पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आ रही हैं और चुनावी माहौल पूरी तरह गरम है. इसी बीच चुनाव आयोग ने एक बड़ी कार्रवाई की है जिसने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है.
एक राज्य सरकारी अधिकारी ज्योत्सना खातून को निलंबित कर दिया गया है. आरोप है कि वह ड्यूटी के दौरान खुलेआम TMC यानी तृणमूल कांग्रेस के लिए प्रचार कर रही थी. चुनाव आयोग ने कहा कि उसके पास इस मामले के पक्के सबूत हैं और इसीलिए तुरंत कार्रवाई की गई.
ज्योत्सना जॉइंट बीडीओ यानी ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर के पद पर थे और चुनाव के दौरान इन्हें एआरओ यानी असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर की जिम्मेदारी भी दी गई थी. पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 2 अप्रैल 2026 को चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखकर इनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी. चुनाव आयोग ने उस सिफारिश को मंजूर कर लिया और तुरंत निलंबन और जांच के आदेश दे दिए.
पुलिस तैनाती पर भी उठे सवाल
मामला सिर्फ एक अधिकारी तक नहीं रुका. चुनाव आयोग की नजर एक और बड़ी गड़बड़ी पर पड़ी. 15 मार्च 2026 से पहले करीब 2,185 पुलिसकर्मी, 832 TMC से जुड़े लोगों और 144 अन्य लोगों की सुरक्षा में लगाए गए थे. यानी सरकारी पुलिस का इस्तेमाल एक पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के लिए हो रहा था.
चुनाव आयोग ने इसे गंभीरता से लिया और पश्चिम बंगाल के DGP को आदेश दिया कि 2 से 3 दिनों के अंदर पूरी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाए.
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बंगाल की सियासत और चुनावी पेंच
पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव के लिए दो चरणों में मतदान होनी है. 23 और 29 अप्रैल को मतदाता अपने मतों का इस्तेमाल कर सकते हैं.
ममता बनर्जी की TMC लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश में है. वहीं BJP पूरी ताकत से मैदान में है. कांग्रेस और लेफ्ट का गठबंधन भी मुकाबले में है. ऐसे में विपक्ष पहले से आरोप लगाता रहा है कि बंगाल में सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल TMC के फायदे के लिए किया जा रहा है. चुनाव आयोग की इस कार्रवाई ने उन आरोपों को और हवा दे दी है.
चुनाव आयोग का साफ संदेश
इस पूरी कार्रवाई से चुनाव आयोग ने एक कड़ा संदेश दिया है. चुनाव के दौरान कोई भी पक्षपात बर्दाश्त नहीं होगा. चाहे वो कोई अधिकारी हो या पुलिस की तैनाती का तरीका.