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उपले थापकर करती थीं प्रैक्टिस, इस खेल में जीता देश के लिए GOLD

वुशु विश्व चैंपियनशिप में भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीतने वाली हरियाणा की रहने वाली पूजा कादियान ने इतिहास रच दिया.

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Pooja Kadian
Pooja Kadian

रूस के कजान में आयोजित वुशु विश्व चैंपियनशिप में भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीतकर पूजा कादियान ने देश का नाम रोशन कर दिया. हरियाणा की रहने वाली पूजा ने छेड़छाड़ से तंग आकर मार्शल आर्ट सीखने का मन बना लिया था.  शुरुआत में उन्हें परिवार का बिल्कुल सपोर्ट नहीं मिला. वह घर पर उपले थापते वक्त ही प्रैक्टिस किया करती थीं. उन्होंने जो तरकीब उपले थापते सीखीं वहीं तरकीब वुशु विश्व चैंपियनशिप में अपनाकर इतिहास रच दिया.

जानें कौन हैं पूजा

पूजा सीआरपीएफ दिल्ली में कॉन्सटेबल हैं. उनका मुकाबला 75 किलोग्राम भारतवर्ग श्रेणी में था. फाइनल में रूस की एवगेनिया स्टेपानोवा को हराकर जीत हासिल की. कॉन्सटेबल पद पर काम करने से पहले हरियाणा के झज्जर जिले के डेरी गांव की रहने वाली पूजा के लिए यहां तक पहुंचना किसी सपने से कम नहीं है.

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एक छोटे से गांव की रहने वाली लड़की अगर देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर आए ये हर पिता के लिए गर्व की बात होगी. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इस खेल के लिए शुरुआत में पूजा के पिता बिल्कुल राजी नहीं हुए थे. उन्हें हमेशा इस बात की टेंशन रहती थी कि लोग उनकी बेटी के बारे में बुरा भला कहेंगे.

पर पूजा ने उस दिन मार्शल आर्ट सीखने की ठान ली जब स्कूल जाते वक्त लड़के भद्दे कमेंट और छेड़छाड़ करते थे. ये बात वह अपने घरवालों से शेयर नहीं कर पाती थी. इसलिए उन्होंने ताइक्वांडो की शिक्षा ली.

उपले थापते वक्त करती थीं प्रैक्टिस

उन्हें शुरुआत में परिवार का बिल्कुल सपोर्ट नहीं मिला. वह घर पर उपले थापते वक्त ही प्रैक्टिस कर पाती थीं. उन्होंने जो तरकीब उपले थापते सीखीं वहीं तरकीब वुशु विश्व चैंपियनशिप में अपनाकर इतिहास रच दिया.

पापा से छुपकर करती थीं प्रैक्टिस

पूजा के लिए वह मुश्किल का दौर था जब पापा से छिपकर प्रैक्टिस किया करती थीं. लेकिन जब धीरे - धीरे उनका खेल लोगों के सामने आया तो उनके पापा को लोगों से कमेंट मिलने शुरू हो गए थे. ऐसे में वह अपने खेल पर पूरा फोकस नहीं कर पा रही थीं. इसलिए घरवालों से लड़कर अपनी नानी के घर दिल्ली वापस आ गई. जहां से उनकी एक अच्छी शुरुआत हुई. आज पूजा के पिता उन पर गर्व करते हैं.

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2008 से वह अब तक नेशनल चैंपियन हैं. इसी वजह से उन्हें सीआरपीएफ दिल्ली में नौकरी मिली. सीआरपीएफ में रहते हुए वह तीन बार वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुकी थीं. जहां उन्हें तीन बार सिल्वर मेडव मिले जबकि अब गोल्ड मेडल जीतने में सफल हुई.

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