यूजीसी नेट एग्जाम रद्द होने पर चाहे लेफ्ट के छात्र संगठन JNUSU, AISA, SFI हो या फिर राइट विंग छात्र संगठन सभी सड़क पर उतर चुके हैं. राइट विंग के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े छात्र भी NET के रद्द होते ही विरोध स्वरूप सड़कों पर उतर पड़े.
छात्रों में इसको लेकर संदेह, भ्रम एवं निराशा है क्योंकि इस साल पीएचडी के प्रवेश भी यूजीसी नेट के स्कोर के आधार पर होने हैं. ऐसे में अभ्यर्थियों में अचानक असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है. अभाविप ने शिक्षा मंत्रालय से स्थिति को स्पष्ट करने की मांग की है ताकि छात्रों का समय एवं भविष्य संकट में न आने पाए. नेशनल टेस्टिंंग एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षाओं में भारी अनियमितताएं देखने को मिल रही हैं. नीट-यूजी की परीक्षा में अनियमितता के बाद अब यूजीसी-नेट की परीक्षा का बीते दिन रद्द होना एनटीए जैसी सरकारी संस्था के ऊपर बड़ा प्रश्न चिह्न खड़ा करता है.
इस साल विश्वविद्यालयों में पीएचडी हेतु प्रवेश भी यूजीसी–नेट स्कोर के माध्यम से होने थे. परीक्षा रद्द होने से पीएचडी प्रवेश के अभ्यर्थियों के मन में भी गहरी शंकाएं उत्पन्न हो गई हैं. अभाविप ने शिक्षा मंत्रालय से मांग करते हुए कहा है कि इस संबंध में संबंधित एजेंसियों को स्थिति शीघ्र स्पष्ट करनी चाहिए जिससे पीएचडी के अभ्यर्थियों का भी किसी प्रकार से नुकसान न होने पाए तथा परीक्षा पूर्णतया निष्पक्ष एवं पारदर्शी हो यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए.
अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री याज्ञवल्क्य शुक्ल ने कहा कि परीक्षाओं में लगातार अनियमितताओं की घटनाएं विचलित करने वाली एवं दुर्भाग्यपूर्ण हैं जो न केवल एनटीए जैसी परीक्षा एजेंसियों की क्रेडिबिलिटी पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करती है बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली हैं. यह स्थिति किसी भी प्रकार से स्वीकार्य नहीं है. इसी क्रम में बीते दिन यूजीसी नेट की परीक्षा का रद्द होना, यूजीसी नेट के अभ्यर्थियों के साथ-साथ पीएचडी प्रवेश की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों का भविष्य भी अधर में डालने वाला है.
अहमदाबाद में रहने वाली और यूजीसी नेट की परीक्षा देने वाली माया ने आजतक से बात करते हुए कहा कि पिछले एक साल से इस परीक्षा की तैयारी कर रही थी. इससे पहले दो बार अटेम्प कर चुकी थी जो कंप्यूटर बेस्ड (CBT) परीक्षा थी, लेकिन इस बार पेन और पेपर फॉर्मेट में परीक्षा हुई और परीक्षा कैंसिल कर दी गई. इस परीक्षा के लिए पिछले एक महीने से छुट्टी लेकर तैयारी कर रही थी.
माया ने कहा कि जब भी कोई परीक्षा कैंसिल होती है तब वक्त तो बर्बाद होता ही है साथ में हमारी उम्र भी बढ़ रही होती है. लेकिन सरकार को इस बात का कोई अहसास तक नहीं होता.
जांच में सामने आई गड़बड़ी
बता दें कि 11 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने यूजीसी नेट का फॉर्म भरा था. 18 जून को एग्जाम हुआ लेकिन नेशनल साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स डिवीजन (NCTAU) ने परीक्षा में विसंगतियों की कई शिकायतें मिलने के बाद अपनी जांच शुरू कर दी. जांच में सामने आया कि शिक्षण संस्थाओं के ऑनलाइन चैट फोरम पर यूजीसी नेट के क्वेश्चन पेपर और सॉल्व्ड पेपर के बारे में बातचीत चल रही है. इसके बाद नेट एग्जाम का रद्द करने का फैसला किया गया.