scorecardresearch
 

NEET Result 2026: 720 में 715 नंबर, AIR-2 पंशुल बंसल बोले- सफलता के लिए पैशन जरूरी; बताया अपनी पढ़ाई का सीक्रेट

NEET UG 2026 में 720 में से 715 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक-2 पाने वाले हरियाणा के फरीदाबाद निवासी पंशुल बंसल ने अपनी सफलता का राज साझा किया है. उन्होंने कहा कि करियर चुनने से पहले उसमें पैशन होना सबसे जरूरी है. पंशुल ने बताया कि उन्होंने 7वीं कक्षा में ही डॉक्टर बनने का लक्ष्य तय कर लिया था और घंटों पढ़ाई करने के बजाय क्वालिटी स्टडी व प्रश्नों की प्रैक्टिस पर ज्यादा ध्यान दिया.

Advertisement
X
पंशुल ने नीट में 720 में से 715 नंबर लाए (Photo ITG)
पंशुल ने नीट में 720 में से 715 नंबर लाए (Photo ITG)

NEET UG 2026 में 720 में से 715 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक-2 पाने वाले हरियाणा के फरीदाबाद निवासी पंशुल बंसल ने अपनी सफलता का राज बताया है. एलन करियर इंस्टीट्यूट के क्लासरूम स्टूडेंट पंशुल का कहना है कि किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए सबसे जरूरी चीज पैशन है. उनका मानना है कि अगर किसी क्षेत्र में दिलचस्पी नहीं है तो केवल दबाव में जाकर सफलता हासिल करना मुश्किल होता है.

7वीं कक्षा में तय कर लिया था डॉक्टर बनने का लक्ष्य

पंशुल बंसल ने बताया कि उन्होंने बहुत छोटी उम्र में ही तय कर लिया था कि उन्हें डॉक्टर बनना है. कक्षा 7 में ही उन्होंने साइंस लेने और मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला कर लिया था. उनका कहना है कि जल्दी लक्ष्य तय करने का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि उनकी पढ़ाई उसी दिशा में आगे बढ़ती गई और बुनियाद मजबूत होती चली गई. उन्होंने कहा कि 10वीं के बाद उनके सामने कई विकल्प थे. वे चाहें तो दूसरी स्ट्रीम भी चुन सकते थे, लेकिन उन्हें शुरू से ही बायोलॉजी में रुचि थी. इसी वजह से उन्होंने बिना किसी भ्रम के मेडिकल की तैयारी शुरू कर दी.

10वीं और 12वीं में भी शानदार प्रदर्शन

पंशुल ने 10वीं और 12वीं दोनों बोर्ड परीक्षाओं में 94 प्रतिशत अंक हासिल किए. इतना ही नहीं, उन्होंने JEE Main 2026 भी दिया, जिसमें 99.5 परसेंटाइल प्राप्त किए. हालांकि उनका लक्ष्य शुरू से मेडिकल था, इसलिए उन्होंने पूरी ऊर्जा NEET की तैयारी में लगाई.

Advertisement

720 में 715 अंक, पूरे देश में दूसरा स्थान

NEET UG 2026 में पंशुल ने 720 में से 715 अंक हासिल किए और ऑल इंडिया रैंक-2 प्राप्त की. इस शानदार सफलता के साथ वे देश के टॉप मेडिकल अभ्यर्थियों में शामिल हो गए. पंशुल के पिता संजीव कुमार बंसल व्यापारी हैं और उन्होंने नेवल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. उनकी मां मोनिका बंसल कंपनी सेक्रेटरी हैं. पंशुल कहते हैं कि उनके माता-पिता ने कभी करियर को लेकर उन पर दबाव नहीं बनाया. उन्होंने हमेशा अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने की आजादी दी. यही कारण रहा कि वे बिना किसी मानसिक दबाव के अपनी तैयारी पर पूरा ध्यान दे सके. पंशुल पिछले दो वर्षों से एलन करियर इंस्टीट्यूट के नियमित क्लासरूम स्टूडेंट रहे. उनका कहना है कि एलन पहुंचने के बाद उन्हें पहली बार देशभर के प्रतिभाशाली छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा का वास्तविक स्तर समझ में आया. उन्होंने कहा कि जब आपके आसपास हर छात्र अपने सपनों को पूरा करने के लिए पूरी मेहनत कर रहा होता है तो वही माहौल आपको भी लगातार बेहतर बनने के लिए प्रेरित करता है.

कम घंटे, लेकिन क्वालिटी स्टडी

पंशुल की तैयारी का सबसे खास पहलू उनकी क्वालिटी स्टडी रही. उन्होंने बताया कि वे घंटों किताबों के सामने बैठने में विश्वास नहीं रखते थे. जितना भी पढ़ते थे, पूरी एकाग्रता और योजना के साथ पढ़ते थे. उनका कहना है कि कई छात्र थ्योरी पढ़ने में अधिक समय लगाते हैं, जबकि उन्होंने प्रश्नों की प्रैक्टिस पर ज्यादा ध्यान दिया. इससे परीक्षा के पैटर्न और समय प्रबंधन दोनों में मदद मिली. पंशुल ने अपनी सफलता का श्रेय अपने शिक्षकों को भी दिया. उन्होंने बताया कि उन्हें शुरुआत से ही एडवांस स्तर की पढ़ाई कराई गई, जिससे NEET जैसे कठिन परीक्षा पैटर्न को समझना आसान हो गया. वे कहते हैं कि सही मार्गदर्शन और नियमित अभ्यास सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है.

Advertisement

पढ़ाई के साथ संगीत भी रहा साथी

लगातार पढ़ाई के बीच मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए पंशुल संगीत का सहारा लेते थे. उन्हें पियानो बजाने का शौक है और उन्होंने इस क्षेत्र में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं पास की हैं. उन्होंने रॉक स्कूल से ग्रेड-4 और ट्रिनिटी कॉलेज ऑफ लंदन से ग्रेड-2 का प्रमाणपत्र प्राप्त किया है. उनका कहना है कि पढ़ाई के साथ किसी न किसी हॉबी को जरूर समय देना चाहिए. इससे तनाव कम होता है और पढ़ाई में फोकस बढ़ता है.

पंशुल की सलाह: पैशन है तभी चुनें करियर

NEET AIR-2 पंशुल बंसल का कहना है कि किसी भी क्षेत्र में केवल दूसरों को देखकर करियर नहीं चुनना चाहिए. उनके मुताबिक, यदि किसी छात्र में अपने लक्ष्य को लेकर जुनून है तो वह कठिन से कठिन परीक्षा भी पास कर सकता है. लेकिन अगर रुचि ही नहीं है तो लंबे समय तक मेहनत करना मुश्किल हो जाता है. वे छात्रों को सलाह देते हैं कि पहले अपनी रुचि पहचानें, फिर उसी दिशा में लगातार मेहनत करें. सही रणनीति, नियमित अभ्यास और आत्मविश्वास सफलता तक जरूर पहुंचाते हैं.

---- समाप्त ----
Live TV

TOPICS:
Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement