भारत का ऐसा कोई घर नहीं बचा है, जिसमें लोग तनाव से ग्रस्त न हो. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार 22 से 25 साल के उम्र के लोग डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं. जिस तरह डिप्रेशन तेजी से बढ़ रहा है उसी के साथ मोटिवेशनल स्पीकर की डिमांड भी मार्केट में बढ़ती जा रही है. अगर आप अपनी बातों से लोगों को प्रेरित कर सकते हैं तो आप मोटिवेशनल स्पीकर बनने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं.
जानें इस नए और उभरते फील्ड में करियर कैसे संवारें बता रहे हैं...
- मोटिवेशनल स्पीकर्स कुछ भी शुरू करने से पहले लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचते हैं. इसके बाद ही वे उन्हें प्रेरित करने की शुरुआत करते हैं.
- इसके लिए आपको अच्छे-खासे होमवर्क की जरूरत पड़ती है.
- प्रेरित करते हुए महान लोगों की बातों के उदाहरण के साथ प्रस्तुतीकरण से कही हुई बात को समझाना पड़ता है.
- ये एक ऐसी फील्ड है जिसमें आप लोगों से बात करके मोटी कमाई कर सकते हैं.
- यह न सिर्फ एक मजेदार करियर है, बल्कि एक चुनौतीपूर्ण करियर है.
- इस फील्ड में आपकी सफलता या असफलता उन दर्शकों पर निर्भर करती है, जिसे आप प्रेरित कर रहे हैं. यदि आप लोगों में बातों से जोश भर देते हैं तो यकीन मानें आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता.
- इस फील्ड के लिए नॉलेज बहुत जरूरी है. इसके लिए फिलॉस्फी से लेकर लिटरेचर तक हर तरह की किताबें पढ़नी चाहिए. करेंट अफेयर्स से भी खुद को अपडेट रखना चाहिए.
कोर्सेज
कुछ मैनेजमेंट स्कूल्स में स्पीकिंग पावर पर काम करवाया जाता है. इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि आप मोटिवेशनल स्पीकर बनने के लिए मैनेजमेंट कोर्स ही करें. इस करियर की जरूरत को ध्यान में रखते हुए मजबूत इच्छाशक्ति और पॉजिटिव सोच बनाएं रखें.
कमाई
मोटिवेशनल स्पीकर की आमदनी कम से कम 40-50 हजार से शुरू होकर लाखों में होती है. यदि किसी स्पीकर की कोई किताब नाम कमा लेती है अथवा वह अपने दम पर कोई बड़ा काम कर जाता है तो इसकी डिमांड और बढ़ जाती है.
अवसरआजकल बहुत सी कंपनियां, एजेंसियां, एनजीओ, मैनेजमेंट सहित अन्य दूसरे स्कूल-कॉलेज मोटिवेशनल स्पीकर को नियुक्त करने लगे हैं. इसके अलावा कुछ खास कार्यक्रमों में भी मोटिवेशनल स्पीकर्स को आंमत्रित किया जाता है.
फोर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट
बी-18, कुतुब इंडस्ट्रियल एरिया, नई दिल्ली
टाई हॉवर्ड मोटिवेशनल स्पीकर ट्रेनिंग स्कूल