मिलकर 140 सीटों में से लगभग 95 सीटों पर चुनाव लड़ने की उम्मीद है. 22 मौजूदा विधायकों में से, पार्टी ने 19 उम्मीदवारों को फिर से मैदान में उतारा है और टिकट वितरण के बाद अब जीत को लेकर काफी आश्वस्त है.

साथ ही कांग्रेस ने इस बार केरल के सामाजिक गणित को साधने के लिए ईसाई, नायर और एझावा समुदायों पर बड़ा दांव खेला है. पार्टी ने 22 ईसाई उम्मीदवारों (जिसमें 10 सीरो-मालाबार समुदाय से हैं), 21 नायर और 20 एझावा उम्मीदवारों को टिकट दिया है.

इसके अलावा 12 मुस्लिम और 3 ब्राह्मण चेहरों को भी चुनावी मैदान में उतारा गया है. युवाओं को तरजीह देते हुए 92 में से 52 उम्मीदवारों की उम्र 50 वर्ष से कम रखी गई है. पार्टी को उम्मीद है कि ये 'सोशल इंजीनियरिंग' उसे सत्ता के करीब ले जाएगी.

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महिला प्रतिनिधित्व पर पार्टी में बगावत

इतनी लंबी कवायद के बाद भी पार्टी के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है. कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर राहुल गांधी को टैग करते हुए 'महिला प्रतिनिधित्व' की कमी पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने नाराजगी जताई कि 92 में से केवल 9 महिलाओं को ही टिकट दिया गया है.

सूत्रों की मानें तो शमा खुद कन्नूर सीट से टिकट की चाहती थी, लेकिन के. सुधाकरन की जगह वहां किसी और को मौका मिलने से वो राज्य नेतृत्व से काफी खफा हैं.

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