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बंगाल में BJP की जीत के शिल्पकार सुनील बंसल को क्या UP में फिर मिलेगी जिम्मेदारी?

सुनील बंसल ने पश्चिम बंगाल का जिम्मा चार साल पहले संभाला था, जब बीजेपी की सत्ता में आने की दूर तक संभावना नहीं थी. बीजेपी के लिए मुश्किल लगने वाले काम को बंसल ने अपनी यूपी टीम के सहारे करके दिखाया. अब बंगाल को फतह करने के बाद सुनील बंसल को यूपी में फिर से लगाया जा सकता है, जहां पर 14 साल के सियासी वनवास को खत्म करने का काम किया था.

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UP की सियासत में सुनील बंसल होने के मायने (Photo-ITG)
UP की सियासत में सुनील बंसल होने के मायने (Photo-ITG)

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की इस छप्पर फाड़ जीत का श्रेय काफी हद तक भूपेंद्र यादव और सुनील बसल के संगठन कौशल को जाता है. उत्तर प्रदेश के संगठन महामंत्री से राष्ट्रीय महासचिव बनाए जाने के बाद से ही सुनील बंसल को पश्चिम बंगाल का जिम्मा दे दिया गया था. सुनील बंसल ने बंगाल चुनाव फतह करने के लिए यूपी की अपनी पुरानी टीम पर भरोसा जताया और ममता के मजबूत दुर्ग को ध्वस्त कर 'कमल' खिलाने में कामयाब रही.

उत्तर प्रदेश में एक दर्जन से ज्यादा नेता हैं, जो जो संगठन में अपनी महारत रखते हैं. सूबे के ये नेता बंगाल में पार्टी प्रभारी सुनील बंसल की कोर टीम के हिस्सा रहे और बंगाल के कोने-कोने में चुपचाप काम करते रहे. सुनील बंसल की इस कोर टीम यूपी ने बंगाल को फतह करने की इबारत लिखी. 

बंगाल चुनाव में मिली जीत के बाद अब सुनील बंसल को उत्तर प्रदेश के सियासी रणभूमि में फिर से नई जिम्मेदारी के साथ उतारे जाने की चर्चा शुरू हो गई है, क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद से बीजेपी की राह कई सियासी बाधाएं हैं. सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए बीजेपी सुनील बंसल को मिशन-यूपी की कमान सौंप सकती है? 

बंजर जमीन पर बंसल ने खिलाया 'कमल'
बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल को संगठन का माहिर खिलाड़ी माना जाता है. उत्तर प्रदेश से लेकर ओडिशा और पश्चिम बंगाल तक की जमीन एक समय बीजेपी के लिए किसी सियासी बंजर से कम नहीं थी, लेकिन सुनील बंसल की मेहनत और मशक्कत के चलते ही 'कमल'की सियासी फसल लहरा रही है. 2014 में 14 साल के बाद बीजेपी सत्ता का वनवास तोड़ने में कामयाब रही तो उसमें बंसल का अहमल रोल था. 

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सुनील बंसल ने 2013 में यूपी महामंत्री संगठन का जिम्मा ऐसे समय में संभाला था, जब बीजेपी सूबे में सत्ता का सियासी वनवास झेल रही थी. महज उसके 9 सांसद और 51 विधायक थे. अमित शाह के सहयोगी बनकर आए सुनील बंसल ने सूबे की सियासी फिजा बदल दी और उत्तर प्रदेश के रणभूमि में सपा-बसपा जैसे क्षेत्रीय दलों सियासी वर्चस्व को पूरी तरह से तोड़कर रख दिया था. 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव और 2017-2022 के विधानसभा चुनाव बीजेपी जीतने में सफल रही. बीजेपी के इस जीत में महामंत्री संगठन के तौर पर सुनील बंसल की भूमिका अहम रही थी. 

यूपी में बीजेपी को लगातार चार चुनाव जीतने वाले महामंत्री संगठन सुनील बंसल को पदोन्नत कर अगस्त 2022 में राष्ट्रीय महामंत्री नियुक्त कर दिया गया है. उन्हें पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और उड़ीसा का प्रभार सौंपा गया है. ये तीनों राज्य बीजेपी के लिए किसी पथरीली रास्ते से कम नहीं थे, लेकिन सुनील बंसल ने अपनी रणनीतिक कौशल के जरिए पहले ओडिशा और अब बंगाल के सियासी राह को बीजेपी के लिए सुगम बना दिया. अब इन दोनों ही राज्य में बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई है. 

बंसल की यूपी टीम ने बंगाल फतह किया
उत्तर प्रदेश के संगठन की उसे टीम के चेहरों को जान लीजिए, जिन्होंने सुनील बंसल के साथ चुपचाप महीनो से बंगाल में बीजेपी के लिए माइक्रो मैनेजमेंट में जुटे थे, इन नेताओं के जिम्मे में बूथ का माइक्रो मैनेजमेंट, डाटा प्लानिंग, बूथ प्लानिंग और कार्यकर्ताओं के बीच के मतभेद खत्म कर उन्हें संगठन के एकमात्र लक्ष्य के लिए लगने का काम दिया गया था. 

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उत्तर प्रदेश से योगी कैबिनेट के चार मंत्री एक पूर्व कैबिनेट मंत्री और तकरीबन डेढ़ हजार  कार्यकर्ता बंगाल में पिछले अक्टूबर के बाद से ही जमे थे. बंगाल में सुनील बंसल की टीम में काम कर रहे ये  यूपी के वो तमाम वह चेहरे हैं जिसमें से ज्यादातर उनके साथ एबीवीपी में भी काम कर चुके हैं और 2014 से 2022 तक उत्तर प्रदेश में सुनील बंसल की टीम का भी हिस्सा रहे. 

उत्तर प्रदेश की 2017 की जीत में इलेक्शन माइक्रो मैनेजमेंट, साइंटिफिक इलेक्शन इंजीनियरिंग सुनील बंसल की रणनीति का अहम हिस्सा रहा था अपने उसी फार्मूले को उन्होंने यूपी की अपनी टीम के साथ बंगाल में ममता बनर्जी के मजबूत दुर्ग को ध्वस्त करके कमल खिलाने में कामयाब रहे. 

सुनील बंसल की यूपी टीम में कौन-कौन नेता हैं.

जेपीएस राठौड़ को सुनील बंसल का सबसे भरोसेमंद साथी माना जाता है. यूपी की योगी सरकार  सहकारिता मंत्री हैं. 2017, 2019 और 2022 में बीजेपी के चुनावी मैनेजमेंट कंट्रोल रूम का जिम्मा संभालने वाले जेपीएस राठौर 6 महीने से बंगाल में डेरा जमाए हुए थे और लखनऊ नहीं लौटे. योगी सरकार में मंत्री हैं लेकिन बंगाल चुनाव की जिम्मेदारी ने उन्हें बंगाल में ही रोक रखा था. 

जीपीएस राठौर माइक्रो लेवल प्लानिंग और माइक्रो लेवल बूथ मैनेजमेंट के माहिर माने जाते हैं. जीपीएस राठौर को बंगाल में पूर्वी और पश्चिम मदिनीपुर की 35 विधानसभा चुनाव कीजम्मेदारी दी गई थी। एक दिन पहले ही आज तक से बातचीत में उन्होंने कहा था कि हमारा आंकड़ा 180 के नीचे नहीं रुकेगा,  लेकिन कहां तक रुकेगा यह नहीं बता सकता.

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पश्चिम यूपी से आने वाले सुरेश राणा पिछली योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री थे, 2022 में अपना चुनाव हार गए ,लेकिन संगठन कौशल में इनका कोई सानी नहीं है सुरेश राणा के जिम्मे उत्तर 24 परगना के कई विधानसभा सीटें थी. पूर्व सांसद सुब्रत पाठक, यूपी सरकार में मंत्री संजय गंगवार दिनेश खटीक और  दयाशंकर मिश्र दयालु भी पिछले कई महीनो से बंगाल में जमे थे.

सुब्रत पाठक के पास हुगली जिले की जिम्मेदारी थी, योगी सरकार में स्वतंत्र प्रभार मंत्रीयाशंकर मिश्र दयालु दमदम लोकसभा के साथ विधानसभा सीटों को देख रहे थे, योगी  सरकार में पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी को हावड़ा में लगाया गया था जबकि पूर्व मंत्री स्वाति सिंह को कोलकाता की कई विधानसभाओं की जिम्मेदारी थी.

बंगाल की जीत के बाद सुनील बंसल के लिए आगे क्या?
सुनील बंसल के उत्तर प्रदेश संगठन महामंत्री रहते हुए बीजेपी एक के बाद एक चार चुनाव जीतने में सफल रही थी, लेकिन यूपी से उनके हटते ही पार्टी को करारी मात खानी पड़ी. 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी 62 सीटों से घटकर 33 पर पहुंच गई. सपा 37 लोकसभा सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बन गई. 

बीजेपी ने सूबे में अलग-अलग जातियों में बिखरे हुए बहुसंख्यकों को हिंदुत्व की छतरी के नीचे एकजुट किया था, वो सपा के पीडीए की लहर में फिर बिखर गया. ऐसे में बीजेपी के लिए 2027 की सियासी राह काफी मुश्किलों भरी नजर आ रही. ऐसे में बीजेपी सूबे में सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए सुनील बंसल को उत्तर प्रदेश में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है. 

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माना जा रहा है कि सुनील बंसल को उत्तर प्रदेश का प्रभार दे दिया जाए, क्योंकि अमित शाह के सबसे खासमखास और उत्तर प्रदेश की सियासत को उनसे बेहतर समझने वाला संगठन का चेहरा शायद ही कोई हो. 2013 में जब अमित शाह उत्तर प्रदेश के प्रभारी बनकर आए थे तब पहली बार सुनील बंसल के संगठन कौशल को उन्होंने पहचाना था और तब अमित शाह के सबसे करीबी संगठनकर्ता के तौर पर उनके सह प्रभारी बनकर 2014 का लोकसभा चुनाव के शिल्पकार रहे. 

सुनील बंसल क्या यूपी में बीजेपी प्रभारी बनेंगे? 
2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बड़ी जीत के साथ ही सुनील बंसल का कद काफी बढ़ गया अमित शाह राष्ट्रीय अध्यक्ष हुए, लेकिन सुनील बंसल उत्तर प्रदेश के संगठन में बने रहे. यूपी के संगठन महामंत्री के तौर पर सुनील बंसल के खाते में 2014 का लोकसभा चुनाव 2017 का विधानसभा चुनाव और 2019 लोकसभा चुनाव की प्रचंड जीत दर्ज है. 

बीजेपी 'मोदी लहर' के सहारे लंबे अरसे बाद 2014 के चुनाव में 80 में 71 लोकसभा सीटें जीतने में कामयाब रही और दो सीटें उसके सहयोगी को मिली. इसके बाद से बीजेपी का फिर चुनाव-दर-चुनाव विजय रथ दौड़ा तो सूबे की पथरीली राह पर सुगम रास्ता बनते चले गए. विपक्षी दलों का कोई भी सियासी प्रयोग बीजेपी को रोक नहीं सका. 

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2014-2019 के लोकसभा चुनाव और 2017-2022 के विधानसभा चुनाव बीजेपी जीतने में सफल रही. बीजेपी के इस जीत में महामंत्री संगठन के तौर पर सुनील बंसल की भूमिका अहम रही है. 2022 के विधानसभा चुनाव में भी वह बीजेपी के संगठन महामंत्री थे और तब भी भाजपा ने विधानसभा में दो तिहाई बहुमत प्राप्त किया था . 

2022 में सुनील बंसल को यूपी से मुक्त कर उन्हें राष्ट्रीय दायित्व सौंपा गया जब उन्हें राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया तो बंगाल का प्रभार दिया गया. 2022 में यूपी से चले जाने के बाद 2024 में लोकसभा में भाजपा बुरी तरीके से हार गई. ऐसे में 2027 का विधानसभा चुनाव सिर पर है, जिसके चलते कयास लगाए जाने लगे हैं कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में भी उन्हें बड़ी भूमिका दी जा सकती है? 

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