तमिलनाडु में वोटिंग की तारीख (23 अप्रैल) नजदीक आते ही सियासी तपिश बढ़ने लगी है. एक ही फेज में 234 विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर जैसे-जैसे चेन्नई की गर्मी बढ़ रही है, वैसे ही सियासी पारा भी चढ़ता जा रहा है.
इस बार मुकाबले का केंद्र 'आधी आबादी' यानी महिला मतदाता बन गई हैं, जिन्हें निर्णायक माना जा रहा है. ऐसे में सभी पार्टियों ने महिला वोटरों पर फोकस करते हुए अपनी खास रणनीति बनाई है.
दिल्ली बनाम चेन्नई: दो अलग तस्वीरें
राजधानी दिल्ली में संसद के अंदर महिला आरक्षण बिल पर जोरदार बहस चल रही है. वहीं चेन्नई की सड़कों पर डीएमके ने डिलिमिटेशन (परिसीमन) बिल के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. काले झंडे लहराए गए और बिल की प्रतियां जलाई गईं. इन फैसलों से डीएमके ने सख्त राजनीतिक संदेश दिया.
16 अप्रैल को डीएमके के सभी कार्यक्रमों में ‘ब्लैक’ थीम नजर आया. पार्टी हेडक्वार्टर अरिवलयम में काले झंडे, काले कपड़े और जली हुई प्रतियों का नजारा दिखा. वहीं नमक्कल में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने काले कपड़े पहनकर डिलिमिटेशन बिल की प्रतियां जलाईं और 'पोराडुम पोराडुम, वेल्वोम ओंद्रागा' (हम लड़ेंगे, हम जीतेंगे) का नारा दिया. उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन भी पूरे दिन काले कपड़ों में नजर आए.
'नॉर्थ बनाम साउथ' की बहस
डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का आरोप है कि यह विधेयक क्षेत्रीय सियासी प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है, खासकर दक्षिणी राज्यों के लिए यह नुकसानदायक है.
काली साड़ियों में महिला नेता
प्रदर्शन में कई महिला नेताओं ने काली साड़ियां पहनकर हिस्सा लिया, जो विरोध का प्रतीक बना. हालांकि, पार्टी मुख्यालय के प्रदर्शन में केवल एक महिला डीएमके नेता की मौजूदगी भी चर्चा में रही.
महिला वोटरों पर फोकस
इस बार विधानसभा चुनाव में सभी पार्टियां महिला मतदाताओं को साधने में जुटी हैं. एक तरफ कल्याणकारी योजनाएं, तो दूसरी तरफ प्रतिनिधित्व की राजनीति. संसद में महिला सशक्तिकरण की बात हो रही है, जबकि चेन्नई की सड़कों पर विरोध दिख रहा है.
कमल हासन का समर्थन
सियासी पंडितों को चौंकाते हुए कमल हासन की पार्टी मक्कल निधि मय्यम ने भी काले झंडों के साथ डीएमके का समर्थन किया. हासन ने सलेम में डीएमके के लिए प्रचार करते हुए काले कपड़े पहने.
परिसीमन पर अमित शाह का बयान
इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कहा कि डिलिमिटेशन से दक्षिणी राज्यों को फायदा होगा. उनके मुताबिक तमिलनाडु को 20, केरल को 10, तेलंगाना को 9 और आंध्र प्रदेश को 13 अतिरिक्त लोकसभा सीटें मिल सकती हैं. महाराष्ट्र को भी 24 सीटों का फायदा होने की उम्मीद है.
क्या बनेगा बड़ा चुनावी मुद्दा?
डीएमके ने डिलिमिटेशन को बड़ा चुनावी मुद्दा बना दिया है. पार्टी इसे राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश कर रही है. डीएमके यह नैरेटिव बना रही है कि केंद्र की बीजेपी सरकार दक्षिण भारत के साथ भेदभाव कर सकती है. हालांकि, यह मुद्दा वोटरो- खासतौर पर महिला वोटरों को कितना प्रभावित करेगा, यही आने वाले दिनों में चुनाव नतीजों की दिशा तय करेगा.