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'इको बाबा' जिन्होंने बिना सरकारी मदद के अपने दम पर कराई एक नदी की सफाई

सरकारी मदद का इंतजार किए बिना पंजाब के पर्यावरण कार्यकर्ता ने 160 किलोमीटर की नदी की अपने दम पर सफाई की. यही वजह है कि बाबा बलबीर सिंह सींचेवाल अब सभी के बीच 'इको बाबा' के नाम से मशहूर हो गए हैं.

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बाबा बलबीर सिंह सींचेवाल बाबा बलबीर सिंह सींचेवाल

बाबा बलबीर सिंह सींचेवाल भारत के पंजाब राज्य के एक पर्यावरण कार्यकर्ता हैं. उनके काली बीन नदी को साफ-सुथरा बनाने की गाथा आज हर शख्‍स सुनाता है. कभी किसी मदद के नहीं मिलने के चलते वह अपने अभियान पर अकेले निकल पड़े थे. वर्तमान में केंद्र सरकार ने गंगा सफाई अभियान में उनसे शामिल होने की बात कही है.

मिशन:
बाबा बलबीर सिंह सींचेवाल ने अकेले ही अपने दम पर बगैर किसी की मदद के काली बीन नदी को साफ करने का एक ऐसा आंदोलन छेड़ा था. इस काम में धीरे-धीरे लोग उनके साथ होते गए.

पहले क्‍या थे हालात:
छह से ज्यादा नगरों और 40 गांव के लोग काली बीन नदी में कूड़ा डालते थे और नालियों का गंदा पानी इसमें मिलाया जाता था. इसके चलते यह नदी एक गंदे नाले में बदल गई थी. नतीजतन आस-पास के खेतों को पानी नहीं मिल पाता था. जिस नदी के किनारे खड़े होने पर लोगों को नाक पर रुमाल रखना पड़ता था. लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि उसी नदी के किनारे लोग पिकनिक मनाते हैं.

कैसे पूरा किया मिशन:
साल 2000 में बलबीर सिंह सींचेवाल ने इस नदी को साफ करने का संकल्प लिया था. उन्होंने अपने साथी और सहयोगी स्वयं सेवकों के साथ मिलकर इसके तटों का निर्माण किया और नदी के किनारे-किनारे सड़कें बनाई. सीचेवाल ने लोगों के बीच जनजागृति अभियान चलाया. इसके तहत लोगों से अपना कूड़ा कहीं और डालने को कहा गया, नदी में मिलने वाले गंदे नालों का रुख मोड़ा गया.
सबसे बड़ी बात नदी के किनारे बसे लोगों को इसकी पवित्रता को लेकर जागरुक किया गया. उनके संकल्प और मेहनत ने एक नदी को गंदे नाले साफ-सुथरा बना दिया है.

सम्‍मान:
टाइम पत्रिका ने अपने पंजाब की प्रदूषित काली बीन नदी को साफ करने का अभियान चलाने वाले बाबा बलबीर सिंह सीचेवाल को दुनिया भर से चुने गए 30 हीरोज आॅफ एन्वायरनमेंट या दुनिया के पर्यावरण नायक में शामिल किया है. उनके काम की तारीफ करते हुए एक बार राष्‍ट्रपति एपीजे अब्‍दुल कलाम ने भी अपनी स्‍पीच में उनका जिक्र किया था.

कहां स्थित है नदी:
काली बीन नदी होशियारपुर जिले में 160 किलोमीटर क्षेत्र में बहती है. यह वही काली बीन नदी है जिसके किनारे 500 साल पहले गुरु नानक देव को अंतर्ज्ञान प्राप्त हुआ था और वे नानक से गुरु नानक के रूप में पहचाने जाने लगे थे.

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