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'यह पानीहाटी के लोगों की जीत', BJP कैंडिडेट बनाए जाने पर बोलीं RG Kar पीड़िता की मां

आरजी कर केस की पीड़िता की मां के बीजेपी उम्मीदवार बनने से बंगाल की राजनीति में नया मोड़ आ गया है. उन्होंने इसे न्याय की लड़ाई बताते हुए महिलाओं की सुरक्षा को मुख्य मुद्दा बनाया, जबकि टीएमसी ने उनके फैसले पर सवाल उठाए हैं.

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आरजी कर पीड़िता की मां रत्ना देबानाथ को पानीहाटी सीट से भाजपा ने उम्मीदवार बनाया. (File Photo: PTI)
आरजी कर पीड़िता की मां रत्ना देबानाथ को पानीहाटी सीट से भाजपा ने उम्मीदवार बनाया. (File Photo: PTI)

आरजी कर की पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बंगाल चुनाव में पानीहाटी सीट से टिकट दिया है. उनके चुनाव लड़ने के फैसले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज कर दी है. बीजेपी उम्मीदवार घोषित होने के बाद रत्ना देबनाथ ने आजतक से बातचीत में कहा, 'यह पानीहाटी के लोगों की जीत है. मुझे ही नहीं, हर किसी को न्याय मिलेगा.'

रत्ना देबानाथ ने कहा कि समाज में अपराधों के खिलाफ आवाज उठाने की भावना कमजोर पड़ गई है. उन्होंने कहा,'हमारी महिला मुख्यमंत्री इस घटना को छोटा बताती हैं और कहती हैं कि महिलाएं रात 10 बजे के बाद बाहर न निकलें. आज महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं. मैं अपनी बहनों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए लड़ूंगी.'

पीड़िता की मांग ने ऐलान किया कि वह अगले दिन से ही चुनाव प्रचार शुरू करेंगी. उन्होंने खुद को 'एक साधारण व्यक्ति' बताते हुए कहा, 'मेरे पास पाने के लिए कुछ नहीं है, मैं सिर्फ लोगों के लिए कुछ करना चाहती हूं.' रत्ना देबनाथ ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के स्थानीय विधायक और चेयरमैन पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे भी उनकी बेटी के हत्यारों जितने ही दोषी हैं. उन्होंने यह भी कहा कि पिछले दो वर्षों में उनके परिवार ने बेहद कठिन समय का सामना किया है, इसलिए यह चुनावी लड़ाई उनके लिए आसान होगी. 

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वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने रत्ना देबनाथ के चुनाव लड़ने के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. पार्टी नेता कुणाल घोष ने कहा, 'पीड़िता के परिवार ने पहले इस मामले में सीबीआई जांच पर सवाल उठाए थे. उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से मिलने का समय मांगा, लेकिन उन्हें समय नहीं दिया गया. अब वही परिवार भाजपा में शामिल हो गया है.' टीएमसी नेता कुणाल घोष ने आगे कहा कि भाजपा कई ऐसे मामलों में भी न्याय दिलाने में विफल रही है, जैसे हाथरस, उन्नाव और मणिपुर की घटनाएं. उन्होंने सवाल उठाया कि अब इस फैसले को किस नजर से देखा जाएगा.

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